अधिगम के किस सिद्धांत में 'पुनर्बलन' (Reinforcement) के विभिन्न अनुसूचियों (Schedules) का वर्णन किया गया है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
अधिगम के क्षेत्र में 'पुनर्बलन की विभिन्न अनुसूचियों' (Schedules of Reinforcement) का प्रतिपादन बी.एफ. स्किनर (B.F. Skinner) द्वारा उनके 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत किया गया था। स्किनर ने यह सिद्ध किया कि किसी वांछित व्यवहार को बनाए रखने या उसकी पुनरावृत्ति की दर को बढ़ाने के लिए पुनर्बलन (Reinforcement) कब और किस प्रकार दिया जाना चाहिए, यह अनुसूचियों पर निर्भर करता है। ये अनुसूचियाँ मुख्य रूप से सतत (Continuous) और आंशिक (Intermittent/Partial) पुनर्बलन में विभाजित होती हैं, जिनमें स्थिर अनुपात, परिवर्तनशील अनुपात, स्थिर अंतराल और परिवर्तनशील अंतराल जैसी उप-श्रेणियाँ शामिल हैं। स्किनर के अनुसार, आंशिक पुनर्बलन अनुसूचियाँ सतत पुनर्बलन की तुलना में विलोपन (Extinction) के प्रति अधिक प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करती हैं, जिससे अधिगम अधिक स्थाई और प्रभावी होता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- स्किनर का क्रियाप्रसूत अनुबंधन: इसे नैमित्तिक अनुबंधन या आर-प्रकार (R-type) अनुबंधन भी कहा जाता है जहाँ अनुक्रिया के परिणाम स्वरूप पुनर्बलन मिलता है।
- पावलोव का सिद्धांत: यह 'शास्त्रीय अनुबंधन' (Classical Conditioning) से संबंधित है जो उद्दीपक-प्रतिक्रिया (S-R) पर आधारित है, न कि पुनर्बलन अनुसूचियों पर।
- थॉर्नडाइक का सिद्धांत: इन्होंने 'प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत' तथा तत्परता, अभ्यास और प्रभाव के नियम दिए, जो आधुनिक अधिगम के आधारशिला हैं।
- कोहलर का सिद्धांत: यह गेस्टाल्ट मनोविज्ञान से जुड़ा 'सूझ या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत' (Insight Learning) है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: स्किनर ने चूहों और कबूतरों पर प्रयोग कर ऑपरेंट चैंबर (Skinner Box) का विकास किया था। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें अधिगम सिद्धांत एवं स्किनर का योगदान।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (CTET, UPTET, HTET) में स्किनर के पुनर्बलन से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। परिवर्तनशील अनुपात अनुसूची (Variable Ratio Schedule) को सबसे शक्तिशाली और जुए जैसी प्रतिक्रिया उत्पन्न करने वाली अनुसूची माना जाता है क्योंकि इसमें पुरस्कार मिलने की अनिश्चितता बनी रहती है। कक्षा-कक्ष शिक्षण में छात्रों को सकारात्मक पुनर्बलन (Positive Reinforcement) देना जैसे शाबाशी देना या प्रशंसा करना उनके अधिगम स्तर को तीव्र करता है, जबकि नकारात्मक पुनर्बलन अप्रिय उत्तेजनाओं से बचाता है। इन अवधारणाओं को समझकर अभ्यर्थी परीक्षा में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त कर सकते हैं।