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ऊष्मागतिकी और तापमापी के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऊष्मागतिकी का शून्यवाँ नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) ताप की संकल्पना को परिभाषित करता है, जिसके अनुसार यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्य (Thermal Equilibrium) में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे।
- 2. स्थिर आयतन गैस तापमापी (Constant-volume gas thermometer) अत्यंत संवेदनशीलता के कारण बहुत निम्न तापमान (जैसे -200 °C से नीचे) को मापने के लिए सबसे विश्वसनीय माने जाते हैं, क्योंकि गैसों का प्रसार दाब के साथ रैखिक रूप से बदलता है।
- 3. जल का त्रिक बिंदु (Triple Point of Water), जहाँ बर्फ, जल और जलवाष्प सह-अस्तित्व में होते हैं, केल्विन ताप पैमाने के निर्धारण के लिए आधार बिंदु है, जिसका सटीक मान 273.16 K होता है।
- 4. किसी वस्तु का प्रतिरोध तापमापी (Platinum Resistance Thermometer) सीबेक प्रभाव (Seebeck Effect) के सिद्धांत पर कार्य करता है, जिसमें तापीय ऊर्जा के कारण दो भिन्न धातुओं के जंक्शन पर विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि ऊष्मागतिकी का शून्यवाँ नियम तापीय साम्य की अवधारणा और तापमान के अस्तित्व को स्पष्ट करता है। कथन 2 सही है; स्थिर आयतन गैस तापमापी बहुत कम और बहुत उच्च तापमान को मापने में अत्यधिक सटीक होते हैं। कथन 3 सही है, क्योंकि आधुनिक केल्विन पैमाने को जल के त्रिक बिंदु (273.16 K) के संदर्भ में परिभाषित किया गया है। कथन 4 गलत है क्योंकि प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी तापमान के साथ धातुओं के 'विद्युत प्रतिरोध में परिवर्तन' के सिद्धांत पर कार्य करता है, न कि सीबेक प्रभाव पर (सीबेक प्रभाव थर्मोकपल या तापयुग्म से संबंधित है)। विकिपीडिया संदर्भ
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कृत्रिम उपग्रहों की गति और गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांतों के संदर्भ में…
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Related Questions
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या (Atomic Radius) में सामान्यतः कमी आती है, क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge) में वृद्धि होती है, जो बाहरी इलेक्ट्रॉनों को नाभिक की ओर अधिक तीव्रता से आकर्षित करता है।
2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान हैलोजन (समूह 17) में सबसे अधिक होता है, और इसमें भी फ्लोरिन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में अधिक होता है।
3. आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) का मान एक ही आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ता है, किंतु द्वितीय आवर्त में बोरॉन (B) की आयनन एन्थैल्पी बेरिलियम (Be) से अधिक होती है, जिसका मुख्य कारण बेरिलियम का पूर्णतः भरा हुआ $2s$ कक्षक है।
4. किसी परमाणु की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) एक आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ती है और वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर घटती है, जिसमें पॉलिंग पैमाने पर फ्लोरिन की विद्युत ऋणात्मकता सबसे अधिक होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव पोषण और जैविक अणुओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन B1 (थायमिन) की कमी से 'बेरी-बेरी' रोग होता है, और यह एक जल-विलेय विटामिन है जो कार्बोहाइड्रेट उपापचय (Metabolism) के दौरान सहएंजाइम (Coenzyme) के रूप में कार्य करता है।
2. वसा में घुलनशील विटामिन 'ए' (रेटिनॉल) की कमी से नाइट ब्लाइंडनेस (रतौंधी) और जीरोफथैल्मिया होता है, तथा यह दृश्य वर्णक 'रोडोप्सिन' (Rhodopsin) के संश्लेषण के लिए अनिवार्य है।
3. सेल्यूलोज एक शाखित पॉलिसैकेराइड है जो ग्लूकोज की इकाइयों से मिलकर बनता है, और मानव शरीर में इसे पचाने के लिए 'सेल्यूलेज' एंजाइम प्रचुर मात्रा में स्रावित होता है।
4. प्रोटीन मुख्य रूप से अमीनो अम्लों के बहुलक होते हैं, जो पेप्टाइड बंधों द्वारा आपस में जुड़े रहते हैं, और मानव शरीर के लिए आवश्यक कुछ अमीनो अम्ल भोजन के माध्यम से प्राप्त किए जाते हैं जिन्हें 'आवश्यक अमीनो अम्ल' कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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नाभकीय संलयन (Nuclear Fusion) और तारकीय ऊर्जा उत्पादन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. तारों में ऊर्जा का मुख्य स्रोत प्रोटॉन-प्रोटॉन श्रृंखला और कार्बन-नाइट्रोजन चक्र जैसी नाभकीय संलयन प्रक्रियाएँ हैं, जिनके संपन्न होने के लिए अत्यधिक उच्च तापमान (लगभग $10^7$ केल्विन) और उच्च दाब की आवश्यकता होती है।
2. जब दो हल्के नाभिक (जैसे ड्यूटेरियम और ट्राइटियम) आपस में संलयन करते हैं, तो नए नाभिक का कुल द्रव्यमान संलयन में भाग लेने वाले मूल नाभिकों के कुल द्रव्यमान से अधिक होता है, और यह द्रव्यमान क्षति (Mass defect) आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता समीकरण ($E=mc^2$) के अनुसार ऊर्जा में रूपांतरित होती है।
3. सूर्य के क्रोड (Core) में होने वाले नाभकीय संलयन के दौरान प्रति हीलियम नाभिक के निर्माण में चार हाइड्रोजन नाभिक (प्रोटॉन) संलयित होते हैं, जिसमें पॉजिट्रॉन और न्यूट्रिनो का भी उत्सर्जन होता है।
4. नियंत्रित नाभकीय संलयन को पृथ्वी पर ऊर्जा के दीर्घकालिक स्रोत के रूप में विकसित करने के लिए 'टोकamak' (Tokamak) जैसी चुंबकीय परिबद्ध (Magnetic Confinement) प्रणालियों का उपयोग किया जाता है, जिसमें प्लाज्मा को अत्यधिक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आनुवंशिकी और जैव विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेण्डल के स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम (Law of Independent Assortment) का सार्वभौमिक अपवाद 'सहलग्नता' (Linkage) है, जिसमें एक ही गुणसूत्र पर स्थित जीन एक साथ वंशागत होने की प्रवृत्ति रखते हैं।
2. थॉमस हंट मॉर्गन (Thomas Hunt Morgan) ने ड्रोसोफिला मेलानोगास्टर पर अपने प्रयोगों के दौरान यह प्रदर्शित किया कि जीन विनिमय (Crossing Over) की आवृत्ति सहलग्न जीनों के बीच की दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
3. हार्डी-वीनबर्ग संतुलन (Hardy-Weinberg Equilibrium) के अनुसार, एक बड़े यादृच्छिक रूप से संगमित होने वाली आबादी में अलील आवृत्तियाँ पीढ़ियों तक स्थिर रहती हैं, बशर्ते आबादी पर चयन, उत्परिवर्तन, प्रवासन और आनुवंशिक विचलन (Genetic Drift) का प्रभाव न हो।
4. लैमार्क वाद (Lamarckism) के मूल सिद्धांत 'उपार्जित लक्षणों की वंशागति' को अगस्त वीजमैन (August Weismann) द्वारा अपने 'जननद्रव्य सिद्धांत' (Theory of Germplasm) के माध्यम से प्रायोगिक रूप से सही सिद्ध किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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