प्रबलन/पुनर्बलन सिद्धांत (1915) के प्रतिपादक कौन हैं?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
प्रबलन या पुनर्बलन सिद्धांत (Reinforcement Theory) के प्रतिपादक क्लार्क एल. हल (C.L. Hull) हैं। इस सिद्धांत को 'नियो-व्यवहारवाद' और 'अंतर्नोद न्यूनीकरण सिद्धांत' (Drive Reduction Theory) के रूप में भी जाना जाता है। हल के अनुसार, जीवों की जैविक आवश्यकताएं (Needs) उनके शरीर में अंतर्नोद (Drive) उत्पन्न करती हैं, जिससे उत्पन्न तनाव को कम करने के लिए व्यवहार प्रेरित होता है। पुनर्बलन इस प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभाता है क्योंकि यह आदत के निर्माण (Habit Formation) और प्राणी की अनुक्रियाओं को मजबूत करने का कार्य करता है। शिक्षा के क्षेत्र में इस सिद्धांत का उपयोग विद्यार्थियों को प्रेरित करने, शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाने और सकारात्मक सुदृढ़ीकरण के माध्यम से उचित आदतों के निर्माण के लिए किया जाता है। अतः विकल्प (d) बिल्कुल सही उत्तर है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- क्लार्क एल. हल ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'प्रिंसिपल्स ऑफ बिहेवियर' (Principles of Behavior) में गणितीय और निगमनात्मक प्रणाली के माध्यम से अधिगम को स्पष्ट किया।
- अन्य विकल्पों का विश्लेषण: पोंपोनोजी मनोविज्ञान के प्रारंभिक दार्शनिक इतिहास से जुड़े हैं; स्पीयरमैन ने बुद्धि का द्विकारक सिद्धांत (Two-Factor Theory) प्रतिपादित किया था; अल्फ्रेड बिने को आधुनिक बुद्धि परीक्षण (Intelligence Testing) का जनक माना जाता है।
- यह सिद्धांत स्किनर के ऑपरेंट कंडीशनिंग और थॉर्नडाइक के प्रभाव के नियम (Law of Effect) से गहरा संबंध रखता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: हल का सिद्धांत बाल विकास में प्रेरणा और अधिगम की प्रक्रिया को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अधिक जानकारी के लिए अधिगम के सिद्धांत और प्रेरणा और पुनर्बलन के लेखों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, REET) में अक्सर मनोवैज्ञानिकों और उनके सिद्धांतों के मिलान से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। क्लार्क हल का अंतर्नोद न्यूनीकरण सिद्धांत यह सिखाता है कि कक्षा कक्ष में विद्यार्थियों की आंतरिक प्रेरणा (Intrinsic Motivation) और जैविक तथा मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं को समझना क्यों आवश्यक है। यदि शिक्षक छात्रों को समय पर सकारात्मक पुनर्बलन (Positive Reinforcement) प्रदान करते हैं, तो उनकी सीखने की गति और सटीकता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। इस प्रकार के तथ्यात्मक प्रश्नों को हल करने के लिए प्रमुख मनोवैज्ञानिकों के नाम और उनके सिद्धांतों के वैकल्पिक नामों को याद रखना अत्यंत लाभप्रद होता है।