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नाभिकीय भौतिकी और कण त्वरक (Particle Accelerators) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. साइक्लोट्रॉन (Cyclotron) एक ऐसा कण त्वरक है जिसका उपयोग आवेशित कणों (जैसे प्रोटॉन और ड्यूट्रॉन) को उच्च ऊर्जा तक त्वरित करने के लिए किया जाता है, किंतु इसका उपयोग हल्के उदासीन कणों जैसे न्यूट्रॉन या अत्यधिक भारी कणों जैसे यूरेनियम नाभिक को त्वरित करने के लिए सीधे नहीं किया जा सकता है।
  2. 2. द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता समीकरण ($E = mc^2$) के अनुसार, जब कोई रेडियोएक्टिव नाभिक अल्फा या बीटा क्षय से गुजरता है, तो कुल द्रव्यमान में होने वाली कमी (Mass defect)जस्ट ऊर्जा में रूपांतरित होकर उत्सर्जित होती है, और यह नियम नाभिकीय विखंडन और संलयन दोनों पर पूर्णतः लागू होता है।
  3. 3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, परमाणु के नाभिक का घनत्व उसके आकार (द्रव्यमान संख्या $A$) पर सीधे निर्भर करता है, अर्थात् जैसे-जैसे नाभिक बड़ा होता है, उसका घनत्व तेजी से बढ़ता जाता है।
  4. 4. बंधन ऊर्जा प्रति न्यूक्लिऊन (Binding Energy per Nucleon) का मान जिस नाभिक के लिए अधिकतम होता है, वह नाभिक अत्यधिक स्थायी होता है, और आवर्त सारणी में लोहे ($^{56}Fe$) के आसपास के नाभिकों की बंधन ऊर्जा प्रति न्यूक्लिऊन सर्वाधिक होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि साइक्लोट्रॉन केवल आवेशित कणों (प्रोटॉन, ड्यूट्रॉन, अल्फा कण) को त्वरित कर सकता है; न्यूट्रॉन पर आवेश न होने के कारण उन पर विद्युत क्षेत्र बल नहीं लगा सकता। कथन 2 सही है क्योंकि आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा संबंध के अनुसार रेडियोएक्टिव क्षय, विखंडन और संलयन में द्रव्यमान क्षतिज ऊर्जा में बदलती है। कथन 3 गलत है क्योंकि विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, नाभिकीय घनत्व द्रव्यमान संख्या $A$ से स्वतंत्र होता है और लगभग सभी नाभिकों का घनत्व स्थिर ($~10^{17} kg/m^3$) होता है। कथन 4 सही है क्योंकि $^{56}Fe$ (आयरन) की बंधन ऊर्जा प्रति न्यूक्लिऊन सबसे अधिक होती है, जिससे यह अत्यधिक स्थायी होता है।
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