प्रतिस्थापक का सिद्धांत (Substitution Theory) किसने दिया?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
प्रतिस्थापक का सिद्धांत (Substitution Theory) रूसी शरीर विज्ञानी इवान पेट्रोविच पावलाव (Ivan Petrovich Pavlov) द्वारा प्रतिपादित शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत (Classical Conditioning Theory) से गहराई से जुड़ा हुआ है। पावलाव के अनुसार, सीखने की प्रक्रिया में उद्दीपक (Stimulus) का प्रतिस्थापन एक केंद्रीय भूमिका निभाता है। जब स्वाभाविक उद्दीपक (Unconditioned Stimulus - US जैसे भोजन) के साथ बार-बार अस्वाभाविक या कृत्रिम उद्दीपक (Conditioned Stimulus - CS जैसे घंटी की आवाज़) को प्रस्तुत किया जाता है, तो अंततः कृत्रिम उद्दीपक स्वाभाविक उद्दीपक का स्थान ले लेता है। इसे ही उद्दीपक का प्रतिस्थापन कहा जाता है, जहाँ प्रतिक्रिया (Response) वही रहती है परंतु उसे उत्पन्न करने वाला उद्दीपक बदल जाता है। इसलिए, विकल्प (a) इस प्रश्न का पूर्णतः सही और अकादमिक रूप से सत्यापित उत्तर है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- पावलाव का प्रयोग: पावलाव ने कुत्ते की लार ग्रंथि पर प्रयोग करके यह सिद्ध किया कि अनुबंधन के माध्यम से अस्वाभाविक उद्दीपक स्वाभाविक उद्दीपक का प्रतिस्थापन कर सकता है।
- स्पीयरमैन (Spearman): इन्होंने बुद्धि का द्विकारक सिद्धांत (Two-Factor Theory - G and S Factor) दिया था, जिनका प्रतिस्थापक से कोई संबंध नहीं है।
- सी. एल. हल (C. L. Hull): इन्होंने पुनर्बलन का मात्रात्मक सिद्धांत (Drive Reduction Theory of Learning) प्रतिपादित किया था।
- कुर्त लेविन (Kurt Lewin): इन्होंने क्षेत्र सिद्धांत (Field Theory of Learning) का प्रतिपादन किया था, जिसके अनुसार व्यवहार व्यक्ति और वातावरण का फलन होता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शिक्षा मनोविज्ञान में अधिगम के शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत को इवान पावलाव का सिद्धांत के अंतर्गत पढ़ाया जाता है, जो आदत निर्माण, भय के निवारण और भाषा सीखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, HTET) में अधिगम सिद्धांतों के वैकल्पिक नामों से लगातार प्रश्न पूछे जाते हैं। शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत को 'प्रतिस्थापक अनुबंधन' (Type S Conditioning) भी कहा जाता है क्योंकि इसमें उद्दीपक (Stimulus) का प्रतिस्थापन मुख्य होता है। कक्षा कक्ष शिक्षण में बालकों में अनुशासन स्थापित करने, अच्छी आदतें विकसित करने तथा विभिन्न विषयों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण पैदा करने में पावलाव के इस सिद्धांत की महत्ता सर्वोपरि है। अध्यापकों को चाहिए कि वे शिक्षण अधिगम प्रक्रिया के दौरान सकारात्मक उद्दीपकों का प्रतिस्थापन करें ताकि छात्र स्वाभाविक रूप से सीखने के लिए प्रेरित हो सकें। ऐसे तथ्यात्मक और संकल्पना आधारित प्रश्नों को हल करने के लिए विभिन्न मनोवैज्ञानिकों के सिद्धांतों के उपनामों (Alternative Names) की तालिका का गहन अध्ययन करना अनिवार्य है।