प्रोजेक्ट प्रणाली से 'करके सीखना' का सिद्धांत किसने दिया?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
प्रोजेक्ट प्रणाली (Project Method) और 'करके सीखना' (Learning by Doing) का मूल सिद्धांत प्रसिद्ध अमेरिकी शिक्षाशास्त्री जॉन ड्यूवी (John Dewey) के प्रगतिशील शिक्षा (Progressive Education) के दर्शन पर आधारित है। हालांकि इस शिक्षण पद्धति को उनके शिष्य विलियम किलपैट्रिक (William Heard Kilpatrick) ने अधिक व्यवस्थित रूप दिया, लेकिन इस पूरी विधि की दार्शनिक आधारशिला जॉन ड्यूवी के व्यावहारिक अनुभववाद (Pragmatism) और 'करके सीखने' के विचार पर ही टिकी हुई है। इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं से रूबरू कराना, उनकी समस्या-समाधान क्षमताओं (Problem-solving skills) का विकास करना और उन्हें कक्षा के सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक दुनिया में लागू करने के लिए सक्षम बनाना है। बाल विकास और शिक्षा शास्त्र (CDP) के अंतर्गत, यह छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण (Student-centered approach) का सर्वोत्तम उदाहरण माना जाता है जहाँ बच्चे निष्क्रिय श्रोता न बनकर सक्रिय ज्ञान निर्माता बनते हैं।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- जॉन ड्यूवी अमेरिका के महान दार्शनिक और शिक्षाविद् थे जिन्होंने 'प्रगतिशील शिक्षा' और 'अनुभवात्मक अधिगम' पर अत्यधिक बल दिया।
- विकल्प (a) अल्बर्ट बाण्डूरा ने सामाजिक अधिगम सिद्धांत (Social Learning Theory) का प्रतिपादन किया, जिसमें अवलोकन (Observation) और अनुकरण की भूमिका होती है।
- विकल्प (b) क्लार्क हल ने अंतर्नाद या पुनर्बलन का सिद्धांत (Drive Reduction Theory of Learning) दिया था।
- विकल्प (c) स्पीयरमैन ने बुद्धि का द्विकारक सिद्धांत (Two-Factor Theory of Intelligence - G and S factors) प्रतिपादित किया था।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास एवं शिक्षण पद्धतियों में जॉन ड्यूवी का योगदान अमूल्य है, जिन्होंने शिक्षा को जीवन की तैयारी नहीं बल्कि खुद जीवन माना। अधिक जानकारी के लिए प्रगतिशील शिक्षा एवं जॉन ड्यूवी के सिद्धांतों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, HTET) में शिक्षण पद्धतियों और उनके प्रवर्तकों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। जब प्रोजेक्ट विधि की बात आती है, तो छात्रों को अक्सर किलपैट्रिक और जॉन ड्यूवी के नामों में भ्रम होता है। याद रखें कि किलपैट्रिक ने प्रोजेक्ट विधि को स्कूल के पाठ्यक्रम में एक निश्चित रूप और पदक्रम प्रदान किया, परंतु इसकी वैचारिक उत्पत्ति जॉन ड्यूवी के 'करके सीखने' के दर्शन से ही हुई थी। परीक्षा में यदि दोनों विकल्प हों और प्रश्न दार्शनिक या सैद्धांतिक जड़ के बारे में हो, तो जॉन ड्यूवी सही उत्तर बनते हैं। कक्षा कक्ष में इस विधि का प्रयोग करने से बच्चों में सहकारिता, लोकतांत्रिक मूल्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होता है, जो समावेशी शिक्षा की मूल भावना के अनुकूल है।