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विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथ (Electric Circuits) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी धात्विक चालक का विद्युत प्रतिरोध (Electrical Resistance) उसकी लंबाई के अनुक्रमानुपाती और उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है, तथा तापमान में वृद्धि होने पर धात्विक चालकों का प्रतिरोध बढ़ जाता है।
- 2. किर्चॉफ का प्रथम नियम (धारा नियम या KCL) ऊर्जा संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी संधि पर मिलने वाली सभी धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
- 3. श्रेणीक्रम (Series) में जुड़े प्रतिरोधों का समतुल्य प्रतिरोध परिपथ में जुड़े व्यक्तिगत प्रतिरोधों के योग से अधिक होता है, और इस प्रकार के संयोजन में प्रत्येक प्रतिरोध से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा का मान समान रहता है।
- 4. किसी विद्युत परिपथ में शक्ति क्षय (Power Dissipation) का मान धारा के वर्ग और प्रतिरोध के गुणनफल के समानुपाती होता है, जिसका उपयोग जूल के तापनीय प्रभाव (Joule heating) को समझने में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि किसी चालक का प्रतिरोध $R = \rho \frac{l}{A}$ होता है और तापमान बढ़ाने पर धातुओं के मुक्त इलेक्ट्रॉनों का प्रागुल्मी प्रकीर्णन (scattering) बढ़ने से प्रतिरोध बढ़ता है। कथन 2 गलत है क्योंकि किर्चॉफ का प्रथम नियम (KCL) आवेश संरक्षण (Conservation of Charge) के नियम पर आधारित है, जबकि द्वितीय नियम (KVL) ऊर्जा संरक्षण पर आधारित होता है। कथन 3 सही है क्योंकि श्रेणीक्रम संयोजन में कुल प्रतिरोध $R = R_1 + R_2 + \dots$ होता है जो व्यक्तिगत प्रतिरोधों से अधिक होता है और इसमें धारा समान बहती है। कथन 4 सही है, शक्ति क्षय $P = I^2R$ होता है जो विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार जूल के तापीय प्रभाव को दर्शाता है। अतः सही विकल्प 1, 3 और 4 है।
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जीन नियमन और आनुवंशिक कूट के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैकब और मोनोड द्वारा प्रतिपादित 'लैक ऑपेरॉन' (Lac Operon) मॉडल एक दमनकारी (Repressible) प्रणाली का उदाहरण है, जिसमें लैक्टोज की अनुपस्थिति में दमनकारी प्रोटीन ऑपरेटर जीन से जुड़कर अनुलेखन को रोक देता है।
2. यूकेरियोट्स में जीन अभिव्यक्ति (Gene Expression) के नियमन का एक प्रमुख स्तर 'स्प्लिसिंग' (Splicing) है, जिसमें प्राथमिक अनुलेख से इंट्रॉन्स को हटाकर एक्जॉन्स को आपस में जोड़ा जाता है, जिससे एक ही जीन से विभिन्न प्रकार के परिपक्व mRNA बन सकते हैं।
3. आनुवंशिक कूट की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह 'असंदिग्ध' (Unambiguous) और 'विशिष्ट' होता है, अर्थात एक विशेष प्रकूट (Codon) हमेशा एक से अधिक भिन्न अमीनो अम्लों के लिए कोड कर सकता है।
4. आरएनए इंटरफेरेंस (RNAi) एक उत्तर-अनुलेखीय जीन silencing तंत्र है, जो द्विपद आरएनए (dsRNA) के माध्यम से विशिष्ट mRNA को लक्षित कर उसके अनुवाद को रोक देता है और यह लगभग सभी यूकेरियोटिक जीवों में कोशिका रक्षा प्रणाली के रूप में कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पदार्थ के सामान्य गुणों, पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव की स्वतंत्र सतह पर पृष्ठ तनाव (Surface Tension) का कारण अणुओं के मध्य लगने वाला ससंजक बल (Cohesive force) है, और तापमान में वृद्धि होने पर अधिकांश द्रवों का पृष्ठ तनाव घट जाता है।
