सीखने की प्रक्रिया में 'पठार' (Learning Plateau) का मुख्य मनोवैज्ञानिक कारण क्या है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
सीखने की प्रक्रिया में 'पठार' (Learning Plateau) एक ऐसा चरण या स्थिति है जहाँ अधिगम की गति पूरी तरह रुक जाती है और रेखा ग्राफ में कोई प्रगति नहीं दिखाई देती, बल्कि वह सपाट (Flat) हो जाती है। जब बच्चा या अधिगमकर्ता किसी कार्य को लगातार सीखता है, तो शुरुआत में तीव्र गति होती है, लेकिन एक निश्चित बिंदु पर आकर थकान, रुचि की समाप्ति, या प्रेरणा के अभाव के कारण प्रगति अवरुद्ध हो जाती है। यहाँ सही उत्तर 'अभिप्रेरणा की कमी' है क्योंकि यह प्रत्यक्ष रूप से शिक्षार्थी के आंतरिक और बाह्य मनोवैज्ञानिक कारकों से जुड़ा होता है। जब छात्र को उचित प्रोत्साहन नहीं मिलता, तो उसका सीखने का ग्राफ नीचे गिरने या स्थिर होने लगता है, जिसे मनोवैज्ञानिक भाषा में सीखने का पठार कहा जाता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- अधिगम वक्र (Learning Curve) में पठार एक सामान्य घटना है जो विभिन्न चरणों में आती है।
- मनोवैज्ञानिक कारण: रुचि की कमी, थकान, प्रेरणा का अभाव, जटिल मानसिक स्थिति और गलत शिक्षण आदतें।
- भौतिक कारण: खराब वातावरण, प्रकाश की कमी, और पुरानी शिक्षण सामग्रियां।
- विकल्प (a) सीखने की जटिलता और (c) पाठ्यक्रम का लंबा होना भी बाधा बन सकते हैं, लेकिन मुख्य मनोवैज्ञानिक कारक अभिप्रेरणा का अभाव है।
- विकल्प (d) अच्छी शिक्षण विधि पठार को दूर करने में सहायक होती है, न कि इसका कारण बनती है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: थार्नडाइक, स्किनर और गैने के अधिगम सिद्धांतों के अनुसार, प्रेरणा (Motivation) अधिगम का राजमार्ग है। जब यह राजमार्ग बाधित होता है, तो पठार का निर्माण होता है। अधिक जानने के लिए अधिगम प्रक्रिया और सिद्धांत पर क्लिक करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:ः
सीखने के पठार से संबंधित प्रश्न अक्सर CTET और अन्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। शिक्षकों को कक्षा कक्ष में ऐसे उपाय करने चाहिए जिससे विद्यार्थियों में उत्साह बना रहे। नवीन शिक्षण विधियों, टीएलएम (TLM) और पुनर्बलन (Reinforcement) का प्रयोग करके इस पठार को तोड़ा जा सकता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि पठार का अर्थ अधिगम का अंत नहीं, बल्कि क्षमता का अस्थायी ठहराव है।