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कार्बनिक रसायन में एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (Arenes) और उनकी रासायनिक अभिक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बेंजीन एक समतलीय (Planar) अणु है जिसमें सभी कार्बन परमाणु $sp^2$ संकरित होते हैं, और इसके सभी छः कार्बन-कार्बन बंधों की लंबाई एकल बंध ($1.54 \mathring{A}$) तथा द्वि बंध ($1.34 \mathring{A}$) के बीच की मध्यवर्ती होती है, जिसका कारण डेलोराइजेशन ($delocalisation$) या अनुनाद (Resonance) है।
  2. 2. हकल के नियम ($4n + 2$ नियम) के अनुसार, किसी चक्रीय, समतलीय और पूर्णतः संयुग्मित (Fully conjugated) बहुसंयोजकता वाले पॉलीएकीन को एरोमैटिक होने के लिए उसके वलय में $\pi$ इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या $(4n + 2)$ के बराबर होनी चाहिए, जहाँ $n$ एक पूर्णांक ($n = 0, 1, 2, 3\dots$) है।
  3. 3. बेंजीन वलय पर होने वाली इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में, जब कोई सक्रियकारी समूह (जैसे $-OH$ या $-NH_2$) जुड़ा होता है, तो वह आने वाले समूह को मुख्य रूप से मेटा (meta) स्थिति पर निर्देशित करता है।
  4. 4. फ्रिडल-क्राफ्ट्स एल्किलेशन अभिक्रिया (Friedel-Crafts alkylation) के दौरान निर्जल ऐलुमिनियम क्लोराइड ($AlCl_3$) एक लुईस अम्ल के रूप में कार्य करता है जो बेंजीन वलय पर आक्रमण करने के लिए कार्बोकैटायन (Electrophile) का निर्माण करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि बेंजीन एक समतलीय चक्रीय अणु है जिसमें प्रत्येक कार्बन $sp^2$ संकरित होता है। इसके कार्बन-कार्बन बंधों की लंबाई $1.39 \mathring{A}$ होती है जो एकल और द्वि बंध के बीच की होती है। कथन 2 सही है; हकल का नियम ($4n + 2$ नियम) किसी यौगिक की एरोमैटिकता को निर्धारित करता है जिसमें कुल $(4n + 2)$ पाई इलेक्ट्रॉन होने चाहिए। कथन 3 गलत है क्योंकि बेंजीन वलय पर उपस्थित सक्रियकारी समूह (जैसे $-OH, -NH_2$) आने वाले नए समूह को मुख्य रूप से ऑर्थो (ortho) और पैरा (para) स्थिति पर निर्देशित करते हैं, न कि मेटा स्थिति पर। कथन 4 सही है क्योंकि फ्रिडल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया में $AlCl_3$ एक लुईस अम्ल के रूप में कार्य करके इलेक्ट्रोफाइल (कार्बोनियम आयन) उत्पन्न करता है। विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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