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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र में रक्त के थक्के जमने की प्रक्रिया (Blood Coagulation) और प्लाज्मा प्रोटीन की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया में फाइब्रिनोजेन (Fibrinogen), जो एक घुलनशील प्लाज्मा प्रोटीन है, प्रोथ्रोम्बिन और थ्रॉम्बोप्लास्टिन की उपस्थिति में अघुलनशील 'फाइब्रिन' तंतुओं में परिवर्तित हो जाता है जो जाल बनाकर रुधिर कणिकाओं को रोकते हैं।
- 2. प्रोथ्रोम्बिन का सक्रिय थ्रॉम्बिन में रूपांतरण कैल्सीयम आयनों ($Ca^{2+}$) और क्षतिग्रस्त ऊतकों द्वारा मुक्त किए जाने वाले एंजाइम 'थ्रॉम्बोकाइनेज' (Thromboplastin) की सक्रियता के बिना संभव नहीं है।
- 3. रुधिर वाहिनियों के भीतर रक्त के अवांछित थक्के (Thrombosis) को रोकने के लिए यकृत और वाहिनियों की अंतःकला (Endothelium) द्वारा प्राकृतिक रूप से 'हेपरिन' (Heparin) नामक प्रतिस्कंदक (Anticoagulant) स्रावित किया जाता है, जो थ्रॉम्बिन की क्रिया को रोकता है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया में विटामिन K की अनिवार्य भूमिका होती है क्योंकि यह यकृत में प्रोथ्रोम्बिन, फैक्टर VII, IX और X के संश्लेषण के लिए एक आवश्यक सह-कारक (Cofactor) के रूप में कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त स्कंदन (Blood Coagulation) की प्रक्रिया के संबंध में पूर्णतः सत्य हैं। रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया एक जटिल कैस्केड प्रक्रिया है जिसमें विभिन्न प्लाज्मा कारक भाग लेते हैं। फाइब्रिनोजेन अघुलनशील फाइब्रिन में बदलता है, थ्रॉम्बोकाइनेज और कैल्सियम आयन उत्प्रेरक की भूमिका निभाते हैं, हेपरिन आंतरिक वाहिनियों में थक्का बनने से रोकता है, और यकृत में इन कारकों के संश्लेषण के लिए विटामिन K आवश्यक है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, रुधिर स्कंदन एक अत्यंत संरचित जैवीय रासायनिक प्रतिक्रिया है।
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तरंग गति, डॉप्लर प्रभाव और ध्वनि तरंगों के संचरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी गैस में ध्वनि की चाल गैस के दाब (Pressure) पर निर्भर नहीं करती है, क्योंकि तापमान नियत रहने पर दाब में परिवर्तन के साथ घनत्व में भी आनुपातिक परिवर्तन हो जाता है, जिससे न्यूटन-लाप्लास के सूत्र के अनुसार ध्वनि का वेग स्थिर रहता है।
2. जब कोई ध्वनि स्रोत श्रोता की ओर गति करता है, तो श्रोता द्वारा सुनी गई आभासी आवृत्ति का मान वास्तविक आवृत्ति से अधिक होता है, और यह डॉप्लर प्रभाव केवल ध्वनि तरंगों के लिए ही लागू होता है, प्रकाश या विद्युत चुम्बकीय तरंगों के लिए इसका कोई अस्तित्व नहीं है।
3. अनुप्रस्थ तरंगें केवल ठोस और द्रवों के मुक्त पृष्ठों पर ही उत्पन्न की जा सकती हैं क्योंकि इनमें अपरूपण प्रतिबल (Shear stress) सहन करने की क्षमता होती है, जबकि गैसों में अपरूपण प्रतिबल सहन करने की क्षमता न होने के कारण अनुप्रस्थ तरंगें गैसों के भीतर संचरित नहीं हो सकतीं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, अनुदैर्ध्य तरंगों के संचरण के दौरान माध्यम में संपीड़न (Compression) वे क्षेत्र होते हैं जहाँ दाब और घनत्व दोनों का मान औसत मान से न्यूनतम होता है, जबकि विरलन (Rarefaction) के क्षेत्रों में दाब और घनत्व अधिकतम होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पदार्थ के सामान्य गुण, पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव की केशिका नली में ऊपर चढ़ने की ऊँचाई ($h$) केशिका नली की त्रिज्या ($r$) के व्युत्क्रमानुपाती होती है, और यदि किसी कृत्रिम उपग्रह के अंदर भारहीनता की स्थिति हो, तो केशिका नली में द्रव नली की पूरी लंबाई तक ऊपर चढ़ जाएगा बशर्ते नली का सिरा जल में डूबा हो।
