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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों (Metals, Non-metals and their Compounds) के रासायनिक गुणों और निष्कर्षण प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. थर्माइट वेल्डिंग (Thermite Welding) की प्रक्रिया में एल्युमिनियम का उपयोग एक अपचायक (Reducing agent) के रूप में किया जाता है, जो आयरन (III) ऑक्साइड ($Fe_2O_3$) को गलित अवस्था में आयरन धातु में अपचयित कर देता है, और यह अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) होती है।
  2. 2. 'जल गैस' (Water Gas) कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन का एक सममोलर मिश्रण है, जबकि 'प्रोड्यूसर गैस' (Producer Gas) कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन का मिश्रण होती है, और दोनों ही ईंधन गैसों के रूप में व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं।
  3. 3. बेसेमर प्रक्रम (Bessemer Process) द्वारा कच्चे लोहे (Pig Iron) से ढलवां लोहा (Cast Iron) का उत्पादन किया जाता है, जिसमें द्रवित लोहे से अवांछित अशुद्धियों को दूर करने के लिए गर्म हवा का झोंका प्रवाहित किया जाता है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, सल्फाइड अयस्कों का सांद्रण प्रायः 'फेन प्लवन विधि' (Froth Floatation Process) द्वारा किया जाता है, जिसमें चीड़ का तेल (Pine oil) संग्राहक (Collector) के रूप में कार्य करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: थर्माइट अभिक्रिया में एल्युमिनियम अपनी उच्च अभिक्रियाशीलता के कारण आयरन ऑक्साइड को अपचयित करके गलित लोहा प्रदान करता है, जिसका उपयोग रेल की पटरी जोड़ने में होता है। कथन 2 सही है: जल गैस ($CO + H_2$) और प्रोड्यूसर गैस ($CO + N_2$) दोनों महत्वपूर्ण ईंधन गैसें हैं। कथन 3 गलत है: बेसेमर प्रक्रम का उपयोग कच्चे लोहे (Pig Iron) या ढलवां लोहे से 'इस्पात' (Steel) के निर्माण के लिए किया जाता है, न कि कच्चे लोहे से ढलवां लोहा बनाने के लिए। कथन 4 सही है: सल्फाइड अयस्कों के सांद्रण के लिए फेन प्लवन विधि का उपयोग किया जाता है जहाँ चीड़ का तेल झाग और फेन बनाता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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