पियाजे के अनुसार, 'वस्तु स्थायित्व' (Object Permanence) का विकास कब होता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'वस्तु स्थायित्व' (Object Permanence) का विकास मुख्य रूप से संवेदी-पेशीय अवस्था (Sensorimotor Stage) के दौरान होता है, जो जन्म से लगभग 2 वर्ष की आयु तक चलती है। वस्तु स्थायित्व वह मानसिक योग्यता है जिसके माध्यम से शिशु यह समझता है कि वस्तुएं तब भी अस्तित्व में रहती हैं जब वे उसकी दृष्टि, श्रवण या स्पर्श से ओझल हो जाती हैं। पियाजे के अनुसार, इस क्षमता का क्रमिक उदय संवेदी-पेशीय उप-चरणों में होता है, और लगभग 8 से 12 महीने की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते बच्चे छिपी हुई वस्तु को खोजना शुरू कर देते हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि उनके मस्तिष्क में वस्तु का मानसिक बिंब या स्थायित्व स्थायी रूप से स्थापित हो चुका है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- संवेदी-पेशीय अवस्था (विकल्प a): जन्म से 2 वर्ष, जिसमें बच्चा अपनी इंद्रियों और मोटर गतिविधियों के माध्यम से दुनिया को सीखता है और वस्तु स्थायित्व विकसित करता है।
- पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (विकल्प b): 2 से 7 वर्ष, जिसमें प्रतीकात्मक सोच और भाषा का विकास होता है लेकिन तार्किक संरक्षण का अभाव होता है।
- मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (विकल्प c): 7 से 11 वर्ष, जिसमें मूर्त वस्तुओं पर तार्किक संक्रियाएं और वर्गीकरण की क्षमता आती है।
- औपचारिक अवस्था (विकल्प d): 11 वर्ष और उससे आगे, जिसमें अमूर्त चिंतन, निगमनात्मक तर्क और उच्च स्तरीय समस्या समाधान कौशल विकसित होते हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के चरण बाल विकास मनोविज्ञान की आधारशिला हैं। वस्तु स्थायित्व इस सिद्धांत की सबसे महत्वपूर्ण मील का पत्थर अवधारणा है। अधिक जानकारी के लिए जीन पियाजे का सिद्धांत पढ़ें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
सीटेट (CTET) और अन्य राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में जीन पियाजे के चरणों से बार-बार प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि 'वस्तु स्थायित्व' संवेदी-पेशीय अवस्था की सबसे बड़ी उपलब्धि है। यदि बच्चा खिलौना छिपाने पर रोता नहीं है या उसे भूल जाता है, तो वस्तु स्थायित्व विकसित नहीं हुआ है; लेकिन यदि वह ढूंढने का प्रयास करता है, तो यह क्षमता विकसित हो चुकी है। यह प्रश्न प्रायः अवधारणात्मक समझ को परखने के लिए घुमाकर पूछा जाता है, अतः अवस्थाओं की आयु सीमा और उनकी मुख्य विशेषताओं (जैसे स्कीमा, आत्मकेंद्रित सोच, संरक्षण आदि) को स्पष्ट रूप से याद रखना अत्यंत आवश्यक है।