निम्नलिखित में से किस सामाजिक स्तरीकरण के तहत समाज को संपन्न और वंचित में बांटा गया है, लेकिन ऊर्ध्वाधर गतिशीलता कम से अप्रतिबंधित है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
यहाँ प्रश्न सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification) के उस स्वरूप से संबंधित है जिसमें समाज मुख्य रूप से संपन्न (affluent) और वंचित (deprived) वर्गों में विभाजित होता है, किंतु इसमें ऊर्ध्वाधर गतिशीलता (Vertical Mobility) अधिक या कम रूप से अप्रतिबंधित (unrestricted) होती है। सही विकल्प 'वर्ग' (Class) है। वर्गीय व्यवस्था (Class System) खुली सामाजिक स्तरीकरण प्रणाली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां व्यक्ति अपनी योग्यता, शिक्षा, कड़ी मेहनत और आर्थिक संपदा के बल पर अपनी सामाजिक स्थिति को बदल सकता है और उच्च या निम्न वर्ग में गतिशीलता प्राप्त कर सकता है। अन्य विकल्प जैसेधिकारिक, असंबद्ध, या अनुमोदक इस विशेष समाजशास्त्रीय अवधारणा को सटीक रूप से परिभाषित नहीं करते हैं। बाल्यावस्था और सामाजिकरण के संदर्भ में यह समझना महत्वपूर्ण है कि बच्चे जिस सामाजिक वर्ग में बड़े होते हैं, वह उनके शैक्षणिक अवसरों और संज्ञानात्मक विकास को गहराई से प्रभावित करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- वर्ग व्यवस्था (Class System) खुली स्तरीकरण प्रणाली है जिसमें जन्म के बजाय व्यक्तिगत उपलब्धि (Achieved Status) का महत्व होता है।
- ऊर्ध्वाधर गतिशीलता (Vertical Mobility) का अर्थ है सामाजिक सीढ़ी पर ऊपर या नीचे जाना, जो वर्गीय समाजों में संभव होती है।
- जाति (Caste) व्यवस्था इसके विपरीत बंद (Closed) स्तरीकरण का उदाहरण है जहाँ गतिशीलता प्रतिबंधित होती है।
- गलत विकल्प: 'अधिकारिक' और 'अनुमोदक' समाजशास्त्रीय स्तरीकरण के मूल प्रकारों (जैसे वर्ग, जाति, दासता) का हिस्सा नहीं हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: समाजशास्त्र और बाल विकास में सामाजिक स्तरीकरण बच्चों के समाजीकरण (Socialization) को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। अधिक जानकारी के लिए समावेशी शिक्षा और सामाजिक विकास के सिद्धांतों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET और राज्य TET) में समाजशास्त्र और बाल विकास के अंतर्संबंधों पर आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। वर्गीय असमानता बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, सीखने के माहौल और विद्यालयी प्रदर्शन पर असर डालती है। एक शिक्षक को यह समझना आवश्यक है कि वंचित वर्ग से आने वाले विद्यार्थियों को किस प्रकार अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता प्रदान की जाए ताकि कक्षा में समता और समावेशिता को बढ़ावा मिल सके।