General Science
Asked 2 hours ago · Viewed 0 times
सुकेन्द्रिक (Eukaryotic) कोशिकाओं में कोशिका विभाजन और कोशिकांगों की सूक्ष्म संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की डिप्लोटीन (Diplotene) उप-अवस्था के दौरान समझात गुणसूत्रों के बीच 'काइऐज्माटा' (Chiasmata) का स्पष्टीकरण और निर्माण होता है, जो जीन विनिमय (Crossing Over) के पूर्ण होने का दृश्य प्रमाण है।
- 2. समसूत्री विभाजन (Mitosis) की मध्यावस्था (Metaphase) में गुणसूत्र कोशिका के मध्य रेखा पर व्यवस्थित होते हैं और तर्कु तंतु (Spindle fibres) गुणसूत्रों के काइनेटोकौर (Kinetochore) प्रोटीन से जुड़ते हैं।
- 3. गाल्जी काय (Golgi apparatus) की संरचना में 'सिस' (Cis) फेस हमेशा केंद्रक की ओर और 'ट्रांस' (Trans) फेस प्लाज्मा झिल्ली की ओर होता है, तथा ये दोनों फेस संरचनात्मक और कार्यात्मक रूप से पूरी तरह समरूप होते हैं।
- 4. राइबोसोम का निर्माण केंद्रिका (Nucleolus) के भीतर होता है, जहाँ 80S प्रकार के राइबोसोम के उप-इकाइयाँ (60S और 40S) और 70S प्रकार के राइबोसोम (50S और 30S) का संयोजन पूर्ण होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की डिप्लोटीन उप-अवस्था में 'जीन विनिमय' के बाद समझात गुणसूत्र अलग होने लगते हैं, किंतु वे X-आकार की संरचनाओं द्वारा जुड़े रहते हैं जिन्हें काइऐज्माटा (Chiasmata) कहा जाता है। कथन 2 सही है क्योंकि समसूत्री विभाजन की मध्यावस्था (Metaphase) में गुणसूत्रों का संक्षेपण अधिकतम होता है और तर्कु तंतु काइनेटोकौर प्रोटीन से जुड़कर उन्हें मध्य रेखा (Metaphase plate) पर संरेखित करते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि गाल्जी काय के 'सिस' (प्रारंभिक/निर्माता) और 'ट्रांस' (परिपक्व) फेस ध्रुवीय रूप से भिन्न होते हैं और वे संरचनात्मक तथा कार्यात्मक रूप से समरूप नहीं होते हैं। कथन 4 आंशिक रूप से गलत है क्योंकि 80S और 70S राइबोसोम की उप-इकाइयों का संश्लेषण केंद्रिका में होता है, लेकिन उनका पूर्ण संयोजन कोशिका द्रव्य में होता है और 70S राइबोसोम मुख्य रूप से प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं तथा माइटोकॉन्ड्रिया/हरितलवक में पाए जाते हैं। विकिपीडिया संदर्भ
अगला प्रश्न →
तरंग गति और ध्वनि तरंगों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1.…
← पिछला प्रश्न
सुकेन्द्रिक (Eukaryotic) कोशिकाओं में पाए जाने वाले…
Related Questions
→
ऊष्मागतिकी और तापमापी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऊष्मागतिकी का शून्य-वाँ नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) ताप की संकल्पना को परिभाषित करता है और यह बताता है कि यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्यावस्था में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्यावस्था में होंगे।
2. स्थिर आयतन गैस तापमापी (Constant-volume gas thermometer) अत्यंत संवेदनशील और सटीक होते हैं, क्योंकि गैसों का दाब ताप के साथ रैखिक रूप से परिवर्तित होता है, और इनका उपयोग अत्यंत उच्च तापमान (जैसे 1500°C से अधिक) को मापने के लिए किया जाता है।
3. जल का त्रिक बिंदु (Triple Point of Water), जिस पर बर्फ, द्रव जल और जलवाष्प सह-अस्तित्व में होते हैं, का मान केल्विन पैमाने पर ठीक 273.16 K और सेल्सियस पैमाने पर 0.01°C होता है।
4. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic Process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान हो सकता है, बशर्ते प्रक्रम की कुल आंतरिक ऊर्जा नियत बनी रहे और गैस पर किया गया कार्य शून्य हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
कार्बनिक रसायन और हाइड्रोकार्बन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Alkanes) का सामान्य सूत्र $C_nH_{2n+2}$ होता है, और इनमें सभी कार्बन-कार्बन बंध एकल सहसंयोजक बंध होते हैं, जिसके कारण ये सामान्य परिस्थितियों में रासायनिक रूप से अपेक्षाकृत निष्क्रिय होते हैं।
2. असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (Alkenes and Alkynes) में क्रमशः द्विबंध और त्रिबंध पाए जाते हैं, और ये योगात्मक (Addition) अभिक्रियाएं प्रदर्शित करते हैं क्योंकि इनमें बहुआबंधों के कारण इलेक्ट्रॉन घनत्व उच्च होता है।
3. एल्काइनों (Alkynes) में कार्बन परमाणुओं के बीच त्रिबंध होता है, जिसमें एक सिग्मा ($(\sigma)$) और दो पाई ($(\pi)$) बंध होते हैं, और इनका पहला सदस्य एसिटिलीन या एथाइन है।
4. एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (जैसे बेंजीन) हकल के नियम ($4n+2$ पाई इलेक्ट्रॉन नियम) का पालन करते हैं और ये अत्यधिक अनुनाद (Resonance) स्थायित्व दर्शाने के कारण अन्य असंतृप्त हाइड्रोकार्बन की तरह आसानी से योगात्मक अभिक्रियाएं देते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
प्रकाशिकी (Optics) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब एक वर्णीय प्रकाश किरण किसी सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है, तो उसकी आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य दोनों अपरिवर्तित रहते हैं, जबकि उसकी चाल में वृद्धि हो जाती है।
2. एक पतले उत्तल लेंस को जब किसी ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक हो जाती है और वह अभिसारी लेंस के बजाय अपसारी लेंस की भाँति व्यवहार करने लगता है।
3. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) की घटना के लिए आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए तथा प्रकाश किरण को सघन माध्यम से विरल माध्यम में ही जाना चाहिए।
4. खगोलीय दूरदर्शी की आवर्धन क्षमता को बढ़ाने के लिए अभिदृश्यक लेंस की फोकस दूरी बहुत कम और नेत्रलिका की फोकस दूरी बहुत अधिक होनी चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
विद्युत चुंबकीय प्रेरण और चुम्बकत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी बंद परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ से गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय-दर के अनुक्रमानुपाती होता है।
2. लेंज का नियम (Lenz's Law) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का एक प्रत्यक्ष परिणाम है, जो यह बताता है कि प्रेरित धारा की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिससे वह स्वयं उत्पन्न होती है।
3. स्वप्रेरकत्व (Self-inductance) का एसआई मात्रक 'हेनरी' (Henry) है, और यह किसी कुंडली का वह गुण है जो कुंडली में प्रवाहित होने वाली धारा के परिवर्तन का विरोध करता है।
4. किसी धारावाही परिनालिका (Solenoid) के भीतर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता परिनालिका के क्रोस-सेक्शनल क्षेत्रफल पर निर्भर करती है तथा परिनालिका की लंबाई बढ़ाने से चुंबकीय क्षेत्र का मान बढ़ जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.