General Science
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कार्बनिक रसायन और हाइड्रोकार्बन के रासायनिक गुणों तथा ईंधनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. एल्केन्स (Paraffins) मुख्य रूप से संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जो सामान्यतः प्रतिस्थापन अभिक्रियाएं (Substitution reactions) दर्शाते हैं, जबकि एल्कीन और एल्काइन असंतृप्त हाइड्रोकार्बन हैं जो मुख्य रूप से योगात्मक अभिक्रियाएं (Addition reactions) देते हैं।
- 2. पेट्रोलियम के प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation) के दौरान विभिन्न अंशों के क्वथनांकों के अंतर का उपयोग किया जाता है, जिसमें सबसे कम क्वथनांक वाले हल्के अंश (जैसे पेट्रोल और डीजल) टॉवर के सबसे निचले हिस्से में संघनित होते हैं।
- 3. गैसोलीन की गुणवत्ता का निर्धारण 'ऑक्टेन संख्या' (Octane Number) द्वारा किया जाता है, जहाँ आइसो-ऑक्टेन (जिसकी ऑक्टेन संख्या 100 मानी जाती है) के मुकाबले n-हेप्टेन (जिसकी ऑक्टेन संख्या 0 होती है) नॉकिंग या अपस्फोटन (Knocking) का सबसे अधिक प्रतिरोध करता है।
- 4. 'मार्कोवनीकॉव का नियम' (Markovnikov's Rule) असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में असममित योगात्मक अभिक्रियाओं के दौरान ऋناत्मक भाग के जुड़ने की दिशा को निर्धारित करता है, जिसके अनुसार अभिकर्मक का ऋणात्मक भाग उस कार्बन परमाणु से जुड़ता है जिसके पास हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या न्यूनतम होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि एल्केन्स संतृप्त हाइड्रोकार्बन हैं जो मुक्त मूलक प्रतिस्थापन (Free radical substitution) अभिक्रियाएं देते हैं, जबकि असंतृप्त हाइड्रोकार्बन योगात्मक अभिक्रियाएं प्रदर्शित करते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि प्रभाजी आसवन में कम क्वथनांक वाले हल्के अंश टॉवर के शीर्ष (सबसे ऊपर) पर संघनित होते हैं, नीचे नहीं। कथन 3 गलत है क्योंकि n-हेप्टेन अत्यधिक नॉकिंग उत्पन्न करता है (ऑक्टेन संख्या 0) और इसका प्रतिरोध नहीं करता, जबकि आइसो-ऑक्टेन नॉकिंग का प्रबल प्रतिरोध करता है (ऑक्टेन संख्या 100)। कथन 4 सही है; मार्कोवनीकॉव नियम के अनुसार अभिकर्मक का ऋणात्मक भाग उस द्विआबंधित कार्बन पर जुड़ता है जिस पर कम हाइड्रोजन होते हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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Related Questions
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मानव शरीर में होने वाले संक्रामक रोगों और उनके रोगजनकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'क्षय रोग' (Tuberculosis) माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु के कारण होता है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है और इसके निदान के लिए 'मान्टू परीक्षण' (Mantoux test) तथा उपचार के लिए 'डॉट्स्' (DOTS) प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
2. 'एड्स' (AIDS) एक विषाणु जनित रोग है जो ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV) के कारण होता है, और यह वायरस मुख्य रूप से शरीर की सहायक टी-लिम्फोसाइट्स ($CD4^+$ T cells) कोशिकाओं को नष्ट करके प्रतिरक्षा तंत्र को गंभीर रूप से कमजोर कर देता है।
3. 'मलेरिया' प्लाज्मोडियम परजीवी के कारण होने वाला एक प्रोटोजोआ जनित रोग है, जिसका संचरण मादा एनोफेलीज मच्छर द्वारा होता है, और इसके उपचार के लिए सिनकोना वृक्ष की छाल से प्राप्त 'कुनैन' (Quinine) औषधि का उपयोग किया जाता है।
4. 'हेपेटाइटिस बी' एक संक्रामक रोग है जो केवल दूषित जल और भोजन के सेवन से फैलता है, और इसका विषाणु यकृत (Liver) को प्रभावित करता है जिसके कारण सिरोसिस या कैंसर जैसी गंभीर स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यूकैरियोटिक कोशिका चक्र के नियमन और कोशिका विभाजन (Cell Division) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोशिका चक्र का नियंत्रण 'साइक्लिन' (Cyclins) और 'साइक्लिन-डिपेंडेंट किनेसेस' (CDKs) नामक प्रोटीन परिसरों द्वारा होता है, जहाँ CDKs फॉस्फोराइलेशन के माध्यम से कोशिका चक्र के अगले चरण को प्रेरित करते हैं।
