सीखने के 'सूझ-बूझ' सिद्धांत (Insight Learning) को किसने प्रतिपादित किया था?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
सीखने के 'सूझ-बूझ' (Insight Learning) सिद्धांत का प्रतिपादन गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिकों (Gestalt Psychologists) द्वारा किया गया था, जिसमें वोल्फगांग कोहलर (Wolfgang Köhler) का नाम सबसे प्रमुख है। इस सिद्धांत के अनुसार, सीखना केवल यांत्रिक अभ्यास या त्रुटि और प्रयास (Trial and Error) पर निर्भर नहीं करता, बल्कि व्यक्ति अपनी मानसिक क्षमताओं और बुद्धिमत्ता का उपयोग करके अचानक से समस्या के समाधान (अन्तर्दृष्टि या सूझ) को प्राप्त करता है। कोहलर ने चिम्पैंजी 'सुल्तान' पर प्रसिद्ध प्रयोग किया था, जिसमें भूखे चिम्पैंजी ने छड़ियों को जोड़कर या बक्सों को एक के ऊपर एक रखकर केले को प्राप्त किया था। यह सिद्धांत यह स्पष्ट करता है कि उच्च स्तर का अधिगम संज्ञानात्मक पुनर्गठन (Cognitive Restructuring) और संपूर्ण स्थिति की समझ पर आधारित होता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- गेस्टाल्टवादी मनोवैज्ञानिक: कोहलर, कोफ्का और वर्दीमर इस संप्रदाय के प्रमुख संस्थापक थे, जिनका मुख्य दृष्टिकोण 'संपूर्णता से अंश की ओर' (Whole to Part) था।
- विकल्प विश्लेषण (पावलोव): इवान पावलोव ने 'शास्त्रीय अनुबंधन' (Classical Conditioning) सिद्धांत का प्रतिपादन किया, जो कुत्ते की लार पर आधारित था।
- विकल्प विश्लेषण (थॉर्नडाइक): एडवर्ड थॉर्नडाइक ने 'प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत' (Trial and Error Theory) दिया, जिसमें उद्दीपक-अनुक्रिया (S-R Bond) की प्रधानता होती है।
- विकल्प विश्लेषण (स्किनर): बी.एफ. स्किनर ने 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' (Operant Conditioning) सिद्धांत का प्रतिपादन किया, जो पुनर्बलन पर केंद्रित है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: गेस्टाल्ट मनोविज्ञान इस बात पर जोर देता है कि मन किसी भी समस्या का विश्लेषण खंडों में करने के बजाय उसे समग्र रूप में देखता है। इस सिद्धांत को गहराई से समझने के लिए जीन पियाजे का सिद्धांत और संज्ञानात्मक विकास की अवधारणाओं का अध्ययन करना भी अत्यंत लाभकारी होता है।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS) में कोहलर के सूझ-बूझ के सिद्धांत से अक्सर अनुप्रयोग-आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। कक्षा कक्ष शिक्षण में यह सिद्धांत इस बात की वकालत करता है कि छात्रों को केवल रटने (Rote Memorization) के लिए बाध्य न किया जाए, बल्कि उन्हें ऐसे समस्या-समाधान के अवसर दिए जाएं जहाँ वे स्वतंत्र रूप से सोच सकें और अपनी तार्किक क्षमता का विकास कर सकें। जब विद्यार्थी किसी कठिन प्रश्न का अचानक से सही समाधान खोज लेते हैं, तो वह उनकी 'अन्तर्दृष्टि' (Insight) का ही परिणाम होता है। इसलिए, पाठ्यक्रम को समग्र रूप से प्रस्तुत करना और अवधारणाओं के बीच अंतर्संबंध स्थापित करना इस सिद्धांत का मुख्य शैक्षणिक निहितार्थ है।