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आनुवंशिकी और जैव विकास (Genetics and Evolution) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हार्डी-वीनबर्ग संतुलन (Hardy-Weinberg Equilibrium) के अनुसार, एक बड़े यादृच्छिक रूप से संगमित होने वाली आबादी में एलील आवृत्तियाँ पीढ़ियों दर पीढ़ियाँ स्थिर रहती हैं, बशर्ते आबादी में उत्परिवर्तन, प्राकृतिक चयन, जीन प्रवाह, आनुवंशिक अपवाह (Genetic drift) और गैर-यादृच्छिक संगमन अनुपस्थित हों।
- 2. मेण्डल के स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम (Law of Independent Assortment) का सार्वभौमिक रूप से पालन सभी द्विगुणित जीवों पर होता है, चाहे दो अलग-अलग लक्षणों को नियंत्रित करने वाले जीन एक ही गुणसूत्र पर अत्यधिक पास-पास (Linked genes) क्यों न स्थित हों।
- 3. लामार्कवाद के विपरीत, डार्विनवाद (Natural Selection) इस बात पर जोर देता है कि जीव अपने जीवनकाल में जिन उपार्जित लक्षणों (Acquired characters) को प्राप्त करते हैं, वे अगली पीढ़ी में सीधे वंशागत होते हैं।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, समजात अंग (Homologous organs) वे अंग होते हैं जिनकी उत्पत्ति और मूल संरचना समान होती है लेकिन उनके कार्य भिन्न हो सकते हैं, जो अपसारी विकास (Divergent evolution) का प्रमाण देते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: हार्डी-वीनबर्ग सिद्धांत के अनुसार, आदर्श परिस्थितियों में किसी जीन पूल में एलील और जीनोटाइप आवृत्तियाँ स्थिर रहती हैं और उत्परिवर्तन, चयन, प्रवास तथा अनुवांशिक अपवाह जैसी प्रक्रियाएँ इस संतुलन को बाधित करती हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि मेण्डल का स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम लिंक्ड जीनों (सहलगग्न जीनों) पर लागू नहीं होता है, यदि जीन एक ही गुणसूत्र पर बहुत पास हों तो वे साथ वंशागत होने की प्रवृत्ति रखते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि उपार्जित लक्षणों की वंशागति लामार्कवाद (Lamarckism) का सिद्धांत है, न कि डार्विनवाद का (डार्विन प्राकृतिक चयन और वंशागत विविधताओं पर आधारित था)। कथन 4 सही है: विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, समजात अंगों की संरचना समान होती है (समान उत्पत्ति) जो अपसारी विकास को दर्शाती है।
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मानव अंतःस्रावी तंत्र और विभिन्न हॉर्मोनों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एड्रिनल ग्रंथि का वल्कुट (Adrenal Cortex) भाग रेनिन-एंजियोटेंसिन-एल्डोस्टेरोन तंत्र के नियंत्रण में मुख्य रूप से 'एल्डोस्टेरोन' मिनरलोकोर्टिकोइड हॉर्मोन का स्रावण करता है, जो वृक्क नलिकाओं में सोडियम आयनों और जल के पुनравशोषण तथा पोटेशियम एवं फॉस्फेट आयनों के उत्सर्जन को प्रेरित करता है।
2. अग्र पीयूष ग्रंथि (Adenohypophysis) द्वारा स्रावित प्रोलैक्टिन हॉर्मोन का मुख्य कार्य दुग्ध के संश्लेषण को प्रेरित करना है, जबकि दुग्ध का निष्कासन (Milk Ejection) पश्च पीयूष ग्रंथि से स्रावित 'ऑक्सीटोसिन' हॉर्मोन द्वारा संकुचन के माध्यम से नियंत्रित होता है।
3. अग्नाशय के लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) में पाई जाने वाली अल्फा कोशिकाएँ 'इंसुलिन' का स्रावण करती हैं जो ग्लाइकोजेनोलिसिस को बढ़ावा देता है, जबकि बीटा कोशिकाएँ 'ग्लूकागॉन' का स्रावण करती हैं जो रुधिर में शर्करा के स्तर को कम करता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, थायराइड ग्रंथि से स्रावित कैल्सीटोनिन हॉर्मोन रक्त में कैल्शियम के स्तर को कम करने का कार्य करता है, जबकि पैराथायराइड हॉर्मोन (PTH) अस्थि-अवशोषण (Bone resorption) को प्रेरित करके रक्त में कैल्सियम आयनों के स्तर को बढ़ाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर के पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आमाशय की भित्ति में पाई जाने वाली मुख्य (पेप्टिक या जाइमोजेन) कोशिकाएँ निष्क्रिय 'पेप्सिनोजेन' का स्रावण करती हैं, जो हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के संपर्क में आने पर सक्रिय पेप्सिन में बदल जाता है, जबकि ऑक्जिन्टिक कोशिकाएँ 'कैसल का आंतरिक कारक' स्रावित करती हैं जो क्षुद्रांत में विटामिन B12 के अवशोषण के लिए आवश्यक है।
