............ किसी अन्य क्षेत्र के लोगों के बजाय अपने क्षेत्र के लोगों के लिए स्नेह और लगाव की भावना है।
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
दी गई परिभाषा के अनुसार, क्षेत्रवाद (Regionalism) एक ऐसी भावना है जिसमें व्यक्ति अपने विशेष भौगोलिक क्षेत्र, संस्कृति, भाषा या भू-भाग के प्रति अत्यधिक स्नेह, लगाव और वफादारी प्रदर्शित करता है, और अक्सर अन्य क्षेत्रों के लोगों या हितों की उपेक्षा या विरोध करता है। बाल विकास और सामाजिकरण के संदर्भ में, बच्चे का सामाजिक परिप्रेक्ष्य पहले परिवार और पास-पड़ोस तक सीमित होता है, और धीरे-धीरे विद्यालय व समाज के माध्यम से विस्तृत होता है। जब यह क्षेत्रीय जुड़ाव अतिवादी रूप ले लेता है, तो यह राष्ट्रीय एकता के मार्ग में बाधा बन सकता है। सही उत्तर विकल्प (b) है क्योंकि यह सीधे तौर पर किसी क्षेत्र विशेष के प्रति निष्ठा और अपनेपन की भावना को इंगित करता है, जो किशोरावस्था के दौरान समूहीकरण (groupism) और पहचान की खोज की अवस्था में अधिक प्रबल हो सकता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- क्षेत्रवाद (Regionalism): अपने भौगोलिक क्षेत्र के प्रति संकुचित निष्ठा और लगाव।
- भाषावाद (Linguism): अपनी मातृभाषा या भाषा-विशेष के प्रति अत्यधिक मोह और अन्य भाषाओं के प्रति पूर्वाग्रह (विकल्प a गलत)।
- सांप्रदायिकता (Communalism): अपने धर्म या समुदाय को श्रेष्ठ समझना और अन्य धर्मों के प्रति द्वेष रखना (विकल्प c गलत)।
- राष्ट्रवाद (Nationalism): संपूर्ण राष्ट्र के प्रति निष्ठा और देशभक्ति की भावना, जो क्षेत्रीय सीमाओं से परे होती है (विकल्प d गलत)।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: सामाजिकरण की प्रक्रिया में, बच्चा अपने परिवेश, संस्कृति और भौगोलिक परिस्थितियों से प्रभावित होता है। ले वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत यह स्पष्ट करता है कि बच्चों का संज्ञानात्मक और सामाजिक विकास उनकी सांस्कृतिक और क्षेत्रीय अंतःक्रियाओं से आकार लेता है। अधिक जानकारी के लिए समावेशी शिक्षा और सामाजिकरण का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, और BPSC शिक्षक भर्ती परीक्षा) में सामाजिक विज्ञान और बाल विकास के अंतःविषय (interdisciplinary) खंड से अक्सर ऐसे वैचारिक प्रश्न पूछे जाते हैं। शिक्षकों को यह समझना आवश्यक है कि कक्षा-कक्ष में विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के प्रति पूर्वाग्रह न हो, बल्कि विविधता में एकता (Unity in Diversity) के मूल्य को बढ़ावा दिया जाए। यदि कोई छात्र क्षेत्रीय आधार पर अलगाव महसूस करता है, तो एक प्रभावी शिक्षक को सहयोगात्मक अधिगम (Collaborative Learning) और अंतःसांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से उसके सामाजिक क्षितिज को विस्तृत करना चाहिए। सही उत्तर का चयन करते समय विकल्पों के सूक्ष्म अंतर जैसे भाषावाद, राष्ट्रवाद और क्षेत्रवाद को भली-भांति परखना चाहिए।