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सुकेन्द्रकी (Eukaryotic) कोशिकाओं के भीतर विभिन्न कोशिकांगों (Organelles) की संरचना, उनके उपापचय कार्य तथा कोशिका विभाजन के आणविक घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. परऑक्सिसोम (Peroxisome) ऐसे एकल झिल्ली से घिरे कोशिकांग हैं जो पादपों के 'ग्लायऑक्सीसोम' के रूप में वसा अम्लों के बीटा-ऑक्सीकरण के साथ-साथ हाइड्रोजन पेरोक्साइड के विषैले चयापचय को नियंत्रित करने वाले 'कैटालेज' एंजाइम से समृद्ध होते हैं।
- 2. लाइसोसोम में पाए जाने वाले हाइड्रोलाइटिक एंजाइम केवल क्षारीय माध्यम ($pH > 8.0$) में सक्रिय होते हैं, और इनके फटने पर पूरी कोशिका का पाचन हो जाता है, जिसके कारण इन्हें कोशिका की 'आत्मघाती थैलियाँ' कहा जाता है।
- 3. अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की डिप्लोटीन (Diplotene) अवस्था में समजात गुणसूत्रों के अलग होने की प्रक्रिया शुरू होती है, लेकिन वे 'क्यास्माटा' (Chiasmata) नामक बिंदुओं पर जुड़े रहते हैं, जो कि विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार क्रॉसिंग ओवर के पूर्ण होने का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
- 4. राइबोसोम के बड़े उप-इकाई (Subunit) में स्थित 'पेप्टidyl ट्रांसफ़रेज़' गतिविधि किसी प्रोटीन या एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित न होकर आरएनए घटकों (28S rRNA) द्वारा संचालित होती है, जो इसे एक प्राकृतिक 'राइबोज़ाइम' (Ribozyme) बनाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि परऑक्सिसोम एकल झिल्ली वाले कोशिकांग हैं जिनमें कैटालेज और ऑक्सीडेज एंजाइम होते हैं जो हाइड्रोजन पेरोक्साइड चयापचय में मदद करते हैं। पादपों में इनका विशिष्ट रूप ग्लायऑक्सीसोम वसा को कार्बोहाइड्रेट में बदलता है। कथन 2 गलत है क्योंकि लाइसोसोम के हाइड्रोलाइटिक एंजाइम केवल अम्लीय परिस्थितियों ($pH \approx 4.5 - 5.0$) में अत्यधिक सक्रिय होते हैं, न कि क्षारीय माध्यम में। कथन 3 सही है क्योंकि डिप्लोटीन अवस्था में क्यास्माटा का दिखना क्रॉसिंग ओवर के पूरा होने का संकेत है जहाँ समजात गुणसूत्र अलग होना शुरू होते हैं। कथन 4 सही है क्योंकि 28S rRNA (या बड़े सबunit का आरएनए अंश) पेप्टाइड बंध के निर्माण को उत्प्रेरित करता है, जो राइबोसोम को एक राइबोज़ाइम के रूप में स्थापित करता है।
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मानव शरीर के विभिन्न तन्त्रों (पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र) की कार्यप्रणाली के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आमाशय की भित्ति में पाई जाने वाली ऑक्सिंटिक (पेरिएटल) कोशिकाएँ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ-साथ 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) स्रावित करती हैं, जो क्षुद्रांत (Ileum) में विटामिन B12 के अवशोषण के लिए अनिवार्य है।
2. मानव श्वसन तंत्र में, कूपिकाओं (Alveoli) की सतह पर टाइप-II कोशिकाओं द्वारा 'सर्फेक्टेंट' नामक फॉस्फोलिपिड स्रावित किया जाता है, जो पृष्ठ तनाव (Surface tension) को कम करके कूपिकाओं को पिचकने (Collapse) से बचाता है।
3. हृदय चक्र के दौरान, आलिंद-निलय (AV) वॉल्व (ट्रिकस्पिड और बिकस्पिड वॉल्व) का बंद होना 'डब' (Dubb) ध्वनि उत्पन्न करता है, जबकि सेमिलुनेर वॉल्व का बंद होना 'लब' (Lub) ध्वनि उत्पन्न करता है।
4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में तंत्रिका आवेगों के तीव्र और उछलते हुए (saltatory) संचरण के लिए माइलिन म्यान का निर्माण ओलिगोडेंड्रोसाइट्स (Oligodendrocytes) द्वारा किया जाता है, जबकि परिधीय तंत्रिका तंत्र में यह कार्य श्वान कोशिकाओं (Schwann cells) द्वारा होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों (Periodic Properties) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या (Atomic Radius) में निरंतर कमी आती है, जिसका मुख्य कारण प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{eff}$) का क्रमिक रूप से बढ़ना है, यद्यपि उत्कृष्ट गैसों (Noble Gases) के मामले में वांडर वॉल त्रिज्या का मान अधिक होने से यह प्रवृत्ति अपवादस्वरूप बदल जाती है।