2. श्यानता (Viscosity) द्रवों का वह गुण है जिसके कारण द्रव अपनी विभिन्न परतों के बीच होने वाली相対 गति का विरोध करते हैं, और गैसों की श्यानता तापमान में वृद्धि के साथ घट जाती है, जबकि द्रवों की श्यानता तापमान बढ़ने पर बढ़ती है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब किसी वस्तु को किसी द्रव में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोया जाता है, तो वह वस्तु अपने द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल (Buoyant force) का अनुभव करती है।
4. यदि किसी वस्तु का औसत घनत्व उस द्रव के घनत्व से कम है जिसमें उसे डुबोया गया है, तो वस्तु द्रव की सतह पर तैरती है और इस स्थिति में वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव का भार वस्तु के कुल भार के बराबर होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के रासायनिक गुणों में आवर्तीय प्रवृत्तियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश में वृद्धि होती है, किंतु उत्कृष्ट गैसों (Noble Gases) के मामले में वानडरवाल्स त्रिज्या को मापने के कारण उनका आकार अपने से ठीक पहले वाले हैलोजन परमाणु की तुलना में अचानक बड़ा हो जाता है।
2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान fluorine (फ्लोरीन) का सबसे अधिक होना चाहिए था, परंतु अपने अत्यंत छोटे आकार के कारण उच्च इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षित बलों के कारण इसका वास्तविक ऋणात्मक मान इसके समूह के अगले तत्व क्लोरीन (Chlorine) से कम होता है।
3. संक्रमण तत्वों (d-ब्लॉक के तत्व) के किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर आयनन एन्थैल्पी के मानों में मुख्य समूह के तत्वों की तरह तीव्र और नियमित वृद्धि नहीं होती है, क्योंकि आंतरिक d-कक्षकों के परिरक्षण प्रभाव (Shielding Effect) और नाभिकीय आवेश की वृद्धि का प्रभाव एक-दूसरे को लगभग संतुलित कर देते हैं।
4. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanoid Contraction) के कारण 5d श्रेणी के संक्रमण तत्वों की परमाणु त्रिज्याएँ अपने से ठीक ऊपर स्थित 4d श्रेणी के तत्वों की तुलना में काफी बड़ी हो जाती हैं, जिसके कारण ज़िरकोनियम और हाफ़िज़ियम के रासायनिक गुण लगभग भिन्न हो जाते हैं।
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क्वांटम यांत्रिकी और परमाणु भौतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. डी ब्रोग्ली की परिकल्पना के अनुसार, प्रत्येक गतिमान द्रव्य कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) एक तरंग से संबद्ध होता है, जिसकी तरंगदैर्ध्य कण के संवेग के व्युत्क्रमानुपाती होती है, और यह अवधारणा द्रव्य की द्वैत प्रकृति (Dual Nature) को स्पष्ट करती है।
2. हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत (Uncertainty Principle) के अनुसार, किसी सूक्ष्म कण की स्थिति और उसके संवेग का एक साथ पूर्णतः यथार्थ निर्धारण करना असंभव है, और इन दोनों राशियों की अनिश्चितताओं का गुणनफल प्लांक नियतांक के आधे से अधिक या उसके बराबर होता है।
3. प्रकाश विद्युत प्रभाव (Photoelectric Effect) की व्याख्या करते समय अल्बर्ट आइंस्टीन ने यह प्रतिपादित किया कि प्रकाश ऊर्जा के विविक्त पैकेटों या क्वांटा के रूप में गमन करता है, जिन्हें 'फोटॉन' कहा जाता है, और यह घटना प्रकाश की तरंग प्रकृति की पुष्टि करती है।
4. हाइड्रोजन परमाणु के बोर मॉडल में, इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगा सकते हैं जिनका कोणीय संवेग $\frac{h}{2\pi}$ का पूर्ण गुणज होता है, और इन कक्षाओं में घूमते समय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का विकिरण नहीं करते हैं।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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