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यांत्रिकी में कार्य, ऊर्जा और गति के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जब कोई बल किसी वस्तु पर कार्यरत होता है और बल की दिशा तथा विस्थापन की दिशा के बीच का कोण 90° से अधिक होता है, तो बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होता है, जैसा कि किसी वस्तु को ऊपर उठाने के दौरान गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा किया गया कार्य।
  2. 2. गतिज ऊर्जा और संवेग के बीच के संबंध के अनुसार, यदि किसी वस्तु का रेखीय संवेग तीन गुना कर दिया जाए, तो उसकी गतिज ऊर्जा नौ गुना बढ़ जाती है, बशर्ते वस्तु का द्रव्यमान स्थिर रहे।
  3. 3. संरक्षी बलों (Conservative Forces) द्वारा किसी बंद लूप में किया गया कुल कार्य हमेशा शून्य होता है, और ऐसे बलों के अंतर्गत ही यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा) का संरक्षण नियम लागू होता है।
  4. 4. शक्ति (Power) वह दर है जिस पर कार्य किया जाता है या ऊर्जा स्थानांतरित होती है, और यदि किसी इंजन द्वारा किया गया कार्य समय के साथ नियत है, तो उसकी तात्क्षणिक शक्ति का मान औसत शक्ति से हमेशा अधिक होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: जब विस्थापन बल की दिशा के विपरीत होता है (जैसे किसी वस्तु को ऊपर उठाते समय गुरुत्वाकर्षण बल नीचे की ओर कार्य करता है और विस्थापन ऊपर की ओर होता है), तो उनके बीच का कोण 180° होता है, जिससे किया गया कार्य ऋणात्मक होता है। कथन 2 सही है: गतिज ऊर्जा ($E$) और संवेग ($p$) का संबंध $E = \frac{p^2}{2m}$ होता है। यदि संवेग $p$ को तीन गुना ($3p$) कर दिया जाए, तो नई गतिज ऊर्जा $E' = \frac{(3p)^2}{2m} = 9 \left(\frac{p^2}{2m}\right) = 9E$ हो जाएगी, अर्थात् ऊर्जा नौ गुना बढ़ जाती है। कथन 3 सही है: संरक्षी बल (जैसे गुरुत्वाकर्षण बल या स्थिर वैद्युत बल) के अंतर्गत किया गया कार्य पथ पर निर्भर नहीं करता, और किसी बंद पथ या लूप में किया गया कुल कार्य सदैव शून्य होता है, जिसके कारण विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार यांत्रिक ऊर्जा संरक्षित रहती है। कथन 4 गलत है: यदि किसी इंजन द्वारा किया गया कार्य समय के साथ एकसमान (नियत) दर से हो रहा है, तो उसकी तात्क्षणिक शक्ति और औसत शक्ति का मान समान होता है, न कि तात्क्षणिक शक्ति अधिक होती है। अत: केवल कथन 1, 2 और 3 सही हैं।
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