निजी विद्यालयों को यादृच्छिक चयन प्रक्रिया के माध्यम से समाज के कमजोर वर्ग और वंचित समूह से अपनी कक्षा की संख्या का .......% लेना होगा। इन बच्चों की पढ़ाई के लिए सरकार धन देगी।
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) की धारा 12(1)(c) के अनुसार, देश के सभी गैर-सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों (Unaided Private Schools) को अपनी प्रवेश स्तर की कक्षा (Entry Level Class) में कम से कम 25% सीटें आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग (Weaker Sections) और वंचित समूहों (Disadvantaged Groups) के बच्चों के लिए आरक्षित करनी अनिवार्य हैं। इन बच्चों का चयन यादृच्छिक लॉटरी पद्धति (Random Selection Process) के माध्यम से किया जाता है। इन बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा का पूरा खर्च सरकार द्वारा प्रति बच्चे के मानक खर्च (Per Child Expenditure) के आधार पर वहन किया जाता है। यह प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत प्रदत्त मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के मूल अधिकार को जमीनी स्तर पर लागू करने और समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम है, जो सामाजिक न्याय और समानता सुनिश्चित करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- RTE अधिनियम 2009 पूरे देश में 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ था (जम्मू-कश्मीर को छोड़कर, जो अब लागू है)।
- निजी स्कूलों में 25% आरक्षण का मुख्य उद्देश्य सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) और वर्गभेद को कम करना है।
- विकल्प (a) 15%, विकल्प (b) 10% और विकल्प (d) 20% गलत हैं क्योंकि अधिनियम स्पष्ट रूप से 25 प्रतिशत कोटा निर्धारित करता है।
- यह प्रावधान प्री-स्कूल (जैसे नर्सरी, केजी) या कक्षा 1 में प्रवेश के समय लागू होता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: आरटीई अधिनियम 2009 समावेशी शिक्षा की रीढ़ है, जो सामान्य विद्यालयों में विविधता और समानता लाने का प्रयास करता है। अधिक जानकारी के लिए समावेशी शिक्षा और नीतिगत प्रावधानों को समझें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
बाल विकास और शिक्षाशास्त्र (CDP) की परीक्षाओं जैसे CTET, UPTET और विभिन्न राज्यों की शिक्षक भर्ती परीक्षाओं (जैसे BPSC TRE) में RTE Act 2009 से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। शिक्षकों को यह समझना आवश्यक है कि शिक्षा केवल कुलीन वर्ग का विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चे का भी इस पर समान अधिकार है। 25% आरक्षण का यह नियम कक्षा कक्ष में सामाजिक विविधता (Social Diversity) को पोषित करता है, जिससे विद्यार्थियों में सहानुभूति, सहयोग और आपसी समझ का विकास होता है। इस प्रकार के प्रश्न तथ्यात्मक और वैचारिक दोनों रूपों में पूछे जाते हैं, जहाँ धारा 12(1)(c) और सरकारी वित्तपोषण (Government Funding) की भूमिका को याद रखना अनिवार्य है।