घटस्थ योग में कितने अंग होते हैं?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
घटस्थ योग भारतीय योग परंपरा और हठयोग के ग्रंथों (विशेषकर 'घेरण्ड संहिता') में वर्णित एक अत्यंत महत्वपूर्ण पद्धति है। 'घट' शब्द का शाब्दिक अर्थ शरीर या घड़ा होता है। जिस प्रकार कच्चे घड़े को पकाने के लिए आग की तपस्या की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार इस शरीर रूपी कच्चे घड़े को योग साधना, शोधन क्रियाओं और विभिन्न अंगों के अभ्यास द्वारा सुदृढ़, स्वस्थ और दिव्य बनाया जाता है। 'घेरण्ड संहिता' में महर्षि घेरण्ड और चाण्डाल कपाली के संवाद के माध्यम से घटस्थ योग के सात अंगों (सप्तांग योग) का विस्तृत वर्णन किया गया है। महर्षि पतंजलि के राजयोग में जहाँ अष्टांग योग (8 अंग) का विधान है, वहीं घेरण्ड संहिता में शरीर को प्रथम साधन मानते हुए सात अंगों को मान्यता दी गई है, जो इस प्रकार हैं- षटकर्म (शुद्धि), आसन (दृढ़ता), मुद्रा (स्थिरता), प्रत्याहार (धैर्य), प्राणायाम (लाघव/हल्कापन), ध्यान (प्रत्यक्ष ज्ञान) और समाधि (मुक्ति)। इस प्रकार, घटस्थ योग में अंगों की कुल संख्या 7 होती है, जो शारीरिक और मानसिक शुद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- घेरण्ड संहिता में वर्णित घटस्थ योग को 'सप्तांग योग' भी कहा जाता है, जिसमें कुल 7 अंग होते हैं।
- पतंजलि योगसूत्र (राजयोग) में 8 अंग (अष्टांग योग) होते हैं, जबकि हठप्रदीपिका में चतुरंगा योग का उल्लेख मिलता है।
- विकल्प (b) 8 अष्टांग योग के अंगों को दर्शाता है, विकल्प (c) 6 और विकल्प (d) 5 अन्य दार्शनिक प्रणालियों से संबंधित हैं, इसलिए वे यहाँ अमान्य हैं।
- यह प्रश्न शारीरिक शिक्षा, योग शिक्षा और शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे UPTET, STET, KVS) के पाठ्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: योग शिक्षा, शारीरिक विकास और भारतीय दर्शन के अंतर्गत घटस्थ योग शरीर और मन के एकीकरण का संदेश देता है। विस्तृत अध्ययन के लिए देखें समावेशी शिक्षा एवं शारीरिक शिक्षा के आयाम।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में भारतीय संस्कृति, योग दर्शन और पारंपरिक शारीरिक शिक्षा से जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। परीक्षार्थियों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि महर्षि पतंजलि का अष्टांग योग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि) आठ अंगों वाला है, जबकि महर्षि घेरण्ड द्वारा रचित 'घेरण्ड संहिता' में शरीर को आधार मानकर घटस्थ योग के अंतर्गत 7 अंगों का विधान किया गया है। इन दोनों में अंतर स्पष्ट रूप से याद रखना बहुविकल्पीय प्रश्नों में नकारात्मक अंकन (Negative Marking) से बचने में सहायक होता है। शिक्षकों को विद्यालय स्तर पर बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के विकास हेतु इन योगिक क्रियाओं की मौलिक समझ होना अनिवार्य है।