डाल्टन विधि के प्रतिपादक कौन हैं?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
डाल्टन विधि (Dalton Plan) शिक्षा की एक अत्यंत लोकप्रिय और बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धति है, जिसके प्रतिपादक मिस हेलेन पार्कहर्स्ट (Helen Parkhurst) हैं। यह विधि मुख्य रूप से अमेरिका के मैसाचुसेट्स के डाल्टन शहर में विकसित की गई थी। इस शिक्षण प्रणाली का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक व्याख्यान विधि और रटन विद्या को समाप्त करके छात्र-केंद्रित, स्वतंत्रता और व्यक्तिगत भिन्नता पर आधारित अधिगम का माहौल तैयार करना है। इस विधि के तहत पारंपरिक कक्षाओं और निश्चित समय सारणी (Time Table) को समाप्त किया जाता है, जिसके स्थान पर विद्यार्थियों को उनकी अपनी गति (Pace) से सीखने की पूरी स्वतंत्रता दी जाती है। शिक्षक केवल एक मार्गदर्शक या सलाहकार की भूमिका निभाते हैं, जबकि छात्र प्रयोगशालाओं या कार्य-कक्षों (Laboratories) में अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार स्वतंत्र रूप से अध्ययन करते हैं। यह विधि बाल मनोविज्ञान के नियमों का पूर्ण पालन करती है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- व्यक्तिगत विभिन्नता: यह विधि प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत योग्यताओं और क्षमताओं को स्वीकार करती है और उन्हें अपनी गति से आगे बढ़ने का अवसर देती है।
- स्वतंत्रता का सिद्धांत: छात्र अपनी मर्जी के विषय और कार्य का चयन करने के लिए स्वतंत्र होते हैं, जिससे उनमें उत्तरदायित्व की भावना विकसित होती है।
- विकल्प विश्लेषण: पोंपोनोजी (Pomponazzi) दार्शनिक थे, स्पीयरमैन (Spearman) ने बुद्धि का द्विकारक सिद्धांत दिया था, और अल्फ्रेड बिने (Alfred Binet) प्रथम बुद्धि परीक्षण से संबंधित हैं। अतः विकल्प 'd' सही है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: डाल्टन योजना प्रगतिशील शिक्षा (Progressive Education) और बाल-केंद्रित शिक्षा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो करके सीखने (Learning by Doing) और सामाजिक सहयोग पर जोर देती है।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, HTET) में विभिन्न शिक्षण पद्धतियों और उनके प्रतिपादकों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। डाल्टन योजना में अनुबंध (Contract System) प्रणाली का प्रयोग किया जाता है, जहाँ छात्र एक निश्चित कार्य को पूरा करने की जिम्मेदारी लेते हैं। यह प्रणाली छात्रों में स्वावलंबन, सामाजिकता और आत्मानुशासन जैसे गुणों का विकास करती है। शिक्षकों को आधुनिक समावेशी कक्षाओं में इस प्रकार की छात्र-केंद्रित रणनीतियों का समावेश करना चाहिए ताकि प्रत्येक बालक अपनी विशिष्ट अधिगम शैली के अनुसार सर्वोत्तम विकास प्राप्त कर सके।