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विद्युत धारा, प्रतिरोधकता और सर्किट के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी चालक पदार्थ की विशिष्ट प्रतिरोधकता (Resistivity) का मान न केवल उसकी लंबाई और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर निर्भर करता है, बल्कि यह उस चालक के तापमान और उसके आंतरिक इलेक्ट्रॉनिक घनत्व पर भी पूरी तरह निर्भर होती है।
- 2. जब विभिन्न प्रतिरोधों वाले प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम (Series Combination) में जोड़ा जाता है, तो प्रत्येक प्रतिरोधक से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा का मान भिन्न होता है, जबकि उनके सिरों पर उत्पन्न विभवांतर का कुल योग कुल विभव के बराबर होता है।
- 3. अतिचालकता (Superconductivity) की स्थिति में किसी सामग्री का वैद्युत प्रतिरोध शून्य हो जाता है और उसकी चुंबकीय पारगम्यता इस प्रकार बदल जाती है कि वह पूर्ण प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic) व्यवहार प्रदर्शित करती है, जिसे 'मिसनर प्रभाव' (Meissner effect) कहा जाता है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, मिश्रधातुओं (जैसे मैंगनीन या कॉन्स्टेंटन) की प्रतिरोधकता का तापमान गुणांक बहुत कम होता है, जिसके कारण इनका उपयोग मानक प्रतिरोध कुंडलियाँ बनाने में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि विशिष्ट प्रतिरोधकता ($rho$) सामग्री की प्रकृति, तापमान और इलेक्ट्रॉनिक संरचना पर निर्भर करती है, यह चालक की लंबाई या क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करती (चूँकि यह प्रति इकाई आयाम का गुण है)। कथन 2 गलत है क्योंकि श्रेणीक्रम (Series) संयोजन में सभी प्रतिरोधकों से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा का मान समान होता है, न कि भिन्न (विभवांतर भिन्न होता है)। कथन 3 सही है; अतिचालक अवस्था में पदार्थ का प्रतिरोध शून्य होता है और मिसनर प्रभाव के तहत यह चुंबकीय क्षेत्र को बाहर धकेलता है (पूर्ण प्रतिचुंबकीय)। कथन 4 सही है, विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार मैंगनीन और कॉन्स्टेंटन जैसी मिश्रधातुओं का तापमान गुणांक नगण्य होने के कारण प्रतिरोध मानक उपकरण बनाने में अत्यधिक उपयोगी है। अत: सही विकल्प (a) है।
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नाभिकीय भौतिकी और रेडियोधर्मिता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी रेडियोएक्टिव नाभिक के क्षय की दर (Rate of decay) उस समय उपस्थित अप्रतिलक्षित नाभिकों की कुल संख्या के सीधे समानुपाती होती है, और इसका अर्द्ध-आयु काल (Half-life) उस नाभिक के प्रारंभिक द्रव्यमान और तापमान पर निर्भर करता है।
2. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) के दौरान उत्पन्न 'नियंत्रक छड़ें' (Control rods) जैसे कैडमियम या बोरॉन का उपयोग श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए न्यूट्रॉनों को अवशोषित करने हेतु किया जाता है, जबकि मंदक (Moderator) के रूप में भारी पानी न्यूट्रॉनों की गति को तेज करता है।
3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, तारों (जैसे सूर्य) में ऊर्जा का मुख्य स्रोत नाभिकीय संलयन है, जिसमें अत्यधिक उच्च ताप और दाब पर हल्के हाइड्रोजन नाभिक मिलकर हीलियम नाभिक का निर्माण करते हैं और इस प्रक्रिया में द्रव्यमान क्षति (Mass defect) ऊर्जा में परिवर्तित होती है।
4. बीटा-क्षय ($eta^-$ decay) के दौरान नाभिक के भीतर एक न्यूट्रॉन प्रोटॉन में परिवर्तित होता है, जिससे परमाणु क्रमांक में एक की वृद्धि होती है और द्रव्यमान संख्या अपरिवर्तित रहती है, तथा इस प्रक्रिया में एक एंटीन्यूट्रिनो का उत्सर्जन होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आनुवंशिकी और जैव विकास (Genetics and Evolution) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेण्डल के स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम (Law of Independent Assortment) का द्विगुणित जीवों पर सार्वभौमिक रूप से पालन होता है, चाहे दो अलग-अलग लक्षणों को नियंत्रित करने वाले जीन एक ही गुणसूत्र पर अत्यधिक पास-पास (Linked genes) क्यों न स्थित हों।
