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रासायनिक बंधन (Chemical Bonding) और अम्ल-क्षार सिद्धांत (Acid-Base Theories) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. आयनिक बंध (Ionic Bond) का निर्माण दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की पूरी तरह से साझेदारी से होता है, और आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में भी विद्युत और ऊष्मा के उत्कृष्ट चालक होते हैं क्योंकि उनके आयन गति करने के लिए स्वतंत्र होते हैं।
  2. 2. ब्रॉन्स्टेड-लॉरी सिद्धांत (Bronsted-Lowry Theory) के अनुसार, अम्ल वे पदार्थ हैं जो प्रोटॉन ($H^+$ दाता) होते हैं, जबकि क्षार वे पदार्थ हैं जो प्रोटॉन ग्रहण करते हैं ($H^+$ ग्राही), और किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार (Conjugate base) हमेशा अत्यंत दुर्बल होता है।
  3. 3. लेविस अम्ल (Lewis Acid) वे रासायनिक प्रजातियाँ होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म (Electron pair) को ग्रहण कर सकती हैं, जबकि लेविस क्षार इलेक्ट्रॉन युग्म दाता होते हैं।
  4. 4. जल का ऑटो-प्रोटोलिसिस (Auto-protolysis) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें जल के दो अणु परस्पर क्रिया करके हाइड्रोनियम आयन ($H_3O^+$) और हाइड्रॉक्साइड आयन ($OH^-$) बनाते हैं, और $298 ext{ K}$ पर इसके आयनिक गुणनफल ($K_w$) का मान सदैव $1.0 imes 10^{-7} ext{ mol}^2 ext{ L}^{-2}$ होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि आयनिक बंध (Ionic Bond) का निर्माण इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण (Transfer) से होता है, न कि उनकी साझेदारी से। इसके अलावा, आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक होते हैं क्योंकि उनके आयन स्थिर होते हैं; वे केवल गलित (Molten) या जलीय विलयन अवस्था में ही विद्युत चालन करते हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि $298 ext{ K}$ तापमान पर शुद्ध जल के आयनिक गुणनफल ($K_w$) का सही मान $1.0 imes 10^{-14} ext{ mol}^2 ext{ L}^{-2}$ होता है, जबकि $1.0 imes 10^{-7}$ वास्तव में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता होती है। कथन 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। ब्रॉन्स्टेड-लॉरी सिद्धांत के तहत अम्ल प्रोटॉन दाता और क्षार प्रोटॉन ग्राही होते हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
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