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जीन नियमन और आनुवंशिक कूट के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जैकब और मोनोड द्वारा प्रतिपादित 'लैक ऑपेरॉन' (Lac Operon) मॉडल एक दमनकारी (Repressible) प्रणाली का उदाहरण है, जिसमें लैक्टोज की अनुपस्थिति में दमनकारी प्रोटीन ऑपरेटर जीन से जुड़कर अनुलेखन को रोक देता है।
  2. 2. यूकेरियोट्स में जीन अभिव्यक्ति (Gene Expression) के नियमन का एक प्रमुख स्तर 'स्प्लिसिंग' (Splicing) है, जिसमें प्राथमिक अनुलेख से इंट्रॉन्स को हटाकर एक्जॉन्स को आपस में जोड़ा जाता है, जिससे एक ही जीन से विभिन्न प्रकार के परिपक्व mRNA बन सकते हैं।
  3. 3. आनुवंशिक कूट की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह 'असंदिग्ध' (Unambiguous) और 'विशिष्ट' होता है, अर्थात एक विशेष प्रकूट (Codon) हमेशा एक से अधिक भिन्न अमीनो अम्लों के लिए कोड कर सकता है।
  4. 4. आरएनए इंटरफेरेंस (RNAi) एक उत्तर-अनुलेखीय जीन silencing तंत्र है, जो द्विपद आरएनए (dsRNA) के माध्यम से विशिष्ट mRNA को लक्षित कर उसके अनुवाद को रोक देता है और यह लगभग सभी यूकेरियोटिक जीवों में कोशिका रक्षा प्रणाली के रूप में कार्य करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि 'लैक ऑपेरॉन' एक 'प्रेरणीय' (Inducible) प्रणाली है, न कि दमनकारी, जिसमें लैक्टोज स्वयं 'प्रेरक' के रूप में कार्य करता है। कथन 2 सही है; यूकेरियोट्स में वैकल्पिक स्प्लिसिंग (Alternative Splicing) के माध्यम से एक ही प्राथमिक अनुलेख से विभिन्न प्रोटीन रूपों का निर्माण किया जा सकता है। कथन 3 गलत है क्योंकि आनुवंशिक कूट 'असंदिग्ध' (Unambiguous) होता है, जिसका अर्थ है कि एक प्रकूट केवल एक ही विशिष्ट अमीनो अम्ल के लिए कोड करता है, हालांकि यह 'अपभ्रष्ट' (Degenerate) हो सकता है जहाँ एक से अधिक प्रकूट एक ही अमीनो अम्ल के लिए कोड कर सकते हैं। कथन 4 सही है, आरएनए इंटरफेरेंस (RNAi) एक शक्तिशाली कोशिका रक्षा और जीन नियमन तंत्र है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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