बुद्धि इकाई का सिद्धांत किसने दिया?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
बुद्धि की इकाई का सिद्धांत (Unit Theory of Intelligence) विलियम स्टर्न (William Stern) और जॉनसन (Johnson) द्वारा प्रतिपादित किया गया था। इस सिद्धांत के अनुसार बुद्धि एक अखंड इकाई या संपूर्ण शक्ति के रूप में कार्य करती है, जो व्यक्ति के समस्त मानसिक कार्यों को नियंत्रित करती है। इसका अर्थ यह है कि व्यक्ति की बुद्धि में विभिन्न योग्यताओं का पृथक्करण संभव नहीं है, बल्कि यह एक एकीकृत और अविभाज्य क्षमता है जो हर परिस्थिति में समग्र रूप से प्रकट होती है। बाल विकास और मनोविज्ञान में बुद्धि के विभिन्न स्वरूपों का अध्ययन करते समय इस एकात्मक सिद्धांत का विशेष महत्व है, जो यह दर्शाता है कि बुद्धि किसी एक विशिष्ट क्षेत्र तक सीमित न रहकर संपूर्ण व्यक्तित्व को प्रभावित करती है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- बुद्धि के एकात्मक सिद्धांत या इकाई सिद्धांत के प्रमुख प्रतिपादक स्टर्न और जॉनसन माने जाते हैं।
- स्पीयरमैन ने बुद्धि का 'द्विकारक सिद्धांत' (Two-Factor Theory) दिया था, जिसमें सामान्य (g) और विशिष्ट (s) कारक शामिल हैं।
- विलियम स्टर्न ने बुद्धि लब्धि (IQ) की अवधारणा और उसके सूत्र को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
- विकल्पों का विश्लेषण: स्पीयरमैन, हैब और विलियम स्टर्न के अन्य सिद्धांत हैं, अतः 'स्टर्न एवं जॉनसन' इस प्रश्न का सही उत्तर है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास में बुद्धि के स्वरूप को समझने के लिए विभिन्न मनोवैज्ञानिकों ने अपने सिद्धांत दिए हैं। इकाई सिद्धांत बुद्धि की अखंडता पर बल देता है। अधिक जानकारी के लिए बुद्धि के सिद्धांत और बाल विकास एवं मनोविज्ञान के लेखों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, HTET) में बुद्धि के सिद्धांतों से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। परीक्षार्थियों को एकात्मक सिद्धांत (Unit Theory), द्विकारक सिद्धांत (Two-factor Theory), और बहुबुद्धि सिद्धांत (Multiple Intelligence Theory) के प्रणेताओं के नाम स्पष्ट रूप से याद होने चाहिए। स्टर्न और जॉनसन का इकाई सिद्धांत यह मानता है कि बुद्धि एक संपूर्ण इकाई है, जो विद्यार्थियों की शिक्षण और अधिगम प्रक्रिया को समग्र रूप से प्रभावित करती है। कक्षा कक्ष में शिक्षण योजना बनाते समय अध्यापकों को बालकों की इस समग्र क्षमता का ध्यान रखना चाहिए ताकि विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से उनके बौद्धिक विकास को संतुलित दिशा दी जा सके।