2. हार्डी-वीनबर्ग संतुलन (Hardy-Weinberg Equilibrium) के अनुसार, एक बड़े यादृच्छिक रूप से संगमित होने वाली आबादी में एलील आवृत्तियाँ पीढ़ियों दर पीढ़ियाँ स्थिर रहती हैं, बशर्ते आबादी में उत्परिवर्तन, प्राकृतिक चयन, जीन प्रवाह, आनुवंशिक अपवाह (Genetic drift) और गैर-यादृच्छिक संगमन पूरी तरह अनुपस्थित हों।
3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, समजात अंग (Homologous organs) वे अंग होते हैं जिनकी उत्पत्ति और मूल संरचना समान होती है लेकिन उनके कार्य भिन्न हो सकते हैं, जो अपसारी विकास (Divergent evolution) का स्पष्ट प्रमाण देते हैं।
4. अनुकूलनीय विकिरण (Adaptive radiation) का सबसे बेहतरीन उदाहरण डार्विन के फिंच पक्षी हैं, जिन्होंने गैलापागोस द्वीप समूह पर विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग खाद्य आदतों के आधार पर अपने चोंच के स्वरूप में विविधता विकसित की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव अंतःस्रावी तंत्र और विभिन्न हॉर्मोनों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एड्रिनल ग्रंथि का वल्कुट (Adrenal Cortex) भाग रेनिन-एंजियोटेंसिन-एल्डोस्टेरोन तंत्र के नियंत्रण में मुख्य रूप से 'एल्डोस्टेरोन' मिनरलोकोर्टिकोइड हॉर्मोन का स्रावण करता है, जो वृक्क नलिकाओं में सोडियम आयनों और जल के पुनравशोषण तथा पोटेशियम एवं फॉस्फेट आयनों के उत्सर्जन को प्रेरित करता है।
2. अग्र पीयूष ग्रंथि (Adenohypophysis) द्वारा स्रावित प्रोलैक्टिन हॉर्मोन का मुख्य कार्य दुग्ध के संश्लेषण को प्रेरित करना है, जबकि दुग्ध का निष्कासन (Milk Ejection) पश्च पीयूष ग्रंथि से स्रावित 'ऑक्सीटोसिन' हॉर्मोन द्वारा संकुचन के माध्यम से नियंत्रित होता है।
3. अग्नाशय के लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) में पाई जाने वाली अल्फा कोशिकाएँ 'इंसुलिन' का स्रावण करती हैं जो ग्लाइकोजेनोलिसिस को बढ़ावा देता है, जबकि बीटा कोशिकाएँ 'ग्लूकागॉन' का स्रावण करती हैं जो रुधिर में शर्करा के स्तर को कम करता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, थायराइड ग्रंथि से स्रावित कैल्सीटोनिन हॉर्मोन रक्त में कैल्शियम के स्तर को कम करने का कार्य करता है, जबकि पैराथायराइड हॉर्मोन (PTH) अस्थि-अवशोषण (Bone resorption) को प्रेरित करके रक्त में कैल्सियम आयनों के स्तर को बढ़ाता है।
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों (Metals, Non-metals and their Compounds) के रासायनिक गुणों और निष्कर्षण प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. थर्माइट वेल्डिंग (Thermite Welding) की प्रक्रिया में एल्युमिनियम का उपयोग एक अपचायक (Reducing agent) के रूप में किया जाता है, जो आयरन (III) ऑक्साइड ($Fe_2O_3$) को गलित अवस्था में आयरन धातु में अपचयित कर देता है, और यह अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) होती है।
2. 'जल गैस' (Water Gas) कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन का एक सममोलर मिश्रण है, जबकि 'प्रोड्यूसर गैस' (Producer Gas) कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन का मिश्रण होती है, और दोनों ही ईंधन गैसों के रूप में व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं।
3. बेसेमर प्रक्रम (Bessemer Process) द्वारा कच्चे लोहे (Pig Iron) से ढलवां लोहा (Cast Iron) का उत्पादन किया जाता है, जिसमें द्रवित लोहे से अवांछित अशुद्धियों को दूर करने के लिए गर्म हवा का झोंका प्रवाहित किया जाता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, सल्फाइड अयस्कों का सांद्रण प्रायः 'फेन प्लवन विधि' (Froth Floatation Process) द्वारा किया जाता है, जिसमें चीड़ का तेल (Pine oil) संग्राहक (Collector) के रूप में कार्य करता है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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