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मानव शरीर के पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. क्षुद्रांत (Small intestine) के शोषणांक (Villi) में वसा अम्ल और ग्लिसरोल जल में अघुलनशील होने के कारण सीधे रक्त केशिकाओं में अवशोषित नहीं हो पाते, बल्कि वे पहले काइलोमाइक्रोन (Chylomicrons) के रूप में पैकेज होकर लसिका वाहिकाओं (Lacteals) में प्रवेश करते हैं।
- 2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, ऑक्सीजन-हीमोग्लोबिन विक्षोभ वक्र (Oxygen-Hemoglobin Dissociation Curve) सिग्मॉइड (Sigmoid) आकार का होता है, और ऊतकों में उच्च तापमान, उच्च $H^+$ सांद्रता तथा उच्च $pCO_2$ की स्थिति 'बोर प्रभाव' (Bohr Effect) के कारण ऑक्सीजन के प्रति हीमोग्लोबिन की बंधुता को कम कर देती है।
- 3. हृदय के पेसमेकर के रूप में कार्य करने वाला 'साइनोएट्रियल नोड' (SAN) दाएं आलिंद के ऊपरी दाहिने कोने पर स्थित होता है, जो स्वतः उत्तेजना (Autorhythmicity) उत्पन्न करके हृदय स्पंदन की दर को नियंत्रित करता है।
- 4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में बेसल गैंग्लिया (Basal Ganglia) और लिम्बिक तंत्र के बीच संतुलन स्थापित करने वाला मुख्य न्यूरोट्रांसमीटर 'एसिटाइलकोलाइन' है, जिसकी कमी से मस्तिष्क में पार्किंसन रोग के लक्षण उत्पन्न होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि वसा अम्ल और ग्लिसरोल जल में अघुलनशील होते हैं, इसलिए वे आंत की म्यूकोसा से सीधे रक्त में नहीं जा सकते; वे पहले छोटे गोलकों (मिसेल) में पुनर्गठित होकर आंत की कोशिकाओं में प्रवेश करते हैं जहाँ वे प्रोटीन से आच्छादित होकर काइलोमाइक्रोन बनाते हैं और लसिका वाहिकाओं (लेक्टेल्स) में छोड़े जाते हैं। कथन 2 सही है; ऑक्सीजन-हीमोग्लोबिन विघटन वक्र सिग्मॉइड होता है और ऊतकों में उच्च $pCO_2$, उच्च तापमान और कम pH (या उच्च $H^+$ सांद्रता) के कारण 'बोर प्रभाव' उत्पन्न होता है, जो हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन से जुड़ने की क्षमता को घटाता है। कथन 3 सही है, 'साइनोएट्रियल नोड' (SAN) दाएं आलिंद के ऊपरी दाहिने कोने पर स्थित प्राकृतिक पेसमेकर है। कथन 4 गलत है क्योंकि पार्किंसन रोग मस्तिष्क में 'डोपामिन' (Dopamine) नामक न्यूरोट्रांसमीटर की कमी के कारण होता है, न कि एसिटाइलकोलाइन की कमी से। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार मानव शरीर के तंत्र आपसी समन्वय से कार्य करते हैं।
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र, रक्त वाहिकाओं की संरचना और हीमोग्लोबिन के परिवहन गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. धमनियां (Arteries) आमतौर पर हृदय से रक्त को दूर शरीर के अंगों तक ले जाती हैं और इनकी दीवारें मोटी तथा अत्यधिक इलास्टिनयुक्त होती हैं ताकि वे उच्च रक्तचाप को सहन कर सकें, जबकि फुफ्फुस धमनी (Pulmonary artery) इसका अपवाद है जो डीऑक्सीजनेटेड रक्त ले जाती है।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, केशिकाएं (Capillaries) सबसे पतली रक्त वाहिकाएं होती हैं जिनकी दीवारें केवल एक स्तर की एंडोथेलियल कोशिकाओं से बनी होती हैं, और यहीं से रक्त और ऊतकों के बीच गैसों, पोषक तत्वों तथा अपशिष्ट पदार्थों का विनिमय होता है।
3. हीमोग्लोबिन अणु एक चतुष्कीय प्रोटीन (Tetrameric protein) है जिसमें चार हीम समूह होते हैं, और एक हीमोग्लोबिन अणु अधिकतम चार ऑक्सीजन अणुओं का परिवहन कर सकता है, जहाँ ऑक्सीजन के साथ इसका संयोजन एक सहकारी प्रक्रिया (Cooperative binding) प्रदर्शित करता है।
4. मानव शरीर में 'एरिथ्रोसाइट्स' (RBCs) का औसत जीवनकाल लगभग 120 दिन होता है, जिसके बाद पुराने और क्षतिग्रस्त आरबीसी का मुख्य रूप से प्लीहा (Spleen) में विघटन होता है, जिसे 'आरबीसी का कब्रिस्तान' कहा जाता है, और हीमोग्लोबिन के विघटन से प्राप्त 'बिलीरुबिन' को यकृत द्वारा पित्त के रूप में उत्सर्जित किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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नाभिकीय भौतिक और आधुनिक भौतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी रेडियोएक्टिव तत्व की अर्ध-आयु (Half-life) उसके क्षय नियतांक (Decay constant) के व्युत्क्रमानुपाती होती है, और औसत आयु (Mean life) अर्ध-आयु की तुलना में लगभग 1.44 गुना अधिक होती है।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) की प्रक्रिया में यूरेनियम-235 पर जब एक मंद गति का न्यूट्रॉन प्रहार किया जाता है, तो द्रव्यमान क्षति (Mass defect) के समतुल्य ऊर्जा 'आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता समीकरण' ($E=mc^2$) के अनुसार मुक्त होती है।
