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अधिगम (सीखना) सभी देखें (1410) अधिगम: अर्थ, प्रकृति एवं प्रकार21 शास्त्रीय अनुबंधन (पावलोव)90 क्रियाप्रसूत अनुबंधन (स्किनर)262 थॉर्नडाइक: प्रयास एवं त्रुटि191 गेस्टाल्ट एवं अंतर्दृष्टि अधिगम284 रचनावाद एवं अन्य अधिगम सिद्धांत44 अधिगम स्थानांतरण, वक्र एवं पठार266 स्मृति एवं विस्मृति123 ध्यान एवं रुचि5 अभिप्रेरणा एवं प्रेरक97 अधिगम शैलियाँ एवं रणनीतियाँ27
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विशेष आवश्यकता वाले बालक (CWSN)
Asked 3 महीने पहले · Viewed 1,545 times
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शैक्षिक उद्देश्यों के लिए, श्रवण बाधित शिक्षार्थियों को 4 श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। इनमें से किसकी श्रवण हानि सीमा 71-90 db है?

Detailed Explanation

📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:

शैक्षिक और चिकित्सीय उद्देश्यों के लिए श्रवण बाधित (Hearing Impaired) बालकों को उनकी सुनने की क्षमता (Decibels - dB) के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया जाता है। प्रश्न में पूछी गई डेसिबल सीमा 71-90 dB 'गंभीर श्रवण हानि' (Severe Hearing Loss) के अंतर्गत आती है। इस स्तर के बालकों को बिना तीव्र आवर्धन (Amplification) या श्रवण यंत्र (Hearing Aid) के सामान्य बातचीत सुनने में अत्यधिक कठिनाई होती है। समावेशी कक्षा कक्ष में ऐसे शिक्षार्थियों को विशेष रणनीतियों, साइनेज, लिप-रीडिंग और दृश्य सहायक सामग्रियों की आवश्यकता होती है ताकि उनका शैक्षणिक और भाषाई विकास सुगम हो सके।

📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:

  • हल्की श्रवण हानि (Mild Loss): 26-40 dB तक होती है, जिसमें सामान्य फुसफुसाहट सुनने में थोड़ी परेशानी होती है।
  • मध्यम श्रवण हानि (Moderate Loss): 41-70 dB तक होती है, जहाँ सामान्य बातचीत समझने में दिक्कत आती है और श्रवण यंत्र जरूरी होता है।
  • गंभीर श्रवण हानि (Severe Loss): 71-90 dB होती है, जिसमें तीव्र ध्वनियाँ ही सुनाई देती हैं और विशेष शिक्षण पद्धतियों की आवश्यकता पड़ती है।
  • गहरी या पूर्ण श्रवण हानि (Profound Loss): 91 dB या इससे अधिक होती है, जिसे बधिरता (Deafness) कहा जाता है।

📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र में विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों (Children with Special Needs - CWSN) के अंतर्गत श्रवणबाधिता एक महत्वपूर्ण विषय है। अधिक जानकारी के लिए समावेशी शिक्षा के सिद्धांतों और प्रावधानों का अध्ययन करें।

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:

सीटेट (CTET) और अन्य राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में दिव्यांगता श्रेणियों और उनके डेसिबल पैमानों से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। शिक्षकों को यह समझना आवश्यक है कि 71-90 dB की श्रेणी वाले बच्चे गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं, इसलिए उनके बैठने की व्यवस्था आगे की पंक्तियों में होनी चाहिए। मल्टीसेंसरी एप्रोच (Multi-sensory approach) का उपयोग करके ऐसे बच्चों की शैक्षणिक सहभागिता को बढ़ाया जा सकता है। आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम (RPwD Act 2016) के तहत भी श्रवणबाधिता के विभिन्न आयामों को परिभाषित किया गया है, जो बाल मनोविज्ञान और विशेष शिक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

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अगला प्रश्न → निम्नलिखित में से कौन सीखने की अक्षमता नहीं है? ← पिछला प्रश्न ब्रेल लिपि के प्रतिपादक कौन हैं?

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→ एक शिक्षक विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के हितों के प्रति निम्न द्वारा प्रतिक्रिया कर सकता है- → कौन-सी प्रक्रिया विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को निश्चित मानक कक्षा में प्रवेश करने की अनुमति देती है, जब वे अपने बाकी साथियों के साथ तालमेल बिठाने की क्षमता दिखाते हैं? → एक शिक्षिका अपनी कक्षा में 'दृष्टिबाधित' छात्रों की आवश्यकताओं को कैसे पूरा कर सकती है? → 'समावेशी शिक्षा और विशिष्ट बालकों के मनोवैज्ञानिक स्वरूप' के संदर्भ में, लुइस ब्रेल (Louis Braille) द्वारा विकसित 'ब्रेल लिपि' (Braille System) के छह-बिंदु कोड मैट्रिक्स (Six-dot Cell Matrix) की स्पर्शनीय न्यूरो-संज्ञानात्मक कार्यप्रणाली और दृश्यबाधित विद्यार्थियों में स्पर्श संवेदन के माध्यम से मस्तिष्क के दृश्यक (Visual Cortex) के पुनरुपयोग (Cross-modal Plasticity) की प्रक्रिया, तथा सैम बार्नेट (Sam Barnett) और अन्य द्वारा विश्लेषित 'दृष्टिहीनता और श्रवणबाधित बालकों के समावेशन में सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग' (Universal Design for Learning - UDL) के तीन प्रमुख सिद्धांतों (अर्थात् बहुविध प्रस्तुति, बहुविध अभिव्यक्ति, और बहुविध जुड़ाव) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, सुलभ अधिगम वातावरण के निर्माण और विद्यार्थियों में स्वायत्त ज्ञान निर्माण के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? → समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत विशेष आवश्यकता वाले बालकों (CWSN) के लिए 'सार्वभौमिक डिज़ाइन अधिगम' (Universal Design for Learning - UDL) के सिद्धांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. UDL एक ऐसा पाठ्यक्रम और शिक्षण ढांचा है जो अधिगम की बाधाओं को दूर करने के लिए शिक्षण विधियों, सामग्रियों और मूल्यांकन के तरीकों में शुरुआत से ही लचीलापन और बहुविकल्प प्रदान करता है। 2. UDL के तीन मुख्य मनोवैज्ञानिक और तंत्रिका-वैज्ञानिक आधार हैं: सहभागिता के बहुविध साधन (Multiple Means of Engagement), प्रस्तुति के बहुविध साधन (Multiple Means of Representation), और अभिव्यक्ति के बहुविध साधन (Multiple Means of Action and Expression)। 3. यह दृष्टिकोण केवल दिव्यांग या बौद्धिक रूप से पिछड़े बच्चों के लिए ही अनुकूलित है, और सामान्य अथवा प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए इसका उपयोग करने से उनके उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक विकास में बाधा उत्पन्न होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? → ब्रेल लिपि के प्रतिपादक कौन हैं?
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