इनमें से कौन-सी सभ्यता योग का अभ्यास करती थी?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (b) 'सिंधु घाटी सभ्यता' है। सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) प्राचीन विश्व की उन महान सभ्यताओं में से एक है जहाँ योग और ध्यान के साक्ष्य मिलते हैं। पुरातात्विक उत्खनन के दौरान मोहनजोदड़ो से प्राप्त प्रसिद्ध 'पशुपतिनाथ' मुहर (Pashupati Seal) पर एक योगमुद्रा या ध्यानमुद्रा में बैठे हुए देवता का अंकन मिलता है, जिसे आदिशिव या पशुपति महादेव के रूप में पहचाना जाता है। इसके अतिरिक्त, वहाँ से कई ऐसी मूर्तियाँ और मुद्राएँ मिली हैं जो यह दर्शाती हैं कि सिंधु घाटी के लोग योग, ध्यान और शारीरिक मुद्राओं से भली-भांति परिचित थे और अपने दैनिक जीवन व धार्मिक अनुष्ठानों में इनका अभ्यास करते थे। यह भारतीय संस्कृति और बाल विकास के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो प्राचीन काल से ही शारीरिक तथा मानसिक अनुशासन के महत्व को रेखांकित करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- पशुपति मुहर पर अंकित योगमुद्रा सिंधु घाटी सभ्यता में योग के प्रचलन का सबसे ठोस पुरातात्विक प्रमाण है।
- मिस्र की सभ्यता पिरामिडों, ममी और नील नदी की संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है, न कि योग के लिए।
- रोमन सभ्यता अपनी कानून व्यवस्था, वास्तुकला और साम्राज्य विस्तार के लिए जानी जाती है।
- माया सभ्यता मध्य अमेरिका की प्राचीन सभ्यता थी जो खगोल विज्ञान और अपनी विशिष्ट लिपियों के लिए प्रसिद्ध थी।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: भारतीय संस्कृति के ऐतिहासिक विकास और प्राचीन शिक्षा प्रणालियों को समझने के लिए भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का अध्ययन करना आवश्यक है, जो बाल विकास में सामाजिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य को पुष्ट करता है।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, सुपरटेट) में अक्सर भारतीय इतिहास, संस्कृति और प्राचीन धरोहर से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। सिंधु घाटी सभ्यता में योग का अभ्यास यह साबित करता है कि भारत में मानसिक स्वास्थ्य, ध्यान और शारीरिक संतुलन का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। बाल्यावस्था और किशोरावस्था के शारीरिक व मानसिक विकास में योग के महत्व को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है, अतः भावी शिक्षकों को इसके ऐतिहासिक मूल से अवगत होना अनिवार्य है। इस प्रकार के बहुविकल्पीय प्रश्नों को हल करते समय विकल्पों का तार्किक निष्कासन (Elimination Method) करना बेहद मददगार साबित होता है।