BaalVikas
Menu
General Science
Asked 5 hours ago · Viewed 0 times

मानव अंतःस्रावी तंत्र और हॉर्मोनों के नियमन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हाइपोथैलेमस से स्रावित होने वाले 'गोनाडोट्रोपिन-रिलीजिंग हॉर्मोन' (GnRH) की पल्स आवृत्ति अग्र पीयूष ग्रंथि से ल्यूटिनाइजिंग हॉर्मोन (LH) और फॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (FSH) के स्रावण को सीधे नियंत्रित करती है।
  2. 2. अधिवृक्क ग्रंथि का मज्जा (Adrenal Medulla) भाग सहानुभूति तंत्रिका तंत्र (Sympathetic Nervous System) के नियंत्रण में 'एपिनेफ्राइन' और 'नॉरएपिनेफ्राइन' कैटेकोलामाइन्स का स्रावण करता है, जो हृदय स्पंदन, श्वसन दर और पुतली के फैलाव को बढ़ाते हैं।
  3. 3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, पीनियल ग्रंथि द्वारा स्रावित 'मेलाटोनिन' हॉर्मोन शरीर की 24-घंटे की (डाईरनल) दैनिक लय जैसे सोने-जागने के चक्र और शरीर के तापमान को विनियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  4. 4. पैराथायराइड ग्रंथि से स्रावित कैल्सीटोनिन (Calcitonin) हॉर्मोन रक्त में कैल्शियम आयनों के स्तर को बढ़ाने का कार्य करता है, जबकि पैराथायराइड हॉर्मोन (PTH) हाइपोकैल्सेमिक कारक के रूप में कार्य करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। हाइपोथैलेमस द्वारा स्रावित GnRH पीयूष ग्रंथि को गोनाडोट्रोपिन (LH और FSH) छोड़ने के लिए प्रेरित करता है। अधिवृक्क मज्जा से कैटेकोलामाइन्स (एपिनेफ्राइन/एड्रेनालाईन) आपातकालीन परिस्थितियों में स्रावित होते हैं जो 'फाइट या फ्लाइट' प्रतिक्रिया को नियंत्रित करते हैं। पीनियल ग्रंथि मेलाटोनिन स्रावित करती है जो स्लीप-वेक चक्र (सर्काडियन रिदम) को नियंत्रित करती है। कथन 4 गलत है क्योंकि 'कैल्सीटोनिन' थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित होता है जो रक्त में कैल्शियम स्तर को कम करता है (हाइपोकैल्सेमिक), जबकि पैराथायराइड हॉर्मोन (PTH) रक्त में कैल्शियम के स्तर को बढ़ाता है (हाइपरकैल्सेमिक)। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार अंतःस्रावी ग्रंथियाँ हमारे शरीर के विभिन्न चयापचय कार्यों का रासायनिक समन्वय करती हैं।
Share:
अगला प्रश्न → पदार्थ के सामान्य गुण, पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ… ← पिछला प्रश्न आनुवंशिकी और जैव विकास (Genetics and Evolution) के संदर्भ…