2. श्यानता (Viscosity) द्रवों का वह आंतरिक गुण है जिसके कारण वे अपनी विभिन्न परतों के बीच होने वाली आपेक्षिक गति का विरोध करते हैं, और तापमान बढ़ने पर द्रवों की श्यानता घटती है जबकि गैसों की श्यानता बढ़ती है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई वस्तु किसी तरल में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोई जाती है, तो वह अपने द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावक बल का अनुभव करती है, जिसका केंद्र विस्थापित तरल के द्रव्यमान केंद्र पर संकेंद्रित होता है जिसे 'उत्प्लावन केंद्र' कहते हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, पृष्ठ तनाव (Surface tension) किसी द्रव के पृष्ठ पर एकांक लंबाई पर लगने वाला बल है, और जब पानी में कुछ डिटर्जेंट या साबुन मिलाया जाता है, तो पानी का पृष्ठ तनाव कम हो जाता है जिससे जल की पृष्ठ ऊर्जा घट जाती है और मैल अधिक आसानी से बाहर निकल जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सुकेन्द्रकी (Eukaryotic) कोशिकाओं में कोशिका विभाजन (Cell Division) और कोशिकांगों की सूक्ष्म संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समसूत्री विभाजन (Mitosis) के एनाफेज (Anaphase) चरण के दौरान, सेंट्रोमियर का विभाजन होता है और sister chromatids अलग होकर विपरीत ध्रुवों की ओर गति करते हैं, जिसमें यह गति मुख्य रूप से काइनेटोकोर माइक्रोट्यूब्यूल्स के लघु होने (Depolymerization) और मोटर प्रोटीन जैसे डाइनीन एवं किनेसिन की सक्रियता के कारण होती है।
2. अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) की पैकाइटीन (Pachytene) अवस्था में 'रिकॉम्बिनेज' (Recombinase) एंजाइम की उपस्थिति में सजातीय (Homologous) गुणसूत्रों के गैर-भ्रातृ क्रोमैटिड्स (Non-sister chromatids) के बीच आनुवंशिक सामग्री का विनिमय होता है, जिसे काइऐस्माटा (Chiasmata) का निर्माण कहा जाता है।
3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, पादप कोशिकाओं में कोशिका द्रव्य का विभाजन (Cytokinesis) सेल प्लेट (Cell plate) पद्धति द्वारा होता है, जिसमें गोलगी बॉडी द्वारा स्रावित पुटिकाएँ (Vesicles) मध्य रेखा पर संकेंद्रित होकर अपकेन्द्री (Centrifugal) रूप से बाहर की ओर बढ़ती हैं।
4. माइटोकॉन्ड्रिया और क्लोरोप्लास्ट अर्ध-स्वायत्त (Semi-autonomous) कोशिकांग हैं जिनमें 80S प्रकार के राइबोसोम और एकल-रज्जुकी (Single-stranded) रैखिक डीएनए पाए जाते हैं, जिसके कारण ये अपनी कुल प्रोटीन आवश्यकता का शत-प्रतिशत भाग स्वयं संश्लेषित कर लेते हैं।
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विद्युत धारा, प्रतिरोधकता और परिपथ के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी चालक पदार्थ की विशिष्ट प्रतिरोधकता (Resistivity) का मान न केवल उसके भौतिक आयामों (लंबाई और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल) पर निर्भर करता है, बल्कि यह चालक के तापमान और उसके मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या घनत्व पर भी पूरी तरह निर्भर होती है।
2. जब विभिन्न प्रतिरोधों वाले प्रतिरोधकों को समानांतर क्रम (Parallel Combination) में जोड़ा जाता है, तो प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर का मान भिन्न होता है, जबकि परिपथ की कुल धारा प्रत्येक शाखा की धाराओं के बीजगणितीय योग के बराबर होती है।
3. अतिचालकता (Superconductivity) की स्थिति में कुछ सामग्रियों का वैद्युत प्रतिरोध शून्य हो जाता है और वे एक आदर्श प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic) व्यवहार प्रदर्शित करते हैं, जिसे 'मीस्नर प्रभाव' (Meissner effect) कहा जाता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, मिश्रधातुओं (जैसे मैंगनीन या कॉन्स्टेंटन) का प्रतिरोधकता का तापमान गुणांक बहुत कम होता है, जिसके कारण इनका उपयोग मानक प्रतिरोध कुंडलियाँ बनाने में किया जाता है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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