पुनरावृत्ति (Recapitulation) का सिद्धांत किसने दिया?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
पुनरावृत्ति का सिद्धांत (Recapitulation Theory) अमेरिकी मनोवैज्ञानिक जी. स्टेनले हॉल (G. Stanley Hall) द्वारा प्रतिपादित किया गया था। इस प्रसिद्ध सिद्धांत के अनुसार, व्यक्तिगत विकास (Ontogeny) नस्लीय या जातियों के विकास (Phylogeny) की पुनरावृत्ति करता है। इसका मतलब यह है कि एक बच्चे का विकास भ्रूण अवस्था से लेकर वयस्कता तक ठीक उसी क्रम से गुजरता है जिस क्रम से मानव जाति ने आदिम अवस्था से आधुनिक सभ्यता तक का विकास किया है। स्टेनले हॉल को बाल मनोविज्ञान (Child Psychology) और किशोरावस्था अध्ययन (Adolescent Psychology) का जनक भी माना जाता है। उनके इस सिद्धांत ने शिक्षाशास्त्र और विकासात्मक मनोविज्ञान को गहराई से प्रभावित किया, क्योंकि यह इस बात पर जोर देता है कि बच्चे की जैविक और मनोवैज्ञानिक अवस्थाएं उसकी क्रमिक विकास यात्रा का परिणाम हैं। इसलिए, विकल्प (c) इस प्रश्न का सही और सटीक उत्तर है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- जी. स्टेनले हॉल: इन्हें किशोरावस्था को 'तूफान और तनाव की अवस्था' (Storm and Stress) कहने के लिए भी जाना जाता है।
- हर्मन एबिंगहॉस: इन्होंने अधिगम और स्मरण शक्ति पर महत्वपूर्ण कार्य किया तथा 'विस्मरण वक्र' (Forgetting Curve) का प्रतिपादन किया।
- जीन पियाजे: इन्होंने बच्चों में बौद्धिक विकास को समझाने के लिए 'संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत' (Cognitive Development Theory) दिया।
- एरिक एरिक्सन: इन्होंने जीवनभर चलने वाले 'मनोसामाजिक विकास का सिद्धांत' (Psychosocial Development Theory) का प्रतिपादन किया।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: विकासात्मक मनोविज्ञान के अंतर्गत स्टेनले हॉल का पुनरावृत्ति सिद्धांत जैविक विकास और मानव विज्ञान के बीच की कड़ी को स्पष्ट करता है। इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए आप बाल विकास के सिद्धांत और किशोरावस्था मनोविज्ञान के अध्यायों का अध्ययन कर सकते हैं।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, और BPSC TRE) में मनोवैज्ञानिकों और उनके सिद्धांतों से जुड़े प्रश्न सीधे तौर पर पूछे जाते हैं। पुनरावृत्ति सिद्धांत से जुड़े प्रश्न अक्सर मिलान करने वाले प्रश्नों (Matching questions) या स्टेटमेंट आधारित प्रश्नों में देखे जाते हैं। अभ्यर्थियों को याद रखना चाहिए कि स्टेनले हॉल ने न केवल किशोरावस्था को परिभाषित किया, बल्कि बाल अध्ययन आंदोलन (Child Study Movement) की भी शुरुआत की थी। इस प्रकार के वैचारिक प्रश्नों को हल करते समय विभिन्न मनोवैज्ञानिकों के प्रमुख योगदानों को आपस में जोड़कर देखना चाहिए ताकि परीक्षा भवन में भ्रम की स्थिति से बचा जा सके।