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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण और पादप हार्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. आवृतबीजी (Angiosperms) पौधों में दोहरा निषेचन (Double Fertilization) एक अद्वितीय विशेषता है, जिसमें एक नर युग्मकोविद अण्ड कोशिका से संलयित होकर युग्मनज बनाता है, जबकि दूसरा नर युग्मकोविद दो ध्रुवीय केंद्रकों के साथ संलयित होकर त्रिगुणित (Triploid) प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक का निर्माण करता है।
- 2. C3 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की प्रक्रिया के दौरान ऊर्जा का ह्रास होता है, क्योंकि 'रुबिस्को' (RuBisCO) एंजाइम कार्बन डाइऑक्साइड के साथ-साथ ऑक्सीजन के प्रति भी उच्च आबंधुता रखता है, जिसके परिणामस्वरूप राइबुलोस 1,5-बिफॉस्फेट का ऑक्सीजनेशन होता है।
- 3. ऑक्सिन (Auxin) हार्मोन मुख्य रूप से तने के अग्रभाग (Apical bud) में संश्लेषित होता है और यह पार्श्व कलियों (Lateral buds) की वृद्धि को प्रेरित करता है, जिससे पौधों में 'एपििकल डोमिनेंस' (Apical Dominance) समाप्त हो जाती है।
- 4. प्रकाश संश्लेषण की चक्रीय फोटोफॉस्फोरिलीकरण (Cyclic Photophosphorylation) प्रक्रिया में फोटोसिस्टम I (PS I) और फोटोसिस्टम II (PS II) दोनों सक्रिय होते हैं, तथा इसमें जल के प्रकाश अपघटन (Photolysis) के कारण ऑक्सीजन के साथ NADPH का भी निर्माण होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि आवृतबीजी पौधों में दोहरा निषेचन (Double Fertilization) पाया जाता है, जो इस समूह की मुख्य विशेषता है। इसमें सिन्गैमी और त्रिक संलयन (Triple Fusion) दोनों होते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि 'रुबिस्को' (RuBisCO) एंजाइम की दोहरी प्रकृति (कार्बोक्सिलेज़ और ऑक्सीजिनेज़) के कारण C3 पौधों में प्रकाश श्वसन होता है, जिससे ऊर्जा का व्यय होता है। कथन 3 गलत है क्योंकि ऑक्सिन (Auxin) हार्मोन एपिकल डोमिनेंस को बढ़ावा देता है और पार्श्व कलियों की वृद्धि को संदमित (inhibits) करता है, न कि समाप्त करता है। कथन 4 गलत है क्योंकि चक्रीय फोटोफॉस्फोरिलीकरण में केवल फोटोसिस्टम I (PS I) भाग लेता है, जल का प्रकाश अपघटन नहीं होता और NADPH का निर्माण नहीं होता। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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कृत्रिम उपग्रहों की गति और गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगा रहे उपग्रह की कुल यांत्रिक ऊर्जा ऋणात्मक होती है, जो यह दर्शाती है कि उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बंधा हुआ है और उसे अनंत तक भेजने के लिए बाहरी ऊर्जा की आवश्यकता होगी।
2. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary Satellite) की परिभ्रमण अवधि ठीक 24 घंटे होती है और यह पृथ्वी की भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर पश्चिम से पूर्व की ओर चक्कर लगाता है, जिसकी सतह से ऊँचाई लगभग 36,000 किमी होती है।
3. यदि पृथ्वी अचानक अपनी वर्तमान कोणीय चाल से दोगुनी चाल से घूर्णन करने लगे, तो भूमध्य रेखा पर रखी किसी वस्तु का आभासी भार शून्य हो जाएगा, क्योंकि वहाँ अपकेन्द्रीय त्वरण गुरुत्वीय त्वरण के बराबर हो जाएगा।
4. उपग्रह के भीतर बैठे अंतरिक्ष यात्री को भारहीनता का अनुभव इसलिए होता है क्योंकि उपग्रह और अंतरिक्ष यात्री दोनों पृथ्वी के केंद्र की ओर समान त्वरण (गुरुत्वीय त्वरण) से स्वतंत्र रूप से गिर रहे होते हैं, जिससे उनके बीच कोई प्रतिक्रिया बल (अभिलंब प्रतिक्रिया) कार्य नहीं करता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या (Atomic Radius) में सामान्यतः कमी आती है, क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge) में वृद्धि होती है, जो बाहरी इलेक्ट्रॉनों को नाभिक की ओर अधिक तीव्रता से आकर्षित करता है।
2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान हैलोजन (समूह 17) में सबसे अधिक होता है, और इसमें भी फ्लोरिन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में अधिक होता है।
3. आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) का मान एक ही आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ता है, किंतु द्वितीय आवर्त में बोरॉन (B) की आयनन एन्थैल्पी बेरिलियम (Be) से अधिक होती है, जिसका मुख्य कारण बेरिलियम का पूर्णतः भरा हुआ $2s$ कक्षक है।
4. किसी परमाणु की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) एक आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ती है और वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर घटती है, जिसमें पॉलिंग पैमाने पर फ्लोरिन की विद्युत ऋणात्मकता सबसे अधिक होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आनुवंशिकी और जैव विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेण्डल के स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम (Law of Independent Assortment) का सार्वभौमिक अपवाद 'सहलग्नता' (Linkage) है, जिसमें एक ही गुणसूत्र पर स्थित जीन एक साथ वंशागत होने की प्रवृत्ति रखते हैं।
2. थॉमस हंट मॉर्गन (Thomas Hunt Morgan) ने ड्रोसोफिला मेलानोगास्टर पर अपने प्रयोगों के दौरान यह प्रदर्शित किया कि जीन विनिमय (Crossing Over) की आवृत्ति सहलग्न जीनों के बीच की दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
3. हार्डी-वीनबर्ग संतुलन (Hardy-Weinberg Equilibrium) के अनुसार, एक बड़े यादृच्छिक रूप से संगमित होने वाली आबादी में अलील आवृत्तियाँ पीढ़ियों तक स्थिर रहती हैं, बशर्ते आबादी पर चयन, उत्परिवर्तन, प्रवासन और आनुवंशिक विचलन (Genetic Drift) का प्रभाव न हो।
4. लैमार्क वाद (Lamarckism) के मूल सिद्धांत 'उपार्जित लक्षणों की वंशागति' को अगस्त वीजमैन (August Weismann) द्वारा अपने 'जननद्रव्य सिद्धांत' (Theory of Germplasm) के माध्यम से प्रायोगिक रूप से सही सिद्ध किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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रासायनिक बंधन और अम्ल-क्षार सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल (Lewis Acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने की क्षमता रखती हैं, जबकि लुईस क्षार वे स्पीशीज हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म दान करती हैं।
2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी (Bronsted-Lowry) संकल्पना के अनुसार, जल एक उभयधर्मी (Amphoteric) विलायक के रूप में कार्य करता है जो अम्ल और क्षार दोनों प्रकार की भूमिका निभा सकता है।
3. संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate acid-base pair) में यदि कोई अम्ल प्रबल है, तो उसका संयुग्मी क्षार भी सदैव प्रबल ही होता है।
4. जल के आयनिक गुणनफल ($K_w$) का मान ताप में वृद्धि के साथ बढ़ता है, जिसके कारण उच्च तापमान पर शुद्ध जल का pH मान 7 से कम हो जाता है, किंतु वह उदासीन ही रहता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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