बाल्बी सिद्धान्त में कितने चरण हैं?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
जॉन बाल्बी (John Bowlby) का संलग्नता सिद्धांत (Attachment Theory) बाल विकास और बाल मनोविज्ञान में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। बाल्बी के अनुसार, बच्चों में प्राथमिक देखभाल करने वाले (विशेषकर माता) के साथ एक सहज भावनात्मक जुड़ाव विकसित करने की प्रवृत्ति होती है, जो उनकी उत्तरजीविता के लिए आवश्यक है। उनके सिद्धांत के अनुसार शिशु जन्म से लेकर बाल्यावस्था तक कुल चार स्पष्ट चरणों (Four Stages) से होकर गुजरते हैं। ये चरण हैं: 1. पूर्व-संलग्नता (Pre-attachment, जन्म से 6 सप्ताह), 2. संलग्नता-का-उदय (Attachment in the making, 6 सप्ताह से 6-8 महीने), 3. स्पष्ट संलग्नता (Clear-cut attachment, 6-8 महीने से 1.5 से 2 वर्ष), तथा 4. अन्योन्यमुखी संबंध (Formation of reciprocal relationships, 18 महीने से आगे)। इस प्रकार, बाल्बी ने शिशुओं के भावनात्मक विकास और जुड़ाव पैटर्न को समझाने के लिए कुल चार चरणों को रेखांकित किया है, जो विकल्प (d) को सही बनाता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- जॉन बाल्बी को बाल विकास में 'संलग्नता सिद्धांत' (Attachment Theory) का जनक माना जाता है।
- उनके द्वारा प्रतिपादित चरणों की संख्या 4 है, जो बच्चों में सामाजिक और भावनात्मक लगाव की क्रमिक प्रगति को दर्शाती है।
- अन्य विकल्प (5, 6, 3) बाल्बी के मॉडल के चरणों की संख्या से मेल नहीं खाते हैं, अतः वे अमान्य हैं।
- मैरी ऐन्सवर्थ (Mary Ainsworth) ने बाल्बी के काम को आगे बढ़ाते हुए 'स्ट्रेंज सिचुएशन' (Strange Situation) के माध्यम से संलग्नता के प्रकारों (सुरक्षित, असुरक्षित-अवरुद्ध, असुरक्षित-द्विधाग्रस्त) का वर्गीकरण किया।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास के क्षेत्र में जॉन बाल्बी का यह सिद्धांत शिशु और माता-पिता के बीच के आत्मीय संबंधों को समझने की आधारशिला प्रदान करता है। अधिक जानकारी के लिए जॉन बाल्बी का संलग्नता सिद्धांत और बाल मनोविज्ञान के विभिन्न चरणों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, DSSSB और BPSC TRE) में बाल मनोविज्ञान से जुड़े वैचारिक प्रश्न पूछे जाते हैं। जॉन बाल्बी के संलग्नता सिद्धांत के चरण न केवल बच्चों के भावनात्मक विकास को समझने में मदद करते हैं, बल्कि शिक्षकों को कक्षा में विद्यार्थियों के व्यवहार, अलगाव की चिंता (Separation Anxiety) और सुरक्षित शिक्षण वातावरण बनाने के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण भी प्रदान करते हैं। यह प्रश्न सीधे तौर पर विकासात्मक चरणों की तथ्यात्मक समझ पर आधारित है।