2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, और आवर्त सारणी में क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान अधिकतम होता है, जो फ्लोरीन से भी अधिक ऋणात्मक होता है।
3. आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) का मान उत्तरोत्तर बढ़ता जाता है, और किसी दिए गए परमाणु के लिए द्वितीय आयनन एन्थैल्पी का मान हमेशा प्रथम आयनन एन्थैल्पी से अधिक होता है क्योंकि धनायन से इलेक्ट्रॉन निकालना अधिक कठिन होता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, डी-ब्लॉक (d-block) के तत्वों को संक्रमण तत्व कहा जाता है क्योंकि उनके आंशिक रूप से भरे हुए d-कक्षक होते हैं, और समूह 12 के तत्व (जैसे Zn, Cd, Hg) पूर्णतः भरे d-कक्षक होने के कारण संक्रमण तत्व नहीं माने जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विद्युत चुंबकीय प्रेरण और चुम्बकत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय-दर के सीधे समानुपाती होता है।
2. लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम का प्रतिकूल परिणाम है, जिसके अनुसार प्रेरित धारा की दिशा सदैव उस कारण का समर्थन करती है जो इसे उत्पन्न करता है।
3. स्वप्रेरण (Self-induction) किसी कुंडली का वह गुण है जिसके कारण वह अपने से गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स के मान में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है, और इसका एसआई मात्रक वेबर प्रति ऐम्पियर या हेनरी होता है।
4. भंवर धाराएँ (Eddy Currents) धातु के बड़े टुकड़ों में परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र के कारण उत्पन्न होने वाली प्रेरित आभासी धाराएँ हैं, जिनका उपयोग विद्युत ब्रेक (Magnetic braking) और प्रेरण भट्टी (Induction furnace) जैसी प्रणालियों में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) की आनुवंशिक एवं कार्यात्मक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ABO रक्त समूह प्रणाली कार्ल लैंडस्टीनर द्वारा खोजी गई थी, जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की सतह पर उपस्थित विशिष्ट प्रतिजन (Antigens 'A' और 'B') प्रोटीन प्रकृति के होते हैं, जबकि रक्त प्लाज्मा में पाए जाने वाले प्राकृतिक प्रतिरक्षी (Antibodies) 'anti-A' और 'anti-B' वास्तव में इम्युनोग्लोबुलिन (IgM प्रकार के) होते हैं।
2. 'बॉम्बे रक्त समूह' ($O_h$ फेनोटाइप) से ग्रस्त व्यक्तियों में 'H-प्रतिजन' का अभाव होता है क्योंकि उनमें FUT1 जीन का उत्परिवर्तन होता है, जिसके कारण वे किसी भी मानक ABO समूह (A, B, AB, O) के व्यक्ति को रक्त दान कर सकते हैं लेकिन केवल बॉम्बे रक्त समूह से ही रक्त प्राप्त कर सकते हैं।
3. Rh कारक (Rh Factor) की वंशागति के दौरान 'एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस' (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब Rh-धनात्मक पिता और Rh-ऋणात्मक माता की प्रथम संतान Rh-धनात्मक होती है, जिससे प्रथम गर्भावस्था के दौरान ही माता के शरीर में पर्याप्त Rh-प्रतिरक्षी विकसित हो जाते हैं जो पहली संतान को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
4. रक्त स्कंदन (Blood Coagulation) की कैस्केड प्रक्रिया में 'प्रोथ्रॉम्बिन' को सक्रिय थ्रॉम्बिन में बदलने के लिए थ्रॉम्बोप्लास्टिन और कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और यह संपूर्ण प्रक्रिया विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार आंतरिक और बाह्य दोनों मार्गों द्वारा संचालित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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