2. मानव श्वसन तंत्र में, कूपिकाओं (Alveoli) की आंतरिक सतह पर टाइप-II कोशिकाओं द्वारा स्रावित 'पल्मोनरी सर्फेक्टेंट' मुख्य रूप से लेसिथिन जैसे फॉस्फोलिपिड्स का बना होता है, जो पृष्ठ तनाव (Surface tension) को कम करके कूपिकाओं को श्वसन के अंतःश्वसन चरण के दौरान पिचकने (Collapse) से बचाता है।
3. हृदय चक्र (Cardiac Cycle) के दौरान, निलयों के संकुचन के आरंभ में आलिंद-निलय (AV) वॉल्व (ट्रिकस्पिड और बिकस्पिड वॉल्व) का बंद होना 'लब' (Lub) ध्वनि उत्पन्न करता है, जबकि निलयों के शिथिलन के आरंभ में सेमिलुनेर वॉल्व का बंद होना 'डब' (Dub) ध्वनि उत्पन्न करता है।
4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में माइलिन म्यान (Myelin sheath) का निर्माण करने वाली कोशिकाएँ श्वान कोशिकाएँ (Schwann cells) होती हैं, जबकि परिधीय तंत्रिका तंत्र में यह कार्य ओलिगोडेंड्रोसाइट्स (Oligodendrocytes) द्वारा किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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चुम्बकत्व और विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय-दर के सीधे समानुपाती होता है।
2. लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम के प्रतिकूल (विरुद्ध) है, जिसके अनुसार प्रेरित धारा की दिशा सदैव उस कारण का विरोध करती है जो इसे उत्पन्न करता है।
3. स्वप्रेरण (Self-induction) किसी कुंडली का वह गुण है जिसके कारण वह अपने से गुजरने वाले विद्युत धारा के मान में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है, और इसका एसआई मात्रक हेनरी (Henry) होता है।
4. भंवर धाराएँ (Eddy Currents) धातु के बड़े टुकड़ों में परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र के कारण उत्पन्न होने वाली प्रेरित आभासी धाराएँ हैं, जिनका उपयोग विद्युत ब्रेक (Magnetic braking) और प्रेरण भट्टी (Induction furnace) जैसी प्रणालियों में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव पोषण और जैविक अणुओं (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन एवं विटामिन) की जैव-रासायनिक संरचना तथा कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एमाइलोज़ (Amylose) स्टार्च का जल-विलेय घटक है जो एक रेखीय पॉलिशैकराइड है, जिसमें ग्लूकोज की इकाइयाँ केवल $\alpha-1,4$ ग्लायकोसाइडिक बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं, जबकि एमाइलोपेक्टिन (Amylopectin) जल-अविलेय घटक है जिसमें मुख्य श्रृंखला $\alpha-1,4$ बंधों तथा शाखाएँ $\alpha-1,6$ बंधों द्वारा बनती हैं।
2. आवश्यक अमीनो अम्ल (Essential Amino Acids) वे होते हैं जिनका संश्लेषण मानव शरीर की कोशिकाओं में पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पाता है, इसलिए उन्हें आहार के माध्यम से लेना अनिवार्य होता है; उदाहरण के लिए, वैलीन, ल्यूसीन और फेनिलएलानिन।
3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, विटामिन K (फाइलोक्विनोन) वसा में घुलनशील विटामिन है जो यकृत में प्रोथ्रॉम्बिन के संश्लेषण के लिए अनिवार्य है और इसकी कमी से रक्त का थक्का जमने में विलंब होता है।
4. विटामिन C (एस्कॉर्बिक अम्ल) एक जल-विलेय विटामिन है जिसे मानव शरीर यकृत में संग्रहित कर सकता है और इसकी अत्यधिक कमी से 'बेरी-बेरी' नामक रोग उत्पन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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