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उत्परिवर्तन (Mutation) और आनुवंशिक विचलन (Genetic Drift) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ह्यूगो डी व्रीज़ (Hugo de Vries) के 'उत्परिवर्तन सिद्धांत' के अनुसार, जातियों की उत्पत्ति अचानक होने वाले बड़े और वंशागत परिवर्तनों (जिन्हें साल्टेशन या Saltation कहा जाता है) के कारण होती है, न कि क्रमिक चयन के द्वारा।
  2. 2. आनुवंशिक विचलन (Genetic Drift) एक यादृच्छिक प्रक्रिया है जो छोटे समष्टियों में अधिक प्रभावी होती है, और यह अनुकूलन के आधार पर एलील आवृत्तियों को नियमित रूप से दिशा प्रदान करती है।
  3. 3. 'फाउंडर इफेक्ट' (Founder Effect) और 'बॉटलनेक इफेक्ट' (Bottleneck Effect) आनुवंशिक विचलन के विशिष्ट उदाहरण हैं, जो समष्टि में आनुवंशिक विविधता को कम कर सकते हैं।
  4. 4. गुणसूत्रीय उत्परिवर्तन में 'एन्डुप्लीकेशन' या पॉलीप्लॉइडि (Polyploidy) मुख्य रूप से समजात गुणसूत्रों के जोड़े के पृथक्करण में विफलता के कारण होती है, जो पादप प्रजातियों के तीव्र विकास में सहायक हो सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि ह्यूगो डी व्रीज़ ने इवनिंग प्रिमरोज़ पर कार्य करते हुए 'उत्परिवर्तन सिद्धांत' प्रतिपादित किया था जिसके अनुसार स्पीशीज़ का विकास क्रमिक न होकर अचानक बड़े परिवर्तनों (साल्टेशन) द्वारा होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि आनुवंशिक विचलन एक पूरी तरह से यादृच्छिक (random) प्रक्रिया है जो बिना किसी अनुकूलन के लाभ या हानि के एलील आवृत्तियों को बदलती है; यह दिशाहीन होती है। कथन 3 सही है, 'फाउंडर इफेक्ट' और 'बॉटलनेक इफेक्ट' आनुवंशिक विचलन के ही रूप हैं। कथन 4 सही है, पॉलीप्लॉइडि या गुणसूत्रीय विसंगतियां कोशिका विभाजन के दौरान गुणसूत्रों के पृथक्करण में विफलता के कारण उत्पन्न होती हैं, जो पौधों में नई जातियों के उद्भव का एक प्रमुख कारण हैं। इस विषय पर विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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