BaalVikas
Menu
General Science
Asked 13 hours ago · Viewed 0 times

मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके रोगजनकों और संचरण के तरीकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'टिटनेस' (Tetanus) का कारण क्लॉस्टरिडियम टिटानी नामक जीवाणु है, जो एक बीजाणु-उत्पादक (Spore-forming) जीवाणु है और इसके विषाक्त पदार्थ मुख्य रूप से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करके लगातार कंकाल पेशियों में संकुचन (Spasms) उत्पन्न करते हैं।
  2. 2. 'फाइलेरियासिस' (Filariasis) जिसे हाथीपांव भी कहा जाता है, वुचेरेरिया बैनक्रॉफ्टी नामक सूत्रकृमि (Nematode) के कारण होता है, और इसका संचरण मुख्य रूप से संक्रमित 'मान-क्विंक्स' या क्यूलेक्स प्रजाति की मादा मच्छरों के काटने से होता है, जो लसीका वाहिकाओं (Lymphatic vessels) को अवरुद्ध कर देते हैं।
  3. 3. 'रिंगवर्म' (दाद) एक कवक जनित संक्रामक रोग है जो मुख्य रूप से माइक्रोस्पोरम, ट्राइकोफाइटोन और एपिडर्मोफाइटोन कवकों द्वारा होता है, और यह रोग त्वचा की मृत सतह पर पपड़ीदार, खुजली वाले चकत्ते बनाता है जो अत्यधिक गर्मी और नमी में तेजी से पनपते हैं।
  4. 4. 'अमीबायसिस' (अमीबी पेचिश) एक जीवाणु जनित संक्रमण है जो एंटामोएबा हिस्टोलिटिका नामक प्रोकैरियोटिक जीवाणु के कारण होता है, और यह दूषित जल व भोजन के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश कर रक्तयुक्त दस्त (Diarrhea) का कारण बनता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि 'टिटनेस' का रोगजनक क्लॉस्टरिडियम टिटानी (Clostridium tetani) है, जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। कथन 2 सही है क्योंकि फाइलेरियासिस वुचेरेरिया बैनक्रॉफ्टी (Wuchereria bancrofti) नामक सूत्रकृमि द्वारा होता है और क्यूलेक्स मच्छरों से फैलता है। कथन 3 सही है क्योंकि दाद (Ringworm) कवक (Fungi) द्वारा होता है। कथन 4 गलत है क्योंकि एंटामोएबा हिस्टोलिटिका एक प्रोटोजोआ (परजीवी) है, न कि जीवाणु। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Share:
अगला प्रश्न → रासायनिक बंधन (Chemical Bonding) और अम्ल-क्षार सिद्धांत (Acid-Base Theories)… ← पिछला प्रश्न विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथ से संबंधित निम्नलिखित…