3. तारों के भीतर ऊर्जा उत्पादन का मुख्य स्रोत नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) है, जिसके लिए अत्यंत उच्च तापमान (लगभग $10^7$ से $10^8$ केल्विन) और उच्च दाब की आवश्यकता होती है ताकि कूलॉम प्रतिकर्षण बल को पार किया जा सके।
4. बीटा-क्षय ($eta$-decay) के दौरान उत्सर्जित होने वाले पॉजिट्रॉन और इलेक्ट्रॉन के संवेग स्पेक्ट्रम के सतत होने की व्याख्या करने के लिए पावली ने 'न्यूट्रिनो' (Neutrino) और 'एंटीन्यूट्रिनो' के अस्तित्व की परिकल्पना की थी, जो विद्युत रूप से उदासीन और अत्यंत कम द्रव्यमान वाले कण हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विलयन और उत्प्रेरण (Solutions and Catalysis) के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राउल्ट के नियम (Raoult's Law) के अनुसार, किसी वाष्पशील विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर प्राप्त विलयन के वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन विलयन में उपस्थित विलेय के मोल अंश (Mole fraction) के बराबर होता है, जो कि एक अणुसंख्यक गुणधर्म (Colligative property) है।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, समांगी उत्प्रेरण (Homogeneous Catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक समान भौतिक अवस्था (Phase) में होते हैं, जबकि विषमांगी उत्प्रेरण में उत्प्रेरक ठोस अवस्था में और अभिकारक गैस या द्रव अवस्था में होते हैं, जहाँ ठोस उत्प्रेरक की सतह पर अधिशोषण (Adsorption) की घटना मुख्य भूमिका निभाती है।
3. वान्ट हॉफ गुणांक ($i$) का मान वैद्युत अपघट्यों के लिए एक से अधिक होता है क्योंकि वे विलयन में वियोजित (Dissociate) होकर कणों की संख्या बढ़ा देते हैं, जबकि संगुणन (Association) दर्शाने वाले यौगिकों के लिए 'i' का मान एक से कम होता है।
4. एंजाइम उत्प्रेरण (Enzyme catalysis) अत्यधिक विशिष्ट और प्रभावी होता है, तथा उत्प्रेरक स्वयं रासायनिक अभिक्रिया के दौरान उपभोग हो जाते हैं और अभिक्रिया के अंत में नए यौगिकों में परिवर्तित होकर नष्ट हो जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव अंतःस्रावी तंत्र और विभिन्न हॉर्मोनों के स्राव तथा उनके नियंत्रण तंत्र (Feedback Mechanisms) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइपोथैलेमस द्वारा स्रावित 'गोनाडोट्रो핀-रिलीजिंग हॉर्मोन' (GnRH) अग्र पीयूष ग्रंथि (Anterior Pituitary) को प्रेरित करता है ताकि वह ल्यूटिनाइजिंग हॉर्मोन (LH) और फॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (FSH) का स्राव कर सके।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, थाइरॉक्सिन ($T_4$) और ट्राईआयोडोथायरोनिन ($T_3$) हॉर्मोनों का स्तर कम होने पर हाइपोथैलेमस 'थायरोट्रोपिन-रिलीजिंग हॉर्मोन' (TRH) का स्राव बढ़ाता है, जो सकारात्मक पुनर्भरण (Positive Feedback) के माध्यम से पीयूष ग्रंथि को टीएसएच (TSH) जारी करने के लिए उत्तेजित करता है।
3. अग्न्याशय की लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) में उपस्थित अल्फा कोशिकाएं 'ग्लੂकागोन' हॉर्मोन का स्राव करती हैं, जो ग्लाइकोजेनोलिसिस (Glycogenolysis) और ग्लूकोनियोजेनेसिस को प्रेरित करके रक्त में ग्लूकोज के स्तर को बढ़ाता है।
4. एट्रियल नेट्रियूरेटिक फैक्टर (ANF) हृदय की अलिंद दीवारों द्वारा स्रावित एक पेप्टाइड हॉर्मोन है, जो रक्तचाप बढ़ने पर स्रावित होता है और वाहिकाप्रसार (Vasodilation) को प्रेरित करके रक्तचाप को घटाने का कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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