साहचर्य सिद्धांत (Associationism) के प्रतिपादक कौन हैं?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
साहचर्यवाद (Associationism) मनोविज्ञान का एक ऐसा दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण है जो यह मानता है कि मानसिक प्रक्रियाएं और विचार विचारों, संवेदनाओं या अनुभवों के बीच आपसी साहचर्य (association) या जुड़ाव के माध्यम से संचालित होते हैं। इस सिद्धांत के मुख्य प्रतिपादक एलेक्जेंडर बैन (Alexander Bain) माने जाते हैं। उन्होंने अपने प्रसिद्ध ग्रंथों 'द सेंसेज एंड द इंटेलेक्ट' (1855) और 'द इमोशंस एंड द विल' (1859) में तंत्रिका तंत्र और मानसिक संघों के बीच के संबंधों का गहन वैज्ञानिक विश्लेषण किया। उनके अनुसार, मस्तिष्क में विचारों का संयोजन पिछली स्मृतियों और अनुभवों के आधार पर होता है, जो अधिगम और व्यवहार परिवर्तन का आधार बनता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- एलेक्जेंडर बैन ने ब्रिटेन में प्रयोगात्मक मनोविज्ञान की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और 'माइंड' पत्रिका की स्थापना में भी योगदान दिया।
- विकल्प (b) हरमन रोर्शा 'धब्बाद परीक्षण' (Inkblot Test) से संबंधित हैं जो व्यक्तित्व मापन का एक प्रसिद्ध प्रक्षेपी तकनीक है।
- विकल्प (c) स्पीयरमैन बुद्धि के 'द्वि-कारक सिद्धांत' (Two-Factor Theory) के लिए जाने जाते हैं।
- विकल्प (d) बी.एफ. स्किनर 'क्रियाप्रसूत अनुबंध' (Operant Conditioning) सिद्धांत के प्रमुख व्यवहारवादी प्रतिपादक हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: साहचर्य सिद्धांत आधुनिक शैक्षिक मनोविज्ञान और व्यवहारवाद के विकास में मील का पत्थर साबित हुआ है। इसके तहत उद्दीपक-अनुक्रिया (S-R) संबंधों की व्याख्या की जाती है। अधिक जानकारी के लिए अधिगम सिद्धांत और मनोवैज्ञानिकों के योगदान के अध्यायों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, HTET) में मनोविज्ञान के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और विभिन्न सिद्धांतों के प्रतिपादकों से संबंधित प्रश्न सीधे पूछे जाते हैं। साहचर्यवाद का यह सिद्धांत थार्नडाइक के सीखने के नियमों (विशेषकर प्रभाव और अभ्यास का नियम) का वैचारिक आधार भी तैयार करता है। परीक्षार्थियों को विभिन्न मनोवैज्ञानिकों और उनके मूल योगदानों की सूची बनाकर याद रखनी चाहिए ताकि इस प्रकार के तथ्यात्मक प्रश्नों को हल करने में कोई कठिनाई न हो।