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विद्युत परिपथों और उससे जुड़े नेटवर्क प्रमेयों (Network Theorems) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ह्वीटस्टोन सेतु (Wheatstone Bridge) का उपयोग किसी अज्ञात प्रतिरोध को अत्यधिक सटीकता से मापने के लिए किया जाता है, और जब सेतु संतुलित (Balanced) होता है, तो गैल्वेनोमीटर से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है तथा $P/Q = R/S$ संबंध संतुष्ट होता है।
  2. 2. थेवेनिन प्रमेय (Thvenin's Theorem) के अनुसार, किसी रैखिक द्विपक्षीय सक्रिय नेटवर्क को एक तुल्य वोल्टेज स्रोत (Voc) और उसके श्रेणी क्रम में जुड़े एक तुल्य आंतरिक प्रतिरोध ($R_{th}$) द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सकता है।
  3. 3. अधिकतम शक्ति स्थानांतरण प्रमेय (Maximum Power Transfer Theorem) के अनुसार, किसी लोड प्रतिरोधक ($R_L$) को स्रोत से अधिकतम विद्युत शक्ति तब प्राप्त होती है जब लोड प्रतिरोध का मान स्रोत के आंतरिक प्रतिरोध ($R_{th}$) से दोगुना होता है।
  4. 4. अतिचालकता (Superconductivity) की स्थिति में कुछ पदार्थों की प्रतिरोधकता का मान शून्य हो जाता है, और क्रांतिक तापमान ($T_c$) से नीचे आने पर वे पूर्ण रूप से प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic) व्यवहार प्रदर्शित करते हुए चुंबकीय क्षेत्र को बाहर धकेल देते हैं, जिसे 'मीस्नर प्रभाव' कहा जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि ह्वीटस्टोन सेतु का उपयोग अज्ञात प्रतिरोध मापने के लिए किया जाता है और संतुलन की स्थिति में कोई धारा गैल्वेनोमीटर से नहीं बहती। कथन 2 सही है, थेवेनिन प्रमेय के अनुसार किसी जटिल रैखिक नेटवर्क को एक तुल्य वोल्टेज स्रोत और श्रेणी प्रतिरोध से प्रतिस्थापित किया जा सकता है। कथन 3 गलत है, क्योंकि अधिकतम शक्ति स्थानांतरण प्रमेय के अनुसार लोड प्रतिरोध ($R_L$) का मान स्रोत के आंतरिक प्रतिरोध ($R_{th}$) के **बराबर** होना चाहिए, दोगुना नहीं। कथन 4 सही है, अतिचालकता के दौरान मीस्नर प्रभाव के कारण पदार्थ पूर्ण प्रतिचुंबकीय हो जाते हैं और उनकी प्रतिरोधकता शून्य हो जाती है।
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