अन्तर्दृष्टि/सूझ सिद्धांत (1912) के प्रतिपादक कौन हैं?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
अन्तर्दृष्टि या सूझ का सिद्धांत (Insight Theory of Learning) वर्ष 1912 में गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिकों (Gestalt Psychologists) द्वारा प्रतिपादित किया गया था, जिसमें वुल्फगैंग कोहलर (Wolfgang Kohler) का नाम सबसे प्रमुख रूप से लिया जाता है। इस सिद्धांत के अनुसार, सीखना किसी यांत्रिक प्रक्रिया या केवल प्रयत्न और भूल (Trial and Error) का परिणाम नहीं है, बल्कि यह स्थिति को समग्र रूप से देखने और अचानक से समस्या का समाधान पा लेने (अन्तर्दृष्टि) पर आधारित होता है। कोहलर ने चिम्पैंजी 'सुल्तान' पर प्रयोग करके यह सिद्ध किया कि प्राणी अपनी मानसिक क्षमताओं का उपयोग करके सम्पूर्ण परिस्थिति का आकलन करता है और अचानक उसके मस्तिष्क में समाधान की चमक उत्पन्न होती है। गेस्टाल्टवादी इस बात पर जोर देते हैं कि 'सम्पूर्णता अंगों के योग से अधिक होती है', जिसका सीधा अर्थ यह है कि बालक किसी भी पाठ्यवस्तु या समस्या को टुकड़ों में सीखने के बजाय समग्र रूप से अधिक प्रभावशाली ढंग से समझता है और अपनी संज्ञानात्मक क्षमताओं का पूर्ण उपयोग करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- अन्तर्दृष्टि सिद्धांत के मुख्य प्रतिपादक कोहलर हैं, जबकि इसके समर्थकों में कोफ्का (Koffka) और वर्दीमर (Wertheimer) भी शामिल हैं।
- यह सिद्धांत गेस्टाल्ट मनोविज्ञान (Gestalt Psychology) पर आधारित है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'समग्र रूप' या 'आकार' होता है।
- विकल्प (b) बी.एफ. स्किनर क्रियाप्रसूत अनुबंधन (Operant Conditioning) सिद्धांत से संबंधित हैं।
- विकल्प (c) एरिक्सन मनोसामाजिक विकास (Psychosocial Development) के सिद्धांत के लिए जाने जाते हैं।
- विकल्प (d) जॉन ड्यूवी प्रगतिशील शिक्षा (Progressive Education) और 'करके सीखने' (Learning by Doing) के प्रणेता हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: गेस्टाल्ट मनोविज्ञान अधिगम के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है जहाँ मानसिक संगठन और सूझबूझ को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है। इस विषय में अधिक जानकारी के लिए गेस्टाल्ट मनोविज्ञान और अधिगम सिद्धांत का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में गेस्टाल्टवादियों से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। कोहलर का सूझ का सिद्धांत कक्षा शिक्षण में रटने की प्रवृत्ति को हतोत्साहित करता है और समस्या-समाधान (Problem Solving) पद्धति को बढ़ावा देता है। जब शिक्षक विद्यार्थियों के सामने कोई समस्या इस प्रकार प्रस्तुत करते हैं कि वे उसके सभी पहलुओं को एक साथ देख सकें, तो बच्चों में 'अन्तर्दृष्टि' का विकास तेजी से होता है। गणित और विज्ञान जैसे विषयों में जहाँ तार्किक चिंतन और रचनात्मकता की आवश्यकता होती है, वहाँ यह सिद्धांत अत्यधिक उपयोगी सिद्ध होता है। परीक्षार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि थार्नडाइक का 'प्रयत्न और भूल' सिद्धांत यांत्रिक है, जबकि कोहलर का सिद्धांत बौद्धिक और संज्ञानात्मक दृष्टि से श्रेष्ठ माना जाता है।