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मानव शरीर में उत्पन्न होने वाले विभिन्न संक्रामक तथा आनुवंशिक रोगों और उनके जैविक कारको के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'सिकेल सेल एनीमिया' (Sickle cell anemia) एक ऑटोसोमल recessive आनुवंशिक विकार है, जो हीमोबीन जीन में बिंदु उत्परिवर्तन (Point mutation) के कारण होता है, जिसमें छठी पोजीशन पर ग्लूटामिक एसिड के स्थान पर वैलीन का प्रतिस्थापन हो जाता है।
- 2. 'रेबीज' (Rabies) एक विषाणु जनित तीव्र संक्रामक रोग है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, और इसके विषाणु लार के माध्यम से संक्रमित कुत्ते या अन्य रेबीज वाहक जंतुओं के काटने से मनुष्य के शरीर में प्रवेश करते हैं।
- 3. 'कुष्ठ रोग' (Leprosy) जिसे हैनसेन रोग भी कहा जाता है, माइकोबैक्टीरियम लेप्री नामक विषाणु के कारण होने वाला एक दीर्घकालिक संक्रमण है जो मुख्य रूप से त्वचा और परिधीय तंत्रिकाओं को प्रभावित करता है।
- 4. 'काला अजार' (Kala-azar) एक प्रोटोजोआ जनित रोग है जो लेशमानिया डोनोवानी परजीवी के कारण होता है, और इसका संचरण 'सैंडफ्लाई' (बालू मक्खी) नामक कीट द्वारा होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि सिकेल सेल एनीमिया एक आनुवंशिक विकार है जिसमें हीमोग्लोबिन की बीटा-ग्लोबिन श्रृंखला में छठे स्थान पर ग्लूटामिक अम्ल (Glutamic acid) की जगह वैलीन (Valine) आ जाता है। कथन 2 सही है, रेबीज (Hydrophobia) एक विषाणु जनित घातक रोग है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि कुष्ठ रोग (Leprosy) किसी विषाणु से नहीं, बल्कि 'माइकोबैक्टीरियम लेप्री' नामक विकिपीडिया संदर्भ (जीवाणु/बैक्टीरिया) के कारण होता है। कथन 4 सही है, काला अजार 'लेशमानिया डोनोवानी' नामक प्रोटोजोआ के कारण होता है और इसका वाहक बालू मक्खी (Sandfly) है।
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जीन नियमन और आनुवंशिक कूट के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1.…
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पदार्थ के सामान्य गुणों, पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव की स्वतंत्र सतह पर पृष्ठ तनाव (Surface Tension) का कारण अणुओं के मध्य लगने वाला ससंजक बल (Cohesive force) है, और तापमान में वृद्धि होने पर अधिकांश द्रवों का पृष्ठ तनाव घट जाता है।
2. श्यानता (Viscosity) द्रवों का वह गुण है जिसके कारण द्रव अपनी विभिन्न परतों के बीच होने वाली相対 गति का विरोध करते हैं, और गैसों की श्यानता तापमान में वृद्धि के साथ घट जाती है, जबकि द्रवों की श्यानता तापमान बढ़ने पर बढ़ती है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब किसी वस्तु को किसी द्रव में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोया जाता है, तो वह वस्तु अपने द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल (Buoyant force) का अनुभव करती है।
4. यदि किसी वस्तु का औसत घनत्व उस द्रव के घनत्व से कम है जिसमें उसे डुबोया गया है, तो वस्तु द्रव की सतह पर तैरती है और इस स्थिति में वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव का भार वस्तु के कुल भार के बराबर होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भौतिक राशियों, उनके मापन और विमीय विश्लेषण (Dimensional Analysis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी भौतिक राशि की विमाएँ (Dimensions) वे घाते होती हैं जो उस राशि को व्यक्त करने के लिए मूल राशियों की घातों पर चढ़ाई जाती हैं, और विमीय समांगता के सिद्धांत (Principle of Homogeneity of Dimensions) के अनुसार किसी भी सही भौतिक समीकरण के दोनों पक्षों के प्रत्येक पद की विमाएँ समान होनी चाहिए।
