अधिगम के किस सिद्धांत को 'क्षेत्र सिद्धांत' (Field Theory) कहा जाता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
कुर्ट लेविन (Kurt Lewin) द्वारा प्रतिपादित अधिगम के सिद्धांत को 'क्षेत्र सिद्धांत' (Field Theory) के नाम से जाना जाता है। लेविन के अनुसार, मानव व्यवहार उसके जीवन स्थान (Life Space) और मनोवैज्ञानिक वातावरण (Psychological Environment) का परिणाम होता है। इसे उनके प्रसिद्ध समीकरण B = f(P, E) द्वारा दर्शाया जाता है, जहाँ B व्यवहार है, P व्यक्ति है और E पर्यावरण है। इस सिद्धांत में यह माना जाता है कि सीखने की प्रक्रिया में व्यक्ति अपने परिवेश और विभिन्न बलों (Forces) के अंतःक्रिया के माध्यम से ज्ञान का अर्जन करता है। इसलिए विकल्प (b) इस प्रश्न का बिल्कुल सही और प्रामाणिक उत्तर है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- कुर्ट लेविन गेस्टाल्टवादी मनोवैज्ञानिकों से अत्यधिक प्रभावित थे और उन्होंने शिक्षा में संज्ञानात्मक तथा क्षेत्रीय दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया।
- विकल्प (a) पावलोव का सिद्धांत शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning) से संबंधित है जो उद्दीपक-अनुक्रिया पर आधारित है।
- विकल्प (c) थॉर्नडाइक का सिद्धांत प्रयास एवं त्रुटि (Trial and Error) तथा संयोजनवाद पर बल देता है।
- विकल्प (d) स्किनर का सिद्धांत क्रियाप्रसूत अनुबंधन (Operant Conditioning) और पुनर्बलन पर केंद्रित है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: कुर्ट लेविन का क्षेत्र सिद्धांत आधुनिक शिक्षा मनोविज्ञान में संज्ञानात्मक विकास और पर्यावरणीय प्रभावों को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है। अधिक जानकारी के लिए गेस्टाल्ट मनोविज्ञान और अधिगम के सिद्धांत से संबंधित अध्यायों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, HTET) में कुर्ट लेविन के क्षेत्र सिद्धांत से जुड़े प्रश्न अक्सर उनके समीकरण B = f(P, E) और जीवन स्थान (Life Space) की अवधारणा पर पूछे जाते हैं। कक्षा कक्षीय शिक्षण में यह सिद्धांत इस बात पर जोर देता है कि शिक्षक को छात्र की व्यक्तिगत योग्यताओं के साथ-साथ उसके सामाजिक तथा भौतिक पर्यावरण को भी अनुकूल बनाना चाहिए ताकि अधिगम प्रभावी हो सके। क्षेत्र सिद्धांत रटने की प्रवृत्ति के बजाय सूझ-बूझ और संज्ञानात्मक मानचित्र (Cognitive Map) के निर्माण पर बल देता है, जो बाल केंद्रित शिक्षा प्रणाली की मूल भावना के पूरी तरह अनुकूल है।