Related Questions

→ तरल पदार्थों के भौतिक गुणों जैसे पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी द्रव की सतह पर पृष्ठ तनाव का कारण अणुओं के मध्य लगने वाला ससंजक बल है, और यदि किसी द्रव में घुलनशील अशुद्धियाँ (जैसे डिटर्जेंट) मिलाई जाती हैं, तो द्रव का पृष्ठ तनाव बढ़ जाता है। 2. श्यानता द्रवों का वह आंतरिक गुण है जो उनकी विभिन्न परतों के बीच होने वाली आपेक्षिक गति का विरोध करता है, और तापमान में वृद्धि होने पर द्रवों की श्यानता घट जाती है जबकि गैसों की श्यानता बढ़ जाती है। 3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब किसी वस्तु को किसी द्रव में पूर्ण या आंशिक रूप से डुबोया जाता है, तो वह वस्तु अपने द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल का अनुभव करती है, और यह बल विस्थापित द्रव के गुरुत्व केंद्र पर कार्य करता है। 4. यदि कोई वस्तु किसी ऐसे द्रव में तैर रही है जिसका घनत्व वस्तु के औसत घनत्व से कम है, तो वस्तु का आयतन द्रव के अंदर न्यूनतम होगा और विस्थापित द्रव का भार वस्तु के आंशिक भार से कम होगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → यूकैरियोटिक कोशिका के विभिन्न अंगकों और कोशिका विभाजन (Cell Cycle and Division) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. केंद्रक झिल्ली का बाहरी आवरण अंतःप्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum) के साथ निरंतर जुड़ा होता है, और इसकी बाहरी सतह पर राइबोसोम जुड़े हो सकते हैं जो प्रोटीन संश्लेषण में सहायता करते हैं। 2. सूत्रकणिका (माइटोकॉन्ड्रिया) और हरित लवक (क्लोरोप्लास्ट) दोनों ही अर्ध-स्वायत्त (Semi-autonomous) कोशिका अंगक हैं, क्योंकि इनमें स्वयं का वृत्ताकार डीएनए, आरएनए और 80S प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं। 3. अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की डिप्लोटीन (Diplotene) अवस्था के दौरान, समजात गुणसूत्रों के अलग होने की प्रक्रिया शुरू होती है, लेकिन वे 'क्याज़्माटा' (Chiasmata) नामक बिंदुओं पर एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं, जो कि क्रॉसिंग ओवर के स्थल को दर्शाते हैं। 4. पादप कोशिकाओं में कोशिका विभाजन के दौरान साइटोकाइनेसिस (द्रव्य विभाजन) की प्रक्रिया कोशिका पट्टिका (Cell plate) के निर्माण द्वारा होती है, जिसका निर्माण मुख्य रूप से गॉल्जीकाय के स्रावी पुटिकाओं (Vesicles) द्वारा किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → यांत्रिकी (Mechanics) में गति के नियमों, कार्य, ऊर्जा और संरक्षण सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी संरक्षी बल (Conservative Force) के अंतर्गत गति करते हुए पिंड की कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग) सदैव संरक्षित रहती है, और इस बल द्वारा किया गया कार्य मार्ग की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता बल्कि केवल प्रारंभिक एवं अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है। 2. परिवर्ती बल द्वारा किया गया कार्य बल-विस्थापन वक्र (Force-Displacement Curve) के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रफल के बराबर होता है, और यह कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem) के अनुसार वस्तु की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के पूर्णतः तुल्य होता है। 3. जब कोई वस्तु किसी ऊर्ध्वाधर वृत्त में गति करती है, तो वृत्त के उच्चतम बिंदु पर डोरी या सतह द्वारा लगाया जाने वाला अभिलंब बल (Normal Force) का न्यूनतम मान शून्य हो सकता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि वस्तु बिना मार्ग छोड़े अपना वृत्ताकार मार्ग पूरा कर सके। 4. अप्रत्याशित संघट्ट (Inelastic Collision) के दौरान संवेग संरक्षण का नियम लागू नहीं होता है, क्योंकि इस प्रकार के संघट्ट में निकाय की कुल गतिज ऊर्जा का ह्रास ऊष्मा, ध्वनि या विरूपण के रूप में हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → यूकैरियोटिक कोशिका के विभिन्न अंगकों और कोशिका विभाजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली पर वलयनुमा उभार होते हैं जिन्हें 'क्रिस्टी' (Cristae) कहा जाता है, और इन पर ऑक्सीसोम या $F_0-F_1$ कण स्थित होते हैं जो एटीपी (ATP) के संश्लेषण में मुख्य भूमिका निभाते हैं। 2. गॉल्जीकाय (Golgi apparatus) का निर्माण चपटी थैलियों या सिस्टर्नी से होता है, जिसके दो ध्रुव होते हैं - 'सस' (cis) फेस जो कि निर्माणकारी या उत्तल होता है, और 'ट्रांस' (trans) फेस जो कि परिपक्व या अवतल होता है। 3. अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की पैकीटीन (Pachytene) अवस्था के दौरान समजात गुणसूत्रों के गैर-सह-भगिनी अर्धगुणसूत्रिकाओं के बीच आनुवंशिक खंडों का विनिमय होता है, जिसे 'क्रॉसिंग ओवर' कहा जाता है और यह प्रक्रिया 'रेकॉम्बिनेस' एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है। 4. पादप कोशिकाओं में कोशिका द्रव्य विभाजन (Cytokinesis) जन्तु कोशिकाओं की तरह खांच निर्माण (Cleavage furrow method) द्वारा संपन्न होता है, क्योंकि पादप कोशिकाओं में सेंट्रीओल अनुपस्थित होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है। 2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है। 3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था। 4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.