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रासायनिक बंधन और अम्ल-क्षार तथा लवणों के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उपसहसंयोजक बंध (Coordinate Bond) एक विशेष प्रकार का सहसंयोजक बंध है जिसमें साझा किए जाने वाले इलेक्ट्रॉन युग्म का योगदान दोनों परमाणुओं द्वारा समान रूप से होता है, और इसे तीर के निशान ($(\rightarrow)$) द्वारा दर्शाया जाता है।
- 2. लुईस संकल्पना के अनुसार, वे रासायनिक स्पीशीज जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने की प्रवृत्ति रखती हैं, लुईस अम्ल कहलाती हैं (जैसे $BF_3$, $AlCl_3$ और धातुायन), जबकि लुईस क्षार इलेक्ट्रॉन युग्म दान करते हैं।
- 3. दुर्बल अम्ल (जैसे एसिटिक अम्ल) और प्रबल क्षार (जैसे सोडियम हाइड्रोक्साइड) के उदासीनीकरण से बने लवण का जलीय विलयन जल-अपघटन के कारण क्षारीय प्रकृति प्रदर्शित करता है, जिससे विलयन का pH मान 7 से अधिक हो जाता है।
- 4. आर्हेनियस सिद्धांत के अनुसार, अम्ल वे पदार्थ हैं जो जलीय विलयन में विघटित होकर हाइड्रोजन आयन या हाइड्रोनियम आयन ($H_3O^+$) उत्पन्न करते हैं, तथा यह सिद्धांत जलीय माध्यम के साथ-साथ गैसीय अवस्था और अजलीय विलायकों पर भी पूर्णतः लागू होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि उपसहसंयोजक बंध (जिसे दानी-स्वीकर्ता बंध भी कहते हैं) में साझा होने वाले इलेक्ट्रॉन युग्म का योगदान केवल एक ही परमाणु (दाता) द्वारा किया जाता है, दोनों परमाणुओं द्वारा नहीं। कथन 2 सत्य है; लुईस सिद्धांत के अनुसार इलेक्ट्रॉन युग्मग्राही लुईस अम्ल और इलेक्ट्रॉन युग्मदाता लुईस क्षार होते हैं। कथन 3 सत्य है क्योंकि दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार के लवण का जल-अपघटन होने पर विलयन में $OH^-$ आयनों की अधिकता हो जाती है जिससे pH मान 7 से अधिक (क्षारीय) हो जाता है। कथन 4 असत्य है क्योंकि आर्हेनियस सिद्धांत केवल जलीय माध्यम तक ही सीमित है और यह गैसीय अवस्था या अजलीय विलायकों पर लागू नहीं होता है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर…
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण और पादप हार्मोन्स के…
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फेटलिस (Erythroblastosis Fetalis) की समस्या तब उत्पन्न होती है जब Rh-ऋणात्मक माता और Rh-धनात्मक पिता की द्वितीय या उसके बाद की संतान Rh-धनात्मक होती है, क्योंकि प्रथम गर्भावस्था के दौरान माँ के शरीर में बने Rh एंटीबॉडीज भ्रूण की लाल रक्त कणिकाओं को नष्ट करने लगते हैं।
2. रुधिर स्कंदन (Blood Coagulation) की प्रक्रिया में, प्रोथ्रोम्बिन को थ्रोम्बिन में बदलने के लिए थ्रोम्बोप्लास्टिन और कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) की उपस्थिति अनिवार्य होती है, तथा फाइब्रिनोजेन एक अघुलनशील प्रोटीन है जो सीधे रक्त का थक्का जमाता है बिना किसी एंजाइमी रूपांतरण के।
3. रुधिर वर्ग 'AB' वाले व्यक्तियों की प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B दोनों प्राकृतिक एंटीबॉडी (Agglutinins) अनुपस्थित होते हैं, जिसके कारण ये किसी भी वर्ग से रक्त प्राप्त कर सकते हैं और इन्हें 'सर्वग्राही' (Universal Recipient) कहा जाता है।
4. मानव हृदय का पेसमेकर साइनोएट्रियल नोड (SAN) कहलाता है, जो दाहिने आलिंद के ऊपरी दाहिने कोने पर स्थित होता है और यह स्वतः उत्तेजना उत्पन्न करने की क्षमता रखता है, जिससे हृदय की संकुचन तरंगें प्रारंभ होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर के पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आमाशय की भित्ति में मौजूद ऑक्सीनटिक कोशिकाएँ (Oxyntic cells) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ-साथ 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) स्रावित करती हैं, जो आंत में विटामिन B12 के अवशोषण के लिए अनिवार्य होता है।