2. सूत्री विभाजन (Mitosis) की एनाफेज (Anaphase) अवस्था के दौरान, सिस्टर क्रोमैटिड्स एक-दूसरे से अलग होकर विपरीत ध्रुवों की ओर गति करते हैं, और यह गति मुख्य रूप से काइनेटोकोर तंतुओं के संकुचन और माइक्रोट्यूब्यूल्स के डीपॉलिमराइजेशन द्वारा संचालित होती है।
3. अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की पैकीटीन अवस्था में 'क्रॉसिंग ओवर' (Crossing Over) की प्रक्रिया होती है, जिसमें समजात गुणसूत्रों की गैर-सह-भगिनी अर्धगुणसूत्रिकाओं के बीच आनुवंशिक सामग्री का आदान-प्रदान 'रेकॉम्बिनेस' एंजाइम की सहायता से होता है।
4. पादप कोशिकाओं में कोशिका द्रव्य विभाजन (Cytokinesis) जन्तु कोशिकाओं की तरह 'खांच निर्माण' (Cleavage furrow method) द्वारा होता है, क्योंकि पादप कोशिकाओं में दृढ़ कोशिका भित्ति पाई जाती है जो अंदर की ओर मुड़ सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अनुलेखन (Transcription) और आनुवंशिक कूट (Genetic Code) की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यूकैरियोट्स में अनुलेखन के दौरान बनने वाले प्राथमिक अनुलेख (Primary Transcript) में केवल एक्जॉन (Exons) होते हैं और इंट्रॉन (Introns) को स्प्लिसिंग प्रक्रिया द्वारा हटा दिया जाता है, जिसके बाद इसे 'कैपिंग' और 'टेलिंग' से गुजरना पड़ता है।
2. आनुवंशिक कूट त्रिक (Triplet) प्रकृति का होता है, जिसमें कुल 64 प्रकूट (Codons) होते हैं, जिनमें से तीन प्रकूट (UAA, UAG, UGA) किसी भी अमीनो अम्ल के लिए संकेत नहीं देते हैं और इन्हें 'समापन प्रकूट' (Termination Codons) कहा जाता है。
3. एमिनोएसिल-tRNA सिंथेटेस (Aminoacyl-tRNA synthetase) एंजाइम विशिष्ट अमीनो अम्ल को उसके संगत tRNA से जोड़ने (चार्जिंग) के लिए उत्तरदायी होता है, जो प्रोटीन संश्लेषण के अनुवाद (Translation) चरण को संभव बनाता है।
4. ऑपेरॉन मॉडल (Operon Model) के अनुसार, लैक्टोज ऑपेरॉन (Lac Operon) एक 'दमनकारी' (Inducible) प्रणाली है, जिसमें लैक्टोज स्वयं 'प्रेरक' (Inducer) के रूप में कार्य करता है जो दमनकारी प्रोटीन को निष्क्रिय कर ऑपेरॉन को चालू करता है।
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मानव शरीर के पाचन और तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आमाशय की भित्ति में स्थित ऑक्सीन्टिक कोशिकाएं (Oxyntic cells) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ-साथ 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) का भी स्रावण करती हैं, जो क्षुद्रंत्र में विटामिन $B_{12}$ के अवशोषण के लिए अनिवार्य होता है।
2. आंतरी तंत्रिका तंत्र (Enteric Nervous System) को 'दूसरा मस्तिष्क' भी कहा जाता है, क्योंकि यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) की प्रत्यक्ष सहायता के बिना आंतों की गतिशीलता और स्रावण को स्वतंत्र रूप से नियंत्रित कर सकता है।
3. जब हम भोजन को निगलते हैं, तो अन्ननली (Esophagus) में होने वाली क्रमानुकुंचन (Peristalsis) गति को अनुकंपीय तंत्रिका तंत्र (Sympathetic nervous system) द्वारा विशेष रूप से त्वरित किया जाता है, जबकि परानुकंपीय तंत्रिका तंत्र (Parasympathetic) इसका संदमन करता है।
4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में बेसल गैंगलिया (Basal ganglia) और अनुमस्तिष्क (Cerebellum) दोनों ही मोटर समन्वय और स्वैच्छिक पेशियों की चिकनी गतिविधियों के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जहाँ अनुमस्तिष्क मुख्य रूप से शरीर का संतुलन और मुद्रा बनाए रखता है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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