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पदार्थ की अवस्थाओं, उनके अंतरआणविक बलों तथा परमाणु संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी गैस को अत्यंत उच्च दाब और अत्यंत निम्न तापमान पर द्रवीकृत किया जा सकता है, और क्रांतिक तापमान (Critical Temperature) वह उच्चतम तापमान होता है जिसके ऊपर गैस को केवल दाब बढ़ाकर भी द्रवीकृत नहीं किया जा सकता है।
- 2. परमाणु के क्वांटम यांत्रिक मॉडल में हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत का पालन करते हुए इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की प्रायिकता के क्षेत्र को 'ऑर्बिटल' कहा जाता है, जिसकी ऊर्जा मुख्य रूप से मुख्य क्वांटम संख्या और दिगंशी क्वांटम संख्या पर निर्भर करती है।
- 3. बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं में कक्षकों के भरने का क्रम आफबाऊ नियम के अनुसार होता है, जिसमें किसी भी कक्षक के लिए ($n + l$) का मान कम होने पर उसकी ऊर्जा अधिक होती है और वह पहले भरता है।
- 4. पावली के अपवर्जन नियम के अनुसार, किसी परमाणु में किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं के मान सर्वसम नहीं हो सकते, और एक कक्षक में विपरीत चक्रण वाले अधिकतम दो ही इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: क्रांतिक तापमान किसी गैस का वह विशिष्ट तापमान है जिसके ऊपर उस गैस को चाहे कितना भी उच्च दाब क्यों न लगाया जाए, द्रवीकृत नहीं किया जा सकता है। कथन 2 सही है: क्वांटम यांत्रिक मॉडल के अनुसार अंतरिक्ष में वह क्षेत्र जहाँ इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की प्रायिकता अधिकतम होती है, 'ऑर्बिटल' कहलाता है और कक्षकों की ऊर्जा ($n+l$) नियम द्वारा तय होती है। कथन 3 गलत है: आफबाऊ नियम के अनुसार, जिस कक्षक के लिए ($n + l$) का मान कम होता है, उसकी ऊर्जा **कम** होती है और वह पहले भरता है; अधिक ($n + l$) मान वाले कक्षक की ऊर्जा अधिक होती है और वह बाद में भरता है। कथन 4 सही है: पावली का अपवर्जन नियम बताता है कि किसी परमाणु में किन्हीं भी दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं (मुख्य, दिगंशी, चुंबकीय और चक्रण) के मान एक समान नहीं हो सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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मानव शरीर के पाचन और तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आमाशय की भित्ति में स्थित ऑक्सीन्टिक कोशिकाएं (Oxyntic cells) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ-साथ 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) का भी स्रावण करती हैं, जो क्षुद्रंत्र में विटामिन $B_{12}$ के अवशोषण के लिए अनिवार्य होता है।
2. आंतरी तंत्रिका तंत्र (Enteric Nervous System) को 'दूसरा मस्तिष्क' भी कहा जाता है, क्योंकि यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) की प्रत्यक्ष सहायता के बिना आंतों की गतिशीलता और स्रावण को स्वतंत्र रूप से नियंत्रित कर सकता है।
3. जब हम भोजन को निगलते हैं, तो अन्ननली (Esophagus) में होने वाली क्रमानुकुंचन (Peristalsis) गति को अनुकंपीय तंत्रिका तंत्र (Sympathetic nervous system) द्वारा विशेष रूप से त्वरित किया जाता है, जबकि परानुकंपीय तंत्रिका तंत्र (Parasympathetic) इसका संदमन करता है।
4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में बेसल गैंगलिया (Basal ganglia) और अनुमस्तिष्क (Cerebellum) दोनों ही मोटर समन्वय और स्वैच्छिक पेशियों की चिकनी गतिविधियों के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जहाँ अनुमस्तिष्क मुख्य रूप से शरीर का संतुलन और मुद्रा बनाए रखता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अनुलेखन (Transcription) और आनुवंशिक कूट (Genetic Code) की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यूकैरियोट्स में अनुलेखन के दौरान बनने वाले प्राथमिक अनुलेख (Primary Transcript) में केवल एक्जॉन (Exons) होते हैं और इंट्रॉन (Introns) को स्प्लिसिंग प्रक्रिया द्वारा हटा दिया जाता है, जिसके बाद इसे 'कैपिंग' और 'टेलिंग' से गुजरना पड़ता है।
2. आनुवंशिक कूट त्रिक (Triplet) प्रकृति का होता है, जिसमें कुल 64 प्रकूट (Codons) होते हैं, जिनमें से तीन प्रकूट (UAA, UAG, UGA) किसी भी अमीनो अम्ल के लिए संकेत नहीं देते हैं और इन्हें 'समापन प्रकूट' (Termination Codons) कहा जाता है。
3. एमिनोएसिल-tRNA सिंथेटेस (Aminoacyl-tRNA synthetase) एंजाइम विशिष्ट अमीनो अम्ल को उसके संगत tRNA से जोड़ने (चार्जिंग) के लिए उत्तरदायी होता है, जो प्रोटीन संश्लेषण के अनुवाद (Translation) चरण को संभव बनाता है।
4. ऑपेरॉन मॉडल (Operon Model) के अनुसार, लैक्टोज ऑपेरॉन (Lac Operon) एक 'दमनकारी' (Inducible) प्रणाली है, जिसमें लैक्टोज स्वयं 'प्रेरक' (Inducer) के रूप में कार्य करता है जो दमनकारी प्रोटीन को निष्क्रिय कर ऑपेरॉन को चालू करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विटामिन, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन $B_{12}$ (सायनोकोबलामिन) एकमात्र ऐसा जल-विलेय विटामिन है जिसमें कोबाल्ट धातु पाई जाती है, और इसका संचय मुख्य रूप से यकृत (Liver) में कई वर्षों तक हो सकता है।
2. सेल्युलोज एक पादप पॉलीसेकराइड है जिसमें ग्लूकोज इकाइयाँ $\beta$-1,4 ग्लाइकोसिडिक बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं, और मानव शरीर में इसका पाचन करने के लिए 'सेल्युलेज' एंजाइम प्रचुर मात्रा में स्रावित होता है।
3. प्रोटीन की प्राथमिक संरचना (Primary Structure) पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला में अमीनो अम्लों के रैखिक क्रम को दर्शाती है, जो पेप्टाइड बंधों द्वारा जुड़ी होती है और प्रोटीन के विशिष्ट जैविक गुणों को निर्धारित करती है।
4. विटामिन D एक वसा-विलेय विटामिन है जो प्रो-हार्मोन के रूप में कार्य करता है, और इसकी कमी से वयस्कों में 'ऑस्टियोमैलेसिया' तथा बच्चों में 'रिकेट्स' रोग हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों (Periodic Trends) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या (Atomic Radius) सामान्यतः घटती है, क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge) में वृद्धि होती है, जो बाहरी इलेक्ट्रॉनों को नाभिक की ओर अधिक तीव्रता से खींचती है।
2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान হالوجेन समूहों में सबसे अधिक होता है, और आवर्त सारणी में फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में सबसे अधिक होता है।
3. आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) का मान किसी आवर्त में क्षारीय धातुओं (Alkali metals) के लिए न्यूनतम और उत्कृष्ट गैसों (Noble gases) के लिए अधिकतम होता है।
4. तत्वों के धात्विक गुण (Metallic Character) किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर घटते हैं, जबकि अधात्विक गुण (Non-metallic Character) बढ़ते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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