अधिगम (Learning) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' (Operant Conditioning) का प्रतिपादक कौन है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
अधिगम के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' (Operant Conditioning) सिद्धांत के प्रतिपादक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक बी.एफ. स्किनर (B.F. Skinner) हैं। इस सिद्धांत को नैमित्तिक अनुबंधन (Instrumental Conditioning) या स्किनर के अधिगम सिद्धांत के रूप में भी जाना जाता है। स्किनर के अनुसार, जीव अपने वातावरण में सक्रिय रूप से कार्य करता है और उसके व्यवहार के परिणाम (जैसे- पुरस्कार या दंड) यह तय करते हैं कि वह व्यवहार भविष्य में दोहराया जाएगा या नहीं। इसे 'आर-एस थ्योरी' (R-S Theory) भी कहा जाता है, जहाँ अनुक्रिया (Response) पहले होती है और उद्दीपक (Stimulus) या पुनर्बलन बाद में मिलता है। स्किनर ने अपने प्रयोगों के लिए 'स्किनर बॉक्स' (Skinner Box) का उपयोग कबूतरों और चूहों पर किया था।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- पुनर्बलन (Reinforcement): यह क्रियाप्रसूत अनुबंधन का सबसे महत्वपूर्ण घटक है। सकारात्मक पुनर्बलन और नकारात्मक पुनर्बलन दोनों ही वांछित व्यवहार को बढ़ाने में मदद करते हैं।
- विकल्प विश्लेषण: (a) इवान पावलोव ने 'शास्त्रीय अनुबंधन' (Classical Conditioning) का सिद्धांत दिया; (c) जीन पियाजे ने 'संज्ञानात्मक विकास' का सिद्धांत दिया; और (d) जॉन वाटसन ने व्यवहारवाद की नींव रखी और 'लिटिल अल्बर्ट' पर प्रयोग किया। अतः सही उत्तर विकल्प (b) है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: स्किनर का क्रियाप्रसूत अनुबंधन अधिगम के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी मोड़ था। यह सिद्धांत प्रोग्राम्ड लर्निंग (Programmed Learning) और शिक्षण मशीनों (Teaching Machines) के विकास का आधार बना। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें अधिगम सिद्धांत और शिक्षा।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, HTET) में स्किनर के क्रियाप्रसूत अनुबंधन से बार-बार प्रश्न पूछे जाते हैं। विशेषकर पुनर्बलन के प्रकार (सकारात्मक, नकारात्मक, प्राथमिक, द्वितीयक) और पुनर्बलन अनुसूचियों (Reinforcement Schedules) पर आधारित प्रश्न परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कक्षा-कक्ष शिक्षण में इस सिद्धांत का उपयोग विद्यार्थियों को शाबाश कहना, स्टार या ग्रेड देना, और वांछित व्यवहार को ढालने (Shaping) के लिए किया जाता है। शिक्षकों को चाहिए कि वे नकारात्मक दंड के स्थान पर सकारात्मक पुनर्बलन का अधिक प्रयोग करें ताकि छात्रों में आंतरिक अभिप्रेरणा का विकास हो सके।