क्रमबद्ध अन्तराल विधि (Method of Equal Appearing Intervals) के प्रतिपादक कौन हैं?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
क्रमबद्ध अन्तराल विधि (Method of Equal Appearing Intervals) के प्रतिपादक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक एल. एल. थर्स्टन (L.L. Thurstone) हैं। मनोमिति (Psychometrics) और मनोवृत्ति मापन (Attitude Measurement) के क्षेत्र में थर्स्टन का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। थर्स्टन द्वारा विकसित यह विधि मुख्य रूप से सामाजिक मनोवृत्तियों, मूल्यों और दृष्टिकोणों को मापने के लिए उपयोग की जाती है। इस विधि में विभिन्न कथनों या उद्दीपकों को एक क्रमबद्ध पैमाने पर इस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है कि उत्तरदाताओं को उनके बीच के अंतराल समान प्रतीत हों। यह मापनी (Scale) मनोमिति के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई है, जिससे मनोवैज्ञानिक और शैक्षिक अनुसंधानों में मात्रात्मक विश्लेषण अधिक सुगम और वैज्ञानिक हो गया।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- थर्स्टन का योगदान: एल. एल. थर्स्टन ने मनोवृत्ति मापने के लिए थर्स्टन स्केल (Thurstone Scale) का निर्माण किया, जिसमें सम-प्रतीत होने वाले अंतराल विधि का मुख्य प्रयोग होता है।
- विकल्प 'b' का विश्लेषण: थर्स्टन और चेव (Thurstone and Chave) ने मिलकर 1929 में 'चर्च के प्रति मनोवृत्ति' (Attitude Toward Church) मापने हेतु इसी विधि का प्रायोगिक रूप से पहली बार व्यापक उपयोग किया था, परंतु इस मूल विधि के सैद्धांतिक प्रतिपादक अकेले थर्स्टन ही माने जाते हैं।
- अन्य विकल्प: पोंपोनोजी एक दार्शनिक थे और थॉमसन बुद्धि के बहु-कारक या समूह कारक सिद्धांतों से संबंधित हैं, जिनका इस विधि से सीधा संबंध नहीं है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: मनोमिति और शैक्षिक अनुसंधान में थर्स्टन का मनोवृत्ति मापन सिद्धांत एक केंद्रीय विषय है। अधिक जानकारी के लिए आप बाल विकास एवं मनोविज्ञान अध्ययन के अंतर्गत अनुसंधान विधियों के अनुभाग का संदर्भ ले सकते हैं।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, और BPSC TRE) में मनोवैज्ञानिकों और उनके द्वारा प्रतिपादित विधियों, परीक्षणों और पैमानों से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। 'क्रमबद्ध अन्तराल विधि' मनोवृत्ति (Attitude) के आंकलन की एक प्रतिष्ठित तकनीक है। इसमें विभिन्न न्यायकर्ताओं (Judges) की सहायता से बयानों को 1 से 11 के पैमाने पर वर्गीकृत किया जाता है। परीक्षार्थियों को याद रखना चाहिए कि जहाँ थर्स्टन ने इस विधि की रूपरेखा तैयार की, वहीं थर्स्टन और चेव ने मिलकर इस पर पहला व्यावहारिक प्रयोग किया था। इस प्रकार के तथ्यात्मक प्रश्न शिक्षक भर्ती परीक्षा में मेरिट तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।