Related Questions

→ नाभिकीय भौतिकी और कण त्वरक (Particle Accelerators) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. साइक्लोट्रॉन (Cyclotron) एक ऐसा कण त्वरक है जिसका उपयोग आवेशित कणों (जैसे प्रोटॉन और ड्यूट्रॉन) को उच्च ऊर्जा तक त्वरित करने के लिए किया जाता है, किंतु इसका उपयोग हल्के उदासीन कणों जैसे न्यूट्रॉन या अत्यधिक भारी कणों जैसे यूरेनियम नाभिक को त्वरित करने के लिए सीधे नहीं किया जा सकता है। 2. द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता समीकरण ($E = mc^2$) के अनुसार, जब कोई रेडियोएक्टिव नाभिक अल्फा या बीटा क्षय से गुजरता है, तो कुल द्रव्यमान में होने वाली कमी (Mass defect)जस्ट ऊर्जा में रूपांतरित होकर उत्सर्जित होती है, और यह नियम नाभिकीय विखंडन और संलयन दोनों पर पूर्णतः लागू होता है। 3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, परमाणु के नाभिक का घनत्व उसके आकार (द्रव्यमान संख्या $A$) पर सीधे निर्भर करता है, अर्थात् जैसे-जैसे नाभिक बड़ा होता है, उसका घनत्व तेजी से बढ़ता जाता है। 4. बंधन ऊर्जा प्रति न्यूक्लिऊन (Binding Energy per Nucleon) का मान जिस नाभिक के लिए अधिकतम होता है, वह नाभिक अत्यधिक स्थायी होता है, और आवर्त सारणी में लोहे ($^{56}Fe$) के आसपास के नाभिकों की बंधन ऊर्जा प्रति न्यूक्लिऊन सर्वाधिक होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मानव रक्त परिसंचरण तंत्र, रक्त समूहों और उनकी आनुवंशिक व प्रतिरक्षात्मक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ABO रक्त समूहों की वंशागति सह-प्रभाविता (Co-dominance) और बहुविकल्पता (Multiple allelism) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें एलील $I^A$ और $I^B$ एक-दूसरे पर प्रभावी न होकर सह-प्रभावी होते हैं, और इस जीन की स्थिति क्रोमोसोम 9 पर होती है। 2. 'बॉम्बे रक्त समूह' ($O_h$ फेनोटाइप) से ग्रस्त व्यक्तियों में H-प्रतिजन का पूर्ण अभाव होता है, क्योंकि उनमें FUT1 जीन का उत्परिवर्तन होता है, जिसके कारण वे केवल बॉम्बे रक्त समूह से ही रक्त प्राप्त कर सकते हैं, यद्यपि वे सार्वभौमिक दाता के रूप में किसी भी अन्य ABO समूह (A, B, AB, O) के व्यक्ति को रक्त दान कर सकते हैं। 3. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस (Erythroblastosis fetalis) की समस्या तब उत्पन्न होती है जब Rh-ऋणात्मक गर्भवती महिला और Rh-धनात्मक गर्भस्थ शिशु के बीच रुधिर का आदान-प्रदान होता है, और यह स्थिति सामान्यतः प्रथम संतान के समय ही अत्यधिक घातक सिद्ध होती है क्योंकि माँ के शरीर में पहली गर्भावस्था के दौरान ही पर्याप्त मात्रा में Rh-प्रति-एंटिबॉडी (Anti-Rh antibodies) बन जाती हैं। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, सार्वग्राहि (Universal Recipient) रक्त समूह $AB$ की लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की सतह पर A और B दोनों प्रतिजन होते हैं और इसके प्लाज्मा में प्राकृतिक रूप से एंटी-A तथा एंटी-B दोनों एंटीबॉडी अनुपस्थित होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → नाभिकीय भौतिकी और रेडियोधर्मिता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी रेडियोएक्टिव नाभिक के क्षय की दर (Rate of decay) उस समय उपस्थित अप्रतिलक्षित नाभिकों की कुल संख्या के सीधे समानुपाती होती है, और इसका अर्द्ध-आयु काल (Half-life) उस नाभिक के प्रारंभिक द्रव्यमान और तापमान पर निर्भर करता है। 2. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) के दौरान उत्पन्न 'नियंत्रक छड़ें' (Control rods) जैसे कैडमियम या बोरॉन का उपयोग श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए न्यूट्रॉनों को अवशोषित करने हेतु किया जाता है, जबकि मंदक (Moderator) के रूप में भारी पानी न्यूट्रॉनों की गति को तेज करता है। 3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, तारों (जैसे सूर्य) में ऊर्जा का मुख्य स्रोत नाभिकीय संलयन है, जिसमें अत्यधिक उच्च ताप और दाब पर हल्के हाइड्रोजन नाभिक मिलकर हीलियम नाभिक का निर्माण करते हैं और इस प्रक्रिया में द्रव्यमान क्षति (Mass defect) ऊर्जा में परिवर्तित होती है। 4. बीटा-क्षय ($eta^-$ decay) के दौरान नाभिक के भीतर एक न्यूट्रॉन प्रोटॉन में परिवर्तित होता है, जिससे परमाणु क्रमांक में एक की वृद्धि होती है और द्रव्यमान संख्या अपरिवर्तित रहती है, तथा इस प्रक्रिया में एक एंटीन्यूट्रिनो का उत्सर्जन होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{eff}$) में क्रमिक वृद्धि के कारण परमाणु त्रिज्या में सामान्यतः कमी आती है, परंतु उत्कृष्ट गैसों (Noble Gases) के मामले में वांडर वॉल त्रिज्या का मान अधिक होने से उनका आकार अपने समूह के अन्य तत्वों की तुलना में बड़ा हो जाता है। 2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक नहीं होता है, और आवर्त सारणी में क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान सर्वाधिक होता है, जो फ्लोरीन से भी अधिक ऋणात्मक है। 3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, d-ब्लॉक (d-block) के तत्वों को संक्रमण तत्व कहा जाता है क्योंकि उनके आंशिक रूप से भरे हुए d-कक्षक होते हैं, और समूह 12 के तत्व (जैसे Zn, Cd, Hg) पूर्णतः भरे d-कक्षक होने के कारण संक्रमण तत्व नहीं माने जाते हैं। 4. किसी परमाणु की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) एक स्थिर भौतिक राशि है जो केवल उस अकेले विलगित परमाणु के द्रव्यमान और आकार पर निर्भर करती है, और यह कभी भी यौगिक में बंधे होने की स्थिति में बदलती नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है। 2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है। 3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था। 4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.