2. मानव श्वसन तंत्र में गैसों का विनिमय केवल कूपिकाओं (Alveoli) की विसरण झिल्ली के पार होता है, जो कि एण्डोथीलियम, आधार झिल्ली और शल्की उपकला से मिलकर बनी होती है, और इस झिल्ली की कुल मोटाई एक मिलीमीटर से अधिक होती है।
3. हृदय चक्र के दौरान, 'आलिंद निलय बंडल' (Bundle of His) और पुरकिंजे तंतु (Purkinje fibres) वेंट्रिकुलर पेशियों को विद्युत आवेग पहुँचाते हैं, जिससे दोनों निलयों का संकुचन एक साथ होता है और रक्त धमनियों में पंप होता है।
4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में माइलिन आच्छद (Myelin sheath) का निर्माण परिधीय तंत्रिका तंत्र में 'श्वान कोशिकाओं' (Schwann cells) द्वारा होता है, जबकि केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में यह कार्य 'ऑलिगोडेंड्रोसाइट्स' (Oligodendrocytes) द्वारा किया जाता है, जिसके कारण तंतुओं में आवेग संचरण की गति तीव्र हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन और ईंधन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्केन्स (Alkanes) संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनमें सभी कार्बन-कार्बन बंध एकल सहसंयोजक बंध होते हैं, और इनका सामान्य सूत्र $C_nH_{2n+2}$ होता है, जबकि एल्कीन्स और एल्काइन्स असंतृप्त हाइड्रोकार्बन की श्रेणी में आते हैं।
2. 'ऑक्टेन संख्या' (Octane Number) डीजल इंजनों में प्रयुक्त ईंधनों की टर्बुलेंट दहन क्षमता और उनके प्रस्फोटन (Knocking) प्रतिरोध का माप है, जिसमें उच्च ऑक्टेन ईंधन कम प्रस्फोटन उत्पन्न करता है।
3. द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है, और सुरक्षा की दृष्टि से इसमें जो तीव्र गंधयुक्त पदार्थ मिलाया जाता है, वह एथिल मर्कैप्टेन ($C_2H_5SH$) होता है।
4. पेट्रोल की गुणवत्ता को सुधारने और उसके अपस्फोटन (Knocking) को रोकने के लिए अतीत में 'टेट्राएथिल लेड' (TEL) का उपयोग एंटी-नॉक एजेंट के रूप में किया जाता था, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य पर इसके विषैلے प्रभावों के कारण अब प्रतिबंधित है।
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प्रकाशिकी (Optics) और लेंस-दर्पण के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब किसी उत्तल लेंस को ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक हो जाती है और वह अभिसारी (Converging) लेंस के बजाय अपसारी (Diverging) लेंस की तरह व्यवहार करने लगता है。
2. गोलीय दर्पण की फोकस दूरी ($f$) और उसकी वक्रता त्रिज्या ($R$) के बीच का संबंध $R = 2f$ होता है, और यह संबंध इस बात पर निर्भर करता है कि दर्पण हवा में रखा है या किसी अन्य सघन माध्यम में डूबा हुआ है。
3. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) की परिघटना के लिए प्रकाश किरण का सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाना अनिवार्य है, तथा आपतन कोण का मान उस युग्म के लिए क्रांतिक कोण (Critical Angle) से अधिक होना चाहिए。
4. एक संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope) की आवर्धन क्षमता को बढ़ाने के लिए अभिदृश्यक (Objective) लेंस और नेत्रलिका (Eyepiece) दोनों की फोकस दूरी बहुत अधिक होनी चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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