अधिगम अंतरण का 'मूल्यों के अभिज्ञान' का सिद्धांत किसने दिया?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
अधिगम अंतरण (Transfer of Learning) के अंतर्गत 'मूल्यों के अभिज्ञान' या 'आदर्शों का सिद्धांत' (Theory of Ideals / Identification of Values) प्रसिद्ध शिक्षाविद् विलियम बागले (William Bagley) द्वारा प्रतिपादित किया गया था। इस सिद्धांत के अनुसार, पूर्व में सीखे गए ज्ञान, नियमों, सिद्धांतों या आदर्शों का उपयोग नई परिस्थितियों में तभी संभव है जब शिक्षार्थी उन मूल्यों और आदर्शों को भली-भांति पहचान ले और उनका सामान्यीकरण (Generalization) कर सके। बागले का यह मानना था कि केवल सतही ज्ञान का अंतरण प्रभावी नहीं होता, बल्कि जब व्यक्ति सामान्य सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों को समझकर उन्हें अपने आचरण में ढाल लेता है, तब अधिगम का स्थानांतरण उच्च स्तर पर होता है। यह सिद्धांत विशेष रूप से मूल्य-आधारित शिक्षा और नैतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- विलियम बागले ने स्पष्ट किया कि सामान्यीकरण और आदर्शों का अभिज्ञान अधिगम के सकारात्मक अंतरण को अत्यधिक प्रभावी बनाते हैं।
- अन्य विकल्पों का विश्लेषण: स्पीयरमैन ने 'द्विकारक सिद्धांत' (Two-Factor Theory of Intelligence) दिया; अल्फ्रेड बिने ने प्रथम बुद्धि परीक्षण (Binet-Simon Scale) का निर्माण किया; और क्लार्क हल ने 'प्रणोद न्यूनता सिद्धांत' (Drive Reduction Theory of Learning) प्रतिपादित किया।
- यह प्रश्न विभिन्न राज्यों की शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (UPTET, REET, BTET) में अधिगम अंतरण के विभिन्न सिद्धांतों से संबंधित खंड के अंतर्गत अक्सर पूछा जाता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (CDP) में अधिगम अंतरण के कई सिद्धांत हैं जैसे थार्नडाइक का समरूप तत्वों का सिद्धांत, जड़ का सामान्यीकरण का सिद्धांत और बागले का आदर्शों या मूल्यों का सिद्धांत। अधिक जानकारी के लिए अधिगम अंतरण के सिद्धांत को समझें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में 'अधिगम स्थानांतरण' (Transfer of Learning) एक अत्यंत स्कोरिंग विषय है। चूँकि विभिन्न मनोवैज्ञानिकों ने इसके अलग-अलग सिद्धांत दिए हैं, विद्यार्थियों को उनके प्रणेता (Proponents) के नाम स्पष्ट रूप से याद होने चाहिए। विलियम बागले का 'आदर्शों या मूल्यों का सिद्धांत' इस बात पर बल देता है कि कक्षा कक्ष में केवल तथ्यों को रटाना नहीं चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, आदर्शों और सामान्य नियमों की गहरी समझ विकसित करनी चाहिए ताकि वे वास्तविक जीवन की जटिल समस्याओं को हल करते समय उन सीखे गए मूल्यों का समुचित उपयोग (सकारात्मक अंतरण) कर सकें। अध्यापन के दौरान शिक्षकों को वैचारिक स्पष्टता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।