गेस्टाल्टवाद (Gestalt) सम्प्रदाय के जनक कौन हैं?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
गेस्टाल्ट (Gestalt) मनोविज्ञान की स्थापना 20वीं शताब्दी की शुरुआत (लगभग 1912) में जर्मनी में हुई थी। 'गेस्टाल्ट' एक जर्मन शब्द है जिसका अर्थ 'समग्र' (Whole) या 'पूर्णाकार' होता है। इस संप्रदाय के मुख्य प्रणेता मैक्स वर्दीमर (Max Wertheimer) थे, तथा उनके सहकर्मी वुल्फगांग कोहलर (Wolfgang Kohler) और कुर्ट कोफ्का (Kurt Koffka) इसके सह-संस्थापक थे। इस सिद्धांत का मूल मंत्र है कि "संपूर्ण वस्तु उसके भागों के योग से अधिक होती है" (The whole is greater than the sum of its parts)। शिक्षण और अधिगम के क्षेत्र में इस संप्रदाय ने अंतर्दृष्टि या सूझ के सिद्धांत (Insight Learning) को जन्म दिया, जो रटने की प्रवृत्ति का विरोध करता है और समझ पर जोर देता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- मैक्स वर्दीमर को गेस्टाल्ट मनोविज्ञान का जनक माना जाता है, जबकि कोहलर और कोफ्का ने इसे आगे बढ़ाया।
- कोहलर ने चिम्पांजी (सुल्तान) पर प्रयोग कर 'अंतर्दृष्टि अधिगम' (Insight Learning) का सिद्धांत प्रतिपादित किया।
- विकल्प (a) पोंपोनोजी मनोविज्ञान को दर्शनशास्त्र से अलग करने और चेतना के अध्ययन से जुड़े हैं। विकल्प (b) स्पीयरमैन बुद्धि के 'द्वि-कारक सिद्धांत' (Two-Factor Theory) से संबंधित हैं। विकल्प (c) अल्फ्रेड बिने प्रथम बुद्धि परीक्षण के निर्माण के लिए जाने जाते हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: गेस्टाल्ट मनोविज्ञान प्रत्यक्षज्ञान (Perception) और संज्ञानात्मक विकास पर बल देता है। यह इस बात पर ध्यान केंद्रित करता है कि मानव मस्तिष्क किस प्रकार बिखरी हुई संवेदी सूचनाओं को एक सार्थक पैटर्न या समग्र रूप में व्यवस्थित करता है। अधिक जानकारी के लिए अधिगम के सिद्धांत और संज्ञानात्मक विकास के पृष्ठों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS) में गेस्टाल्टवादियों से जुड़े प्रश्न अक्सर प्रत्यक्ष या अनुप्रयोग आधारित होते हैं। प्रश्न पूछा जा सकता है कि समस्या समाधान के दौरान अचानक आने वाले समाधान (Eureka moment) का संबंध किस सिद्धांत से है, जिसका उत्तर 'अंतर्दृष्टि का सिद्धांत' है। कक्षा शिक्षण में छात्रों को अंश से संपूर्ण (Part to Whole) या संपूर्ण से अंश (Whole to Part) विधि से सिखाने में गेस्टाल्ट दृष्टिकोण अत्यधिक उपयोगी सिद्ध होता है। परीक्षार्थियों को याद रखना चाहिए कि वर्दीमर, कोहलर और कोफ्का तीनों इस आंदोलन के त्रिमूर्ति (Trinity) कहे जाते हैं।