शैक्षिक उद्देश्यों के लिए, श्रवण बाधित शिक्षार्थियों को 4 श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। इनमें से किसकी श्रवण हानि सीमा 71-90 db है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
शैक्षिक और चिकित्सीय उद्देश्यों के लिए श्रवण बाधित (Hearing Impaired) बालकों को उनकी सुनने की क्षमता (Decibels - dB) के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया जाता है। प्रश्न में पूछी गई डेसिबल सीमा 71-90 dB 'गंभीर श्रवण हानि' (Severe Hearing Loss) के अंतर्गत आती है। इस स्तर के बालकों को बिना तीव्र आवर्धन (Amplification) या श्रवण यंत्र (Hearing Aid) के सामान्य बातचीत सुनने में अत्यधिक कठिनाई होती है। समावेशी कक्षा कक्ष में ऐसे शिक्षार्थियों को विशेष रणनीतियों, साइनेज, लिप-रीडिंग और दृश्य सहायक सामग्रियों की आवश्यकता होती है ताकि उनका शैक्षणिक और भाषाई विकास सुगम हो सके।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- हल्की श्रवण हानि (Mild Loss): 26-40 dB तक होती है, जिसमें सामान्य फुसफुसाहट सुनने में थोड़ी परेशानी होती है।
- मध्यम श्रवण हानि (Moderate Loss): 41-70 dB तक होती है, जहाँ सामान्य बातचीत समझने में दिक्कत आती है और श्रवण यंत्र जरूरी होता है।
- गंभीर श्रवण हानि (Severe Loss): 71-90 dB होती है, जिसमें तीव्र ध्वनियाँ ही सुनाई देती हैं और विशेष शिक्षण पद्धतियों की आवश्यकता पड़ती है।
- गहरी या पूर्ण श्रवण हानि (Profound Loss): 91 dB या इससे अधिक होती है, जिसे बधिरता (Deafness) कहा जाता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र में विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों (Children with Special Needs - CWSN) के अंतर्गत श्रवणबाधिता एक महत्वपूर्ण विषय है। अधिक जानकारी के लिए समावेशी शिक्षा के सिद्धांतों और प्रावधानों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
सीटेट (CTET) और अन्य राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में दिव्यांगता श्रेणियों और उनके डेसिबल पैमानों से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। शिक्षकों को यह समझना आवश्यक है कि 71-90 dB की श्रेणी वाले बच्चे गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं, इसलिए उनके बैठने की व्यवस्था आगे की पंक्तियों में होनी चाहिए। मल्टीसेंसरी एप्रोच (Multi-sensory approach) का उपयोग करके ऐसे बच्चों की शैक्षणिक सहभागिता को बढ़ाया जा सकता है। आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम (RPwD Act 2016) के तहत भी श्रवणबाधिता के विभिन्न आयामों को परिभाषित किया गया है, जो बाल मनोविज्ञान और विशेष शिक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।