General Science
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नाभिकीय भौतिक और आधुनिक भौतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी रेडियोएक्टिव तत्व की अर्ध-आयु (Half-life) उसके क्षय नियतांक (Decay constant) के व्युत्क्रमानुपाती होती है, और औसत आयु (Mean life) अर्ध-आयु की तुलना में लगभग 1.44 गुना अधिक होती है।
- 2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) की प्रक्रिया में यूरेनियम-235 पर जब एक मंद गति का न्यूट्रॉन प्रहार किया जाता है, तो द्रव्यमान क्षति (Mass defect) के समतुल्य ऊर्जा 'आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता समीकरण' ($E=mc^2$) के अनुसार मुक्त होती है।
- 3. तारों के भीतर ऊर्जा उत्पादन का मुख्य स्रोत नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) है, जिसके लिए अत्यंत उच्च तापमान (लगभग $10^7$ से $10^8$ केल्विन) और उच्च दाब की आवश्यकता होती है ताकि कूलॉम प्रतिकर्षण बल को पार किया जा सके।
- 4. बीटा-क्षय ($eta$-decay) के दौरान उत्सर्जित होने वाले पॉजिट्रॉन और इलेक्ट्रॉन के संवेग स्पेक्ट्रम के सतत होने की व्याख्या करने के लिए पावली ने 'न्यूट्रिनो' (Neutrino) और 'एंटीन्यूट्रिनो' के अस्तित्व की परिकल्पना की थी, जो विद्युत रूप से उदासीन और अत्यंत कम द्रव्यमान वाले कण हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन आधुनिक एवं परमाणु भौतिकी के दृष्टिकोण से पूर्णतः सत्य हैं। प्रथम कथन के अनुसार, अर्ध-आयु $T_{1/2} = \frac{\ln 2}{\lambda}$ और औसत आयु $\tau = \frac{1}{\lambda}$ होती है, जिससे $\tau = 1.44 \times T_{1/2}$ प्राप्त होता है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, नाभिकीय विखंडन और संलयन दोनों ही प्रक्रियाओं में द्रव्यमान ऊर्जा में परिवर्तित होता है। तारों में प्रोटॉन-प्रोटॉन श्रृंखला अभिक्रिया द्वारा संलयन होता है, और बीटा क्षय में ऊर्जा तथा संवेग संरक्षण के लिए न्यूट्रिनो/एंटीन्यूट्रिनो की उपस्थिति अनिवार्य होती है।
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Related Questions
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) की आनुवंशिक एवं प्रतिरक्षात्मक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ABO रक्त समूह प्रणाली में लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर पाए जाने वाले एंटीजन (एग्लूटिनोजन) कार्बोहाइड्रेट अंश होते हैं जो लिपिड या प्रोटीन से जुड़े रहते हैं, और इनका संश्लेषण 'I' जीन द्वारा नियंत्रित होता है जिसमें $I^A$ और $I^B$ एलील सह-प्रभाविता (Co-dominance) प्रदर्शित करते हैं।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, बम्बई रक्त समूह (Bombay Blood Phenotype) वाले व्यक्तियों में 'H' एंटीजन का संश्लेषण नहीं हो पाता है, जिससे उनका रक्त समूह भले ही आनुवंशिक रूप से A, B या AB हो, परंतु सिरोलॉजी में वे 'O' समूह की तरह व्यवहार करते हैं।
3. Rh-असंगतता (Erythroblastosis foetalis) की स्थिति में, Rh-धनात्मक माता से उत्पन्न होने वाला प्रथम Rh-ऋणात्मक शिशु गंभीर रूप से प्रभावित होता है क्योंकि माँ के शरीर में पहले से मौजूद प्री-फॉर्मड एंटीबॉडीज प्लेसेंटा को पार कर जाते हैं।
4. सार्वभौमिक प्राप्तकर्ता (Universal Recipient) रक्त समूह 'AB' वाले व्यक्तियों के प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B दोनों प्राकृतिक एंटीबॉडी (एग्लूटेनिन) अनुपस्थित होते हैं, हालांकि प्लाज्मा आधान (Plasma Transfusion) के समय दाता के प्लाज्मा में मौजूद एंटीबॉडीज की भूमिका पर विचार करना आवश्यक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पदार्थ की अवस्थाओं, परमाणु संरचना और क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्लाज़्मा और बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट (BEC) दोनों ही पदार्थ की उच्च ऊर्जा और अत्यंत निम्न तापमान वाली अवस्थाएँ हैं, जहाँ BEC का निर्माण लगभग परम शून्य ताप पर बोसॉन कणों के एक ही क्वांटम अवस्था में संघनन (Condensation) के कारण होता है।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत (Uncertainty Principle) के अनुसार किसी कण की स्थिति और संवेग का एक साथ यथार्थ निर्धारण असंभव है, तथा यह नियम बोर के परमाणु मॉडल की उस अवधारणा का खंडन करता है जिसमें इलेक्ट्रॉनों के लिए निश्चित वृत्ताकार कक्षाओं की परिकल्पना की गई थी।
3. रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल में मैक्सवेल के विद्युत चुम्बकीय सिद्धांत के अनुसार यह कठिनाई आई कि त्वरित गति करते हुए इलेक्ट्रॉन लगातार ऊर्जा का विकिरण करेंगे, जिससे अंततः उनका नाभिक में गिर जाना चाहिए था, जिसे बाद में समरफील्ड ने अपने दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं के सिद्धांत द्वारा पूरी तरह ठीक किया।
4. पावली का अपवर्जन नियम (Pauli Exclusion Principle) यह निर्धारित करता है कि किसी परमाणु में किन्हीं भी दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं ($n, l, m_s$) का मान सर्वदा भिन्न होना चाहिए, जिसके कारण एक ही कक्षक में विपरीत चक्रण (Opposite spins) वाले अधिकतम दो ही इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पदार्थ की अवस्थाओं, प्लाज़्मा, बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट (BEC) और परमाणु संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्लाज़्मा पदार्थ की एक ऐसी अवस्था है जिसमें गैस अत्यधिक आयनीकृत होती है, जिससे उसमें मुक्त इलेक्ट्रॉनों और आयनों का मिश्रण होता है, और यह ब्रह्मांड में प्राकृतिक रूप से तारों के भीतर प्रचुर मात्रा में पाई जाती है।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट (BEC) का निर्माण अत्यंत कम घनत्व वाली गैस को परम शून्य (Absolute Zero) के अत्यंत निकट तक ठंडा करके किया जाता है, जहाँ सभी परमाणु एक ही क्वांटम अवस्था में संघनित हो जाते हैं।
3. रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग ने परमाणु के नाभिक की खोज की, जिसके अनुसार परमाणु का अधिकांश भाग खोखला होता है और संपूर्ण धन आवेश तथा लगभग संपूर्ण द्रव्यमान परमाणु के अत्यंत छोटे केंद्रीय भाग (नाभिक) में केंद्रित होता है।
4. बोहर के परमाणु मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर किन्हीं भी त्रिज्या वाली कक्षाओं में अनवरत चक्कर लगा सकते हैं, और जब तक वे इन कक्षाओं में घूमते हैं, उनकी ऊर्जा का विकिरण या ह्रास होता रहता है।
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मानव शरीर के पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. क्षुद्रांत (Small intestine) के शोषणांक (Villi) में वसा अम्ल और ग्लिसरोल जल में अघुलनशील होने के कारण सीधे रक्त केशिकाओं में अवशोषित नहीं हो पाते, बल्कि वे पहले काइलोमाइक्रोन (Chylomicrons) के रूप में पैकेज होकर लसिका वाहिकाओं (Lacteals) में प्रवेश करते हैं।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, ऑक्सीजन-हीमोग्लोबिन विक्षोभ वक्र (Oxygen-Hemoglobin Dissociation Curve) सिग्मॉइड (Sigmoid) आकार का होता है, और ऊतकों में उच्च तापमान, उच्च $H^+$ सांद्रता तथा उच्च $pCO_2$ की स्थिति 'बोर प्रभाव' (Bohr Effect) के कारण ऑक्सीजन के प्रति हीमोग्लोबिन की बंधुता को कम कर देती है।
3. हृदय के पेसमेकर के रूप में कार्य करने वाला 'साइनोएट्रियल नोड' (SAN) दाएं आलिंद के ऊपरी दाहिने कोने पर स्थित होता है, जो स्वतः उत्तेजना (Autorhythmicity) उत्पन्न करके हृदय स्पंदन की दर को नियंत्रित करता है।
4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में बेसल गैंग्लिया (Basal Ganglia) और लिम्बिक तंत्र के बीच संतुलन स्थापित करने वाला मुख्य न्यूरोट्रांसमीटर 'एसिटाइलकोलाइन' है, जिसकी कमी से मस्तिष्क में पार्किंसन रोग के लक्षण उत्पन्न होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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