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पदार्थ की अवस्थाओं, प्लाज़्मा और बोस-आइंस्टीन संघनन (BEC) तथा परमाणु संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. प्लाज़्मा पदार्थ की वह अवस्था है जिसमें गैस अत्यधिक आयनीकृत होती है और इसमें स्वतंत्र रूप से गति करते हुए धनावेशित आयन तथा इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिसके कारण यह विद्युत का सुचालक होता है और इस पर चुंबकीय क्षेत्र का प्रभाव पड़ता है।
  2. 2. बोस-आइंस्टीन संघनन (BEC) का निर्माण अत्यंत उच्च घनत्व वाली गैस को परम शून्य ताप ($0 \text{ K}$) के अत्यंत निकट तक ठंडा करके किया जाता है, जहाँ सभी कण एक ही क्वांटम अवस्था में संगमित हो जाते हैं।
  3. 3. रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग में अधिकांश अल्फा कण सोने की पन्नी को बिना किसी विक्षेपण के पार कर गए, जिससे यह सिद्ध हुआ कि परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त होता है तथा उसका संपूर्ण धनावेश और द्रव्यमान उसके केंद्रीय भाग (नाभिक) में केंद्रित होता है।
  4. 4. बोहर के परमाणु मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर किन्हीं भी वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगा सकते हैं, और जब तक वे इन कक्षाओं में रहते हैं, उनकी ऊर्जा का विकिरण या ह्रास होता रहता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि प्लाज़्मा उच्च तापमान पर गैसों के आयनीकरण से बनती है, जिसमें मुक्त इलेक्ट्रॉन और आयन होते हैं, जिससे यह विद्युत का सुचालक बन जाती है। कथन 2 सही है; बोस-आइंस्टीन संघनन (BEC) का निर्माण अत्यंत विरल गैस को परम शून्य के निकट ठंडा करने पर होता है जहाँ क्वांटम प्रभाव macroscopic स्तर पर दिखाई देते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि रदरफोर्ड के प्रकीर्णन प्रयोग ने परमाणु के नाभिकीय मॉडल और उसके अधिकांश भाग के रिक्त होने की पुष्टि की थी। कथन 4 गलत है क्योंकि नील्स बोहर के परमाणु मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं निश्चित वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगा सकते हैं जिनका कोणीय संवेग $h/2\pi$ का पूर्ण गुणक होता है, और इन स्थिर कक्षाओं (stationary orbits) में चक्कर लगाते समय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का विकिरण नहीं करते हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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