युग्म तुलनात्मक निर्णय विधि (Paired Comparison Method) के प्रतिपादक कौन हैं?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
युग्म तुलनात्मक निर्णय विधि (Paired Comparison Method) के प्रतिपादक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक एल. एल. थर्स्टन (L.L. Thurstone) हैं। इस मनोवैज्ञानिक और मनोमितीय (Psychometric) तकनीक का विकास थर्स्टन ने 1927 में किया था। इस विधि का मुख्य उद्देश्य गुणात्मक चरों, मनोवृत्तियों, मूल्यों और पसंद को मात्रात्मक (Quantitative) पैमाने पर मापना है। इस प्रक्रिया में, व्यक्तियों के सामने दो-दो उत्तेजनाओं (Stimuli) का युग्म प्रस्तुत किया जाता है और उन्हें प्रत्येक युग्म में से बेहतर या अधिक पसंद की जाने वाली उत्तेजना का चयन करने के लिए कहा जाता है। इसके आधार पर थर्स्टन ने 'तुलनात्मक निर्णय का नियम' (Law of Comparative Judgment) प्रतिपादित किया, जो मनोवृत्ति मापन में एक क्रांतिकारी कदम माना जाता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- एल. एल. थर्स्टन ने बुद्धि के क्षेत्र में 'समूह कारक सिद्धांत' (Group Factor Theory) और मनोवृत्ति मापन के लिए थर्स्टन स्केल का भी प्रतिपादन किया है।
- स्पीयरमैन ने बुद्धि का 'द्विकारक सिद्धांत' (Two-Factor Theory) दिया जिसमें सामान्य कारक (G-factor) और विशिष्ट कारक (S-factor) शामिल हैं।
- अल्फ्रेड बिने को आधुनिक बुद्धि परीक्षण (Intelligence Testing) का जनक माना जाता है जिन्होंने 1905 में पहला बुद्धि परीक्षण विकसित किया था।
- थॉमसन ने बुद्धि का 'प्रतिदर्श सिद्धांत' (Sampling Theory) प्रस्तुत किया था, जो स्पीयरमैन के सिद्धांत का खंडन करता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शैक्षिक मनोविज्ञान और मनोमिति (Psychometrics) में मनोवैज्ञानिक परीक्षणों और मापन विधियों का विशेष स्थान है। एल. एल. थर्स्टन की युग्म तुलनात्मक निर्णय विधि यह दर्शाती है कि कैसे मानवीय निर्णयों और प्राथमिकताओं को वैज्ञानिक रूप से क्रमित किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए बुद्धि के सिद्धांत और मनोवैज्ञानिक परीक्षण के अध्यायों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, REET और BPSC TRE) में मनोवैज्ञानिकों के नाम और उनके द्वारा प्रतिपादित विधियों या सिद्धांतों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। युग्म तुलनात्मक निर्णय विधि से जुड़े प्रश्न अक्सर थर्स्टन के मनोमिति योगदान पर केंद्रित होते हैं। परीक्षार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि थर्स्टन ने न केवल बुद्धि बल्कि मनोवृत्ति (Attitude) मापन में भी अभूतपूर्व योगदान दिया है। थर्स्टन के 'लॉ ऑफ कम्परेटिव जजमेंट' को समझकर विद्यार्थी विभिन्न मनोवैज्ञानिक चरों के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से पहचान सकते हैं। इस प्रकार के तथ्यात्मक प्रश्न सीधे अंकों में बढ़त दिलाते हैं।