2. पृष्ठ तनाव (Surface Tension) और बल नियतांक (Spring Constant) दोनों की विमाएँ समान होती हैं, जो कि $[ML^0T^{-2}]$ के बराबर हैं।
3. 'पारसैक' (Parsec) और 'प्रकाश वर्ष' (Light-year) दोनों खगोलीय दूरियों को मापने की इकाइयाँ हैं, जिनमें से 'पारसैक' दूरी मापने की सबसे बड़ी व्यावहारिक इकाई है और एक पारसैक लगभग 3.26 प्रकाश वर्ष के बराबर होता है।
4. प्लांक नियतांक ($h$) और कोणीय संवेग (Angular Momentum) की विमाएँ परस्पर भिन्न होती हैं, क्योंकि प्लांक नियतांक ऊर्जा और आवृत्ति के गुणनफल पर आधारित है जबकि कोणीय संवेग रैखिक संवेग और त्रिज्या का गुणनफल है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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धातुकर्म (Metallurgical Processes) और मिश्रधातुओं (Alloys) के रासायनिक व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सल्फाइड अयस्कों को वायु की अधिकता में उच्च ताप पर गर्म करके ऑक्साइड में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को 'भर्जन' (Roasting) कहा जाता है, जबकि कार्बोनेट अयस्कों को सीमित वायु या वायु की अनुपस्थिति में उसके गलनांक से नीचे गर्म करने की प्रक्रिया को 'निस्तापन' (Calcination) कहते हैं।
2. एल्युमिनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हरोल्ट प्रक्रम (Hall-Héroult Process) में शुद्ध एल्युमिनियम ऑक्साइड ($Al_2O_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूएस्पार ($CaF_2$) के मिश्रण में घोला जाता है, जो मिश्रण के गलनांक को कम करने और उसकी विद्युत चालकता को बढ़ाने का कार्य करते हैं।
3. 'अमलगम' (Amalgam) किसी धातु का पारा (Mercury) के साथ बना मिश्रधातु होता है, जिसमें लोहा और प्लैटिनम जैसी धातुएं पारे के साथ आसानी से अमलगम बनाती हैं, इसलिए लोहे के पात्रों में पारे का भंडारण किया जाता है।
4. 'स्टेनलेस स्टील' (Stainless Steel) लोहे, क्रोमियम और निकेल की एक मिश्रधातु है, जिसमें क्रोमियम की उपस्थिति धातु की सतह पर क्रोमियम ऑक्साइड की एक निष्क्रिय (Passive) परत का निर्माण करती है, जो इसे जंग लगने से बचाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के रासायनिक गुणों में आवर्तीय प्रवृत्तियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश में वृद्धि होती है, किंतु उत्कृष्ट गैसों (Noble Gases) के मामले में वानडरवाल्स त्रिज्या को मापने के कारण उनका आकार अपने से ठीक पहले वाले हैलोजन परमाणु की तुलना में अचानक बड़ा हो जाता है।
2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान fluorine (फ्लोरीन) का सबसे अधिक होना चाहिए था, परंतु अपने अत्यंत छोटे आकार के कारण उच्च इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षित बलों के कारण इसका वास्तविक ऋणात्मक मान इसके समूह के अगले तत्व क्लोरीन (Chlorine) से कम होता है।
3. संक्रमण तत्वों (d-ब्लॉक के तत्व) के किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर आयनन एन्थैल्पी के मानों में मुख्य समूह के तत्वों की तरह तीव्र और नियमित वृद्धि नहीं होती है, क्योंकि आंतरिक d-कक्षकों के परिरक्षण प्रभाव (Shielding Effect) और नाभिकीय आवेश की वृद्धि का प्रभाव एक-दूसरे को लगभग संतुलित कर देते हैं।
4. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanoid Contraction) के कारण 5d श्रेणी के संक्रमण तत्वों की परमाणु त्रिज्याएँ अपने से ठीक ऊपर स्थित 4d श्रेणी के तत्वों की तुलना में काफी बड़ी हो जाती हैं, जिसके कारण ज़िरकोनियम और हाफ़िज़ियम के रासायनिक गुण लगभग भिन